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प्रे.सं.शिलचर, 29 नवंबर ः आज बराकघाटी के कई हिन्दीभाषी संगठनों ने बराकघाटी में आयोजित नमामि बराक महोत्सव में राष्ष्ट्रभाषा की उपेक्षा के सन्दर्भ में एडीसी वीसी नाथ के हाथों असम के महामहिम राज्यपाल को एक ज्ञापन प्रेषित किया।

संगठनों ने राज्यपाल से मांग किया है कि दो महीने के भीतर ‘हिन्दीभाषी व चाय श्रमिक विकास परिषद’ का गठन किया जाय, अन्यथा हमलोग जनआंदोलन के लिए बाध्य होंगे। आज ज्ञापन देने वालों में हिन्दीभाषी समन्वय मंच, शिलचर-असम, हिन्दीभाषी छात्र परिषद काछाड़ (असम), बराक चाय जनजागृति मंच, शिलचर (असम), सर्व हिन्दुस्तानी युवा परिषद शिलचर (असम), पूर्वोत्तर हिन्दुस्थानी सम्मेलन, काछाड़ (असम), बराक हिन्दीभाषी  ब्राह्मण समाज , शिलचर (असम), अखिल भारतीय यादव महासभा, , काछाड़ दुषाध समाज कल्याण समिति असम, बराक हिन्दीभाषी महिला मंच, हिन्दी विकास परिषद, हिन्दीभाषी युवा मंच, प्रेरणा भारती आर्थिक सामाजिक उन्नयन व शोध समिति, उपभोक्ता एवं मानवाधिकार, ईटभट्ठा एसोशिएशन शिलचर इत्यादि संगठन शामिल थे।

 ज्ञापन में संगठनों ने उल्लेख किया कि हम बराकवासियों के लिए अत्यन्त गर्व का विषय है कि माननीय मुख्यमंत्री सर्वानन्द सोनवाल के महती प्रयास से बराकघाटी में पहलीबार ऐतिहासिक नमामी बराक महोत्सव का आयोजन किया गया। यह कार्यक्रम बराकघाटी के इतिहास में स्वर्णाक्षरों में लिखा जाएगा। कार्यक्रम प्रत्येक दृष्टि से सफल रहा। किन्तु प्रतिनिधियों ने कहा कि हम आपको ये ज्ञापन प्रेषित करते हुए मर्माहत हैं कि आयोजन समिति द्वारा प्रकाशित स्मारिका में राष्ट्रभाषा को कोई स्थान नहीं दिया गया।  

    ज्ञापन के द्वारा बताया कि आज से लगभग 150 वर्ष पूर्व हमारे पूर्वज बराकघाटी में उत्तर प्रदेश, बिहार, राजस्थान, झारखण्ड, छत्तीसगढ, वर्धमान, उड़ीसा, आंध्रप्रदेश आदि क्षेत्रों से आकर चाय बागान को आबाद किये। बराक घाटी के उत्थान में सर्वाधिक योगदान  चाय श्रमिकों का है, यहाँ के आय का मुख्य स्रोत चाय उद्योग है। हम सबने अपने खून-पसीने से बराकघाटी को आबाद किया। देश के विभिन्न भागों से आए लाखों की संख्या में हिन्दीभाषी, चाय श्रमिक यहाँ नौकरी, व्यवसाय, मजदूरी कर निवास कर रहे हैं। बराक के उन्नति में हम सबका महत्वपूर्ण योगदान होने के बाद भी सर्वदा हमें उपेक्षा का शिकार होना पड़ता है। नमामी बराक महोत्सव में भी हमारे साथ हुए अन्याय को हम सहन नहीं कर पा रहे हैं। इसलिए आपके समक्ष ये ज्ञापन प्रस्तुत कर रहे हैं ताकि भविष्य में इसप्रकार राष्ष्ट्रभाषा, हिन्दीभाषी, चाय श्रमिक और अन्य भाषायी अल्पसंख्यक उपेक्षा के शिकार न होने पायें।

 विभिन्न संगठनों के सदस्यों ने बताया कि नमामि बराक महोत्सव की प्रस्तुति के लिए होने वाली सभाओं में हमारे समाज के प्रतिनिधि संगठनों, बुद्धिजीवियों, सामाजिक कार्यकर्ताओं की प्रारम्भ से ही उपेक्षा की गयी। महोत्सव के लिए गठित उपसमितियों में हिन्दीभाषी अथवा चाय श्रमिक समाज के लोगों को प्रतिनिधित्व नहीं दिया गया। इसलिए हमलोगों ने विगत 14 नवंबर को महोत्सव के नोडल आफिसर माननीय आनंद प्रकाश तिवारी के माध्यम से मुख्यमंत्री के नाम ज्ञापन प्रेषित किया। तत्पश्‍चात महोत्सव में हो रहे विभिन्न कार्यक्रमों में हमें औपचारिकता के लिए प्रतिनिधित्व दिया गया । नमामि बराक के थीम सांग में बराक के प्रमुख समाज चाय श्रमिक अथवा चाय बागान का कोई उल्लेख नहीं है। हमारे प्राचीन भुवन तीर्थ, बरमबाबा का भी कहीं नामोच्चारण नहीं है। नमामी बराक के उपलक्ष्य में प्रकाशित होने वाली स्मारिका में किसी भी हिन्दीभाषी लेखक, पत्रकार, साहित्यकार को अवसर नहीं दिया गया। जबकि प्रशासन की ओर से यह कहा गया था कि ये अन्तर्राष्ट्रीय कार्यक्रम है, इसमें हिन्दी, अंग्रेजी को ही वरियता मिलेगी किन्तु वरियता मिलना तो दूर स्मारिका में बांग्ला के 13, अंग्रेजी के 10, असमिया का एक और राष्ट्रभाषा का एक भी लेख शामिल नहीं किया गया। यहाँ तक कि स्मारिका समिति में एकमात्र हिन्दी समाचार पत्र प्रेरणा भारती को कोई स्थान नहीं दिया गया। बृहत्तर हिन्दीभाषी समाज व चाय श्रमिक समुदाय इस निर्मम उपेक्षा से आहत है। 

ज्ञापन के अंत में महामहिम राष्ट्रपति से पुरजोर निवेदन करते हुए सदस्योें ने कहा कि भविष्य में ऐसे समारोहों में बराकघाटी के प्रमुख चाय श्रमिक व हिन्दीभाषी समाज को वंचित व उपेक्षित न किया जाय, साथ ही राष्ट्रीय कार्यक्रम में राष्ट्रभाषा व राजभाषा को भी उचित मर्यादा प्रदान की जाय। इसलिए बराकघाटी के हिन्दीभाषी समाज की ओर से संगठनों ने अनुरोध किया है कि असम सरकार के द्वारा हिन्दीभाषी व चाय श्रमिकों के कल्याण के लिए  “बराकघाटी हिन्दीभाषी व चाय श्रमिक उन्नयन परिषद” का गठन किया जाय। अंत में सभी सदस्योें ने जोर देते हुए कहा कि यदि  2 महीने के भीतर असम सरकार ने परिषद का गठन नहीं किया तो बृहत्तर हिन्दीभाषी व चाय श्रमिक समाज एक व्यापक जनआंदोलन के लिए बाध्य होगा।

प्रतिनिधि मंडल में हरिनारायण वर्मा, राजेन्द्र कुमार पाण्डेय, चंद्रमा प्रसाद कोइरी, दिलीप कुमार, संजीव राय, युगलकिशोर त्रिपाठी, अमरनाथ प्रजापति, राजेन कुँवर, चंद्रशेखर सिंह, गोलक ग्वाला, भोलानाथ यादव, मुरलीधर कानु, श्रीमती नीलम गोस्वामी, सीमा कुमार, मनीष पाण्डेय, महावीर वरदिया, जयप्रकाश गुप्ता, वरेश पाण्डेय, रविकुमार शुक्ला, राजेन्द्र दुषाध, आनन्द प्रसाद दुबे, विक्रम दुषाध, अंकुर दुषाध, मनोज शाह, दुर्गा कानु, विमल नोनिया, सोनु यादव, उमाशंकर दुषाध आदि शामिल थे। उपरोक्त ज्ञापन की प्रतिलिपि महामहिम राष्ष्ट्रपति, प्रधानमंत्री, गृहमंत्री, असम के मुख्यमंत्री, राजभाषा संसदीय समिति-नई दिल्ली व राजभाषा विभाग, गृहमंत्रालय भारत सरकार को भी प्रेषित की गयी है।