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प्रे.सं.शिलचर, 29 दिसंबर ः असम विश्‍वविद्यालय के कुलपति प्रोफेसर दिलीप चंद्र नाथ ने कहा कि जिसको थोड़ा बहुत भी आता हो, उसे हिन्दी लिखने का प्रयास करना चाहिए।

ये हिन्दी के लिए ‘ग’ क्षेत्र है। हिन्दी में 30% काम करने से भी होगा। असम विश्‍वविद्यालय के राजभाषा प्रकोष्ठ द्वारा आयोजित राजभाषा प्रशिक्षण कार्यशाला में उपरोक्त बातें कुलपति ने प्रशिक्षणार्थियों को संबोधित करते हुए उद्घाटन सत्र में कही। उन्होंने कहा कि जितना हमें करना चाहिए, उसे जल्द पूरा कीजिए। कहीं कोई समस्या हो मुझे बताइये, मैं तैयार हूँ। मुझे पता है राजभाषा प्रकोष्ठ में कर्मचारी कम हैं, फिर भी हम कर सकते हैं। मानसकिता बनाने की जरुरत है। हमें एक तालिका बना लेनी चाहिए कि कार्यालय में काम के लिए कौन-कौन से शब्द आवश्यक हैं, उसका अभ्यास करना चाहिए। चाइनीज लोगों की लिपि सांकेतिक है, वे लोग कुछ चिन्ह चुन लेते हैं, उससे काम चलाते हैं, हम भी कर सकते हैं।  किसी एक विभाग से शुरु कीजिए और अगले दो-तीन साल में 30% लक्ष्य हासिल कीजिए। उद्घाटन सत्र में राजभाषा अधिकारी डॉ. सुरेन्द्र कुमार उपाध्याय ने अतिथियों का स्वागत एवं परिचय करवाया। दीप प्रज्ज्वलन से राजभाषा कार्यक्रम का शुभारम्भ हुआ। कार्यशाला आयोजन समिति के अध्यक्ष प्रोफेसर नागेन्द्र पाण्डेय ने स्वागत वक्तव्य में कहा कि मैं अध्यक्ष के रुप में राजभाषा प्रशिक्षण कार्यशाला में सबका स्वागत करता हूँ। उन्होंने अपने वक्तव्य में कार्यशाला के उद्देश्य के बारे में बताया। वरिष्ठ अध्यापक प्रो. ज्ञानप्रकाश पाण्डेय ने राजभाषा प्रकोष्ठ की गतिविधियों की प्रशंसा करते हुए उम्मीद प्रकट की कि राजभाषा प्रकोष्ठ की सहायता से असम विश्‍वविद्यालय अपने कर्मचारियों को हिन्दी का ज्ञान प्रदान करने में और भी अधिक सक्षम हो सकेगा। दैनिक प्रेरणा भारती के प्रकाशक और सामाजिक कार्यकर्ता दिलीप कुमार ने राजभाषा प्रशिक्षण कार्यशाला आयोजन किये जाने पर कुलपति की प्रशंसा करते हुए कहा कि असम विश्‍वविद्यालय कुलपति के नेतृत्व में राजभाषा के अनुपालन में पूरे देश में स्थान हासिल कर सकता है। हिन्दी सीखना सहज-सरल और बिल्कुल आसान है भारत की अधिकांश लिपियों में  समानता है। केवल दो-चार अक्षरों का ही फर्क है। चूंकि सबकी भाषाओं की माता संस्कृत है, इसलिए आधे से ज्यादा शब्द एक ही जैसे हैं। फिर हिन्दी सिनेमा, सिरियल के माध्यम से भी लोगों में हिन्दी का व्यापक प्रचार हुआ है। प्रयास करना चाहिए। प्रभारी कुलसचिव डॉ. प्रदोष किरण नाथ ने कार्यशाला आयोजन के लिए बधाई देते हुए कहा कि मैं भी टूटी-फूटी हिन्दी बोल लेता हूँ, आप लोग अच्छा प्रयास कर रहे हैं। 

साढ़े ग्यारह बजे से अपरान्ह एक बजे तक शैक्षिक सत्र में राजभाषा हिन्दी की वर्तनी, वाक्य विन्यास एवं लिपि के बारे में डॉ. प्रभात कुमार मिश्र ने प्रशिक्षण प्रदान किया। द्वितीय सत्र में नराकास के सदस्य सचिव डॉ. प्रशान्त कुमार तिवारी ने राजभाषा हिन्दी के व्यवहार, अनुवाद एवं कंप्युटर उपयोग के बारे में बताया। समापन सत्र में प्रशिक्षणार्थियों ने अनुभवकथन किया। उन्हें प्रमाणपत्र वितरण किया गया।