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स्टाफ रिर्पोटर शिलचर 14 नवम्बरः आज प्रेरणा भारती के सम्पादक सीमा कुमार ने नमामी बराक महोत्सव के प्रभारी के रूप में आये असम सरकार के प्रतिनिधि तथा नोडल अधिकारी आनन्द प्रकाश तिवारी से नमामी बराक के सन्दर्भ में विशेष साक्षात्कार लिया।

विभिन्न प्रश्‍नों के जवाब में श्रीतिवारी ने विस्तृत जानकारी देते हुए कहा कि नमामी बराक उद्यम माननीय मुख्यमंत्री सर्वानन्द की अपनी सोच है, उन्होंने बराक को पूरे विश्‍व पटल पर लाने के लिये नमामी बराक उत्सव की रूपरेखा तैयार की । उन्होंने कहा कि बराक की सम्पदा और संभावनाओं को दुनिया के सामने रखना है। वैश्‍विक स्तर पर बराक का पहचान बनाने से बराकघाटी में विभिन्न समस्याओं का निदान होगा। श्रीतिवारी ने कहा कि पूरा असम पिछले 30-40 सालों से उग्रवाद, आंतकवाद आदि समस्याओं को झेला है, एक डर का माहौल बना हुआ था।  इस डर के माहौल को खत्म कर दूनिया के सामने असम तथा बराक का पहचान बनाने के लक्ष्य से ही नमामी ब्रह्मपुत्र और नमामी बराक का आयोजन किया गया है। श्री तिवारी ने कहा कि बराक हमारा जीवन है, और जिसने हमें जीवन दिया है वह अगर विकास से बंचित रहेगा तो यहां पर कोई निवेश करने नही आयेगा। बराक के माध्यम से हमारी पहचान बनाने की जरूरत है। पहचान बनाने के लिये ही नमामी बराक यह आयोजन है, बराक नमामी का मतलब ही समूह का विकास। श्रीतिवारी ने कहा कि यह एक उत्सव नही है यह एक उद्यम है। हमारे प्रधानमंत्री ने एक नये भारत का सपना देखा है जिसे आज सर्वानन्द सोनोवाल बराक नमामी के माध्यम से आगे ले जा रहे हैं। •नमामी बराक में हिन्दी, हिन्दीभाषी, चायबागानवासी उपेक्षित हैं? यहां तक कि  थीम सांग में भी चायबागान और हिन्दीभाषी उपेक्षित हैं? उत्तर में श्री तिवारी ने कहा कि 4.50 मिनट के गीत में हर चीज को डालना संभव नही हो पाया है लेकिन थीम गीत में चायबागान का धून रखा गया है, साथ ही हिन्दी वर्सन में छठपूजा समेत विभिन्न हिन्दीभाषी कलाकारों ने अपनी कला प्रस्तुत किया है। नमामी बराक होने के बाद यह बन्द होने वाला नही है, हर साल या दो साल में एक बार  नमामी बराक उत्सव होगा ऐसी संभावना है। इन विषयों पर ध्यान दिया जायेगा। 

नमामी बराक उद्यम एक राष्ट्रव्यापी कार्यक्रम है लेकिन यहां पर एक भी बेनर-पोस्टर या लोगों में हिन्दी का नामोनिशान नही आया।

 • जहां पर राष्ट्रपति आ रहे हैं वहां पर राष्ट्रभाषा हिन्दी की उपेक्षा क्योें? 

उन्होंने सफाई देते हुए कहा कि हिन्दी की कोई उपेक्षा नही हो रही है हिन्दी में बेनर-पोस्टर तैयार है बस लगाने की आवश्यकता है,  प्रचार-प्रसार का एक समय होता है उसी हिसाब से अब बचे हुए दिनों में सभी भाषाओं में जोरदार प्रचार-प्रसार  किया जायेगा। समाचार पत्र, आल इन्डिया रेडिओ, फेसबूक, वाट्सअप, विभिन्न समूहों, बाइक रैली, वीडीपी कार्यकर्ता, आशा कर्मी आदि के माध्यम से शहर से लेकर गांव तक जोरों से प्रचार-प्रसार जारी होगा, किसी भी विषय को नजर अन्दाज नही किया जायेगा। हिन्दी में गीत के लिये 18 कलाकार आ रहे हैं, यह भी गौरव का विषय है। उन्होंने यह भी कहां कि बराक में पहलीबार इस तरह का आयोजन हो रहा है, यहां के प्रशासन के लिये यह नया कार्य है। इसलिये कुछ असुविधाएं हो रही है, लेकिन उत्सव से पहले हर-कमी को दूर कर लिया जायेगा। नमामी बराक को सुन्दर, भव्य और आकर्षक बनाने के लिये श्री अग्निहोत्री, भारत भुषण चौधुरी, चिन्मय फूकन, धीरज सिंह समेत स्थानीय जिला प्रशासन के सभी वर्ग के अधिकारी आदि लगे हुए हैं, आगामी चार दिनों में हमारी सहायता के लिये दिसपुर से और 9 अधिकारी शिलचर पहुंच रहे हैं। 

• इस महोत्सव से बराक की जनता किसप्रक्रार लाभान्वित होगी ?

श्रीतिवारी ने कहा कि नमामी बराक के जरिए अन्य देशों, राज्योें  से आदान-प्रदान होगा, आदान-प्रदान से निवेश होगा, एकदिन बराक गुजरात के तरह विकसित होगा, नमामी बराक एक अच्छी शुरुवात है।

अन्त में आनंद प्रकाश तिवारी ने यहाँ की जनता से अपील करते हुए कहा कि पूरी तन्मयता के साथ बराकघाटी व उसकी संपदा, संभावनाओं को राष्ट्र तथा परराष्ट्र के सामने रखने के लिए अन्तर्मन से प्रयास करें, मैं अपनी पूरी प्रशासनिक टीम की तरफ से बराक के प्रत्येक व्यक्ति के साथ खड़े होने, चलने के लिए आग्रही हूँ। नमः बराक, नमामी बराक कहकर उन्होंने साक्षात्कार को विराम दिया।