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विशेष प्रतिनिधि, शिलचर, १० जूनः लगभग मध्यरात्रि में तृषा के शिलचर पहुँचने पर अतिरिक्त पुलिस महानिदेशक (कानून व्यवस्था) मुकेश अग्रवाल ने कहा कि उनकी पहली प्राथमिकता बच्ची को सुरक्षित वापस लाने की थी।

५ जून को अपहरण के पश्चात से ही काछा‹ड पुलिस जी जान से बच्चे की मुक्ति के लिए प्रयत्नशील थी। नन्ही सी बच्ची की जान का जोखिम था, हमारा कर्तव्य उसे सुरक्षित वापस लाना था। हमने पहली कामयाबी पाई है, मीडिया, जनता व अन्तर्राज्यीय सहयोग  से ये संभव हुआ। हमने जितना प्रयास किया, हमारी जो रणनीति थी वो तब तक आपके समक्ष खुलासा नहीं कर सकते जब तक नौकरानी व उसके बाकी सहयोगी पक‹डे नहीं जाते हैं।

उन्होेंने पत्रकार सम्मेलन को संबोधित करते हुए कहा कि सबके सम्मिलित प्रयास से प‹डोसी राज्यवालों को भी अपहरण की जानकारी मिल चुकी थी। हमने बार्डर सील किया था, किन्तु बार्डर सील का तात्पर्य मुख्य मार्ग से है। हम चप्पे-चप्पे पर पहरा नहीं लगा सकते। अपराधी भागने का रास्ता ढूं‹ढ लेते हैं। अपहरण में माओवादी कनेक्शन के बारे में पूछे जाने पर श्री अग्रवाल ने कहा कि अभी हम आपको ये तब तक नहीं बता सकते कि अपराधी लोकल है या कोई ग्रुप है। इन लोगों को जब तक गिरफ्तार नहीं कर लिया जाता, कुछ बातें हम आपको नहीं बता सकते। उन्होंने कहा कि इस अभियान को अंजाम देने में पुलिस अधीक्षक रमनदीप कौर, प्रोवेशनर आफिसर डीएसपी भास्कर ओझा, सब इंस्पेक्टर नीपू कलिता, चांगलोई, आबिदुर्रहमान व ओरिबल ने मुख्य भूमिका निभायी है। अभी यही टीम आगे की कार्रवाई में भी जारी रखेगी। गौहाटी में ४८ घंटे में एक ७-८ साल के शिशु को अपहरण कर्ताओं के चंगुल से छु‹डाने वाले मुकेश अग्रवाल इस चुनौती में भी सफल हुए। 

तृषा के स्वागत में विधानसभा उपाध्यक्ष दिलीप पाल भी उपस्थित थे, उन्होने अस‘ पुलिस को साधुवाद देते हुए कहा कि पुलिस के अथक परिश्र‘ व ईश्वर की कृपा से ही तृषा वापस घर लौटी है। उन्होंने इसके लिङ्मे शिलचर ‘ें आङ्मे अतिरिक्त पुलिस ‘हानिदेशक ‘ुकेश अग्रवाल, काछा‹ड पुलिस अधीक्षक राकेश रौशन को साधुवाद दिङ्मा। उन्होंने कहा कि ५ जून को तृषा की अपहरण के बाद से ही पुलिस दिन-रात अथक परिश्र‘ कर रही थी। तृषा की खोज में शिलचर की जनता भी पीछे नहीं थी, लोगों ने व्हाट्सएप, फेसबुक, सोशल मीडिया पर लगातार तृषा की खोज के लिए प्रचार किया, यही नहीं तो शिलचर में बसस्टैण्ड, रेलवे स्टेशन, आटो आदि पर तृषा के पोस्टर सहित बताने वालों को पुरस्कार की घोषणा भी चिपकायी। पुलिस के अलावा, तृषा के दादा समर राय चौधरी ने दो लाख, विधायक अमिनुल हक लस्कर ने १ लाख व पूर्व मंत्री गौतम राय ने ५० हजार रुपये की पुरस्कार राशि भी घोषित की थी। अब पुलिस के सामने जल्दी से जल्दी अपहरणकर्ताओें को धर-दबोचने की चुनौती है। तृषा के पिता शुभदीप राय चौधरी, मां सप्तपिशा राय चौधरी ने पुलिस, मीडिया व शिलचरवासियों के प्रति कृतज्ञता प्रकट करते हुए कहा कि सबने जिस प्रकार विपत्ति में हमारा सहयोग किया वे अवर्णनीय व अविस्मरणीय है। इस अवसर पर मीडिया की भी‹ड में स्थानीय समाजसेवी गोपाल राय, सुदीप पाल, राजदीप चक्रवर्ती, डॉ. दर्शना पटवा आदि भी उपस्थित थे।

ज्ञात हो कि  आज क्लेरिहाट, मेघालय से शिलचरवासियों के लिए ब‹डी राहत की खबर आई। विगत ५ जून को असम विश्वविद्यालय के प्रोफेसर शुभदीप राय चौधरी की ३ वर्षीया पुत्री तृषा का ब‹डे ही रहस्यमय ढंग से अपहरण कर लिया गया था। उसे क्लेरिहाट में एक सैलुन में अपरान्ह ३.०० बजे के आस-पास लोगों ने देखा। क्लेरिहाट के एसपी इ.जे.एच स्पील थामर के अनुसार अपहरणकर्ता तृषा का बाल कटवाने के लिए सैलुन में लेकर आये थे। सैलुन में तृषा रोने लगी, इससे स्थानीय जनता को संदेह हुआ, उन्होेंने पुलिस को सूचना दी। पक‹डे जाने के डर से अपहरणकर्ता तृषा को वहीं छो‹डकर भाग ख‹डे हुए। पुलिस ने आने के बाद तृषा से परिचय पूछा किन्तु तृषा केवल रोये जा रही थी। वह कुछ बोल नहीं पा रही थी। फिर पुलिस ने शिलचर से गायब तृषा की फोटो के साथ बच्ची का मिलान किया और काछा‹ड पुलिस को तथा तृषा के परिवार को बच्ची के मिलने की सूचना दी। देखते ही देखते सोशल मीडिया पर तृषा के मिलने की खबर आग की तरह फैल गयी। लोग तृषा के परिवार और पुलिस प्रशासन को बधाईयाँ देने लगे। काछा‹ड के एसपी राकेश रौशन ने शिलचर की जागरुक जनता का अभिनन्दन करते हुए कहा कि काछा‹ड पुलिस ने तृषा के अनुसंधान के लिए दिन-रात एक कर दिया। स्वयं हमारे अतिरिक्त पुलिस महानिदेशक मुकेश अग्रवाल अनुसंधान का नेतृत्व कर रहे थे। अतिरिक्त पुलिस अधीक्षक रमनदीप कौर, सदरथाना प्रभारी सहित पूरी पुलिस की टीम लगातार अपराधियों के पीछे लगी हुई थी। हमनें ५ जून से ही संदिग्ध आरोपी गृह परिचारिका रम्भा उर्फ नेहा भाक्ती के सभी संपर्कित व्यक्तियों से पूछताछ, उसके समस्त संभावित ठीकानों पर तलाशी अभियान चल रहा था। पुलिस ने भाक्ती के परिवार, उसके रिश्तेदार, उसके कॉल डिटेल से मिले मोबाइल नंबरों पर भी पूछताछ की थी। पुलिस को अपहरण का उद्देश्य पता नहीं चल पा रहा था। अब जब बच्ची अपनी मां के पास वापस आ गयी है, पुलिस अपराधियों को पक‹डने में कोई विलम्ब नहीं करेगी। क्लेरिहाट पुलिस प्रमुख थामर ने कहा कि हमलोगों ने शिलचर पुलिस को सूचित कर दिया था, किन्तु बच्ची इतना रो रही थी कि उसे संभालना मुश्किल हो रहा था, और शिलचर से जवाब मिलने में विलम्ब हो रहा था। एक समय हमने बच्ची को समाज कल्याण विभाग को हैण्डओवर करने का विचार किया, उनसे किडनैपर्स के बारे में पूछने पर उन्होंने कहा कि अपहरणकर्ता बच्ची को दुकान में छो‹डकर भाग ख‹डे हुए। चूंकि अपहरण के बारे में पुलिस और पब्लिक दोनों सचेत थी, इसलिए अपहरणकर्ताओं ने भागने में विलम्ब नहीं किया। एक सूत्र के अनुसार सैलून में तृषा को लेकर आने वालों में रम्भा उर्फ नेहा भाक्ती भी शामिल थी।