Offcanvas Info

Assign modules on offcanvas module position to make them visible in the sidebar.

A A A

जवाहर लाल पाण्डेय शिलचर 9 जनवरीः आज राष्ट्रभाषा व चाय जनगोष्ठी उन्नयन मंच द्वारा आयोजित धर्ना-प्रदर्शन ने एकबार साबित कर ही दिया कि चायबागानवासियों व हिन्दीवासी अगर अपनी असली रूप अपना ले तो उन्हें अपनी मांगे मनवाने में देर नही लगेगा।

भारी मात्रा में आन्दोलनकारी हांथ में अपनी मांगों का प्लेकार्ड लेकर अपनी आवाज बूलन्द करते नजर आये। राष्ट्रभाषा का अपमान नही सहेगा हिन्दुस्थान, चाय जनगोष्ठियों को 30 प्रतिशत आरक्षण देना होगा, चायबागानवासियों पर उत्पीड़न नही चलेगा, उन्नयन परिषद गठऩ करना होगा इन सभी नारा से शिलचर के खुदीराम मूर्ति के नीचे गूंजता रहा। मंच द्वारा आवाज बूलंद किया गया। भारी मात्रा में आन्दोलनकारियों ने समूह में जाकर जिलाधिकारी कार्यालय के गेट पर जाकर भी अपनी आवाज बुलंद किया़।

अपने संबोधन में राष्ट्रभाषा व चाय जनगोष्ठी उन्नयन मंच द्वारा  आयोजित धर्ना-प्रदर्शन के दौरान मंच के मुख्य संयोजक दिलीप कुमार ने कहा कि आज से एक नये आन्दोलन की शुरुआत है। बराकवैली में आजादी के बाद जिन लोगों ने आजादी का सूरज नही देखा है उन्हें एक सूरज दिखाने का एक अभिनव प्रयास यह मंच कर रहा है। उन्होंने कहा कि बागी नाम है मेरा, बगावत काम है मेरा, मिटा दो जुल्म की हस्ती, यही पैगाम है मेरा। यह उन्नयन मंच उसका हिसाब लेगा, आने वाले दिनों में हम इस आन्दोलन को बड़े स्तर पर ले जायेंगे, हम सरकार के पास अपना मांग सरकार के समक्ष रखेंगे। मंच ऐलान करता है कि आजतक चायजनगोष्ठी को जितनी बंचना हुई है , ताड़ना हुई है, आनेवाले दिनों मेें इस आन्दोलन को और भी तेज किया जायेगा। अपनी भाषा के लिये, जनगोष्ठी के लिये, अपनी भविष्य के लिये, अपनी पीढ़ी के लिये, बहुत सारी मांग के लिये यह 30 संगठनों ने मिलकर अपनी आवाज सरकार तक पहुंचाने के लिये यह धर्ना-प्रदर्शन किया जा रहा है। आज से देढ़ सौ साल पहले चायबागान वासी आये अपनी खून-पसीना एक कर बराक समेत असम को आवाद किया। आसाम को आवाद किया आज आसाम को पूरी दूनिया में पहचान किया। उसी चायजनगोष्ठी के लोगों को आज उपेक्षा का शिकार होना पड़ रहा है। असम को आवाद करनेवाले ही बंचित और शोषित हैं यह बर्दास्त नही किया जायेगा। आज भी चायबागानवासी लोग शिक्षा में, सामाजिक रूप में पिछड़े हुए हैं। मंच के माध्यम से उनकी दशा को सामने लाने का प्रयास किया जा रहा है। आजादी के बाद हिन्दीभाषियों की संख्या बहुसंख्यक था। यहां पर स्वर्गीय द्वारिका नाथ तिवारी आदि प्रतिनिधित्व कर गये हैं, आज हमारी प्रतिनिधित्व को समाप्त करने की साजिश किया जा रहा है। इसी साजिश को समाप्त करने के लिये ही चाय जनगोष्ठी के लोगों को 30 प्रतिशत आरक्षण देना होगा। हमारे समाज के लोग मजदूरी करते हैं, हमारे समाज के लोग पसीना बहाते हैं, उस पसीने से ही जीवन-यापन करते हैं, जब उन्हें किसी सरकारी कार्यालय में काम पड़ता है तो बर्थ सर्टिफिकेट की जरुरत पड़ती है, उन्हें इन्कम सर्टिफिकेट की जरुरत पड़ती है, उनके घर में कोइ गूजर जाता है तो बर्थ सर्टिफिकेट की जरुरत पड़ती है तो सरकारी कार्यालयों में भेदभाव होता है। उत्पीड़न होता है, अन्याय होता है उन्हें दौड़ाया जाता है उन्हें परेशान किया जाता है। सभी चाय बागानों व ग्रामीण क्षेत्रों में गोचर भूमि की व्यवस्था किया जाय, जहां गौ माता को चरने-फिरने के लिये जगह मिले। गोचर भूमि की व्यवस्था करने की मांग किया। चायजनगोष्ठी के पास इतना पैसा नही कि वे प्राइवेट स्कुलों में अपने बच्चों को पढ़ा सके। कोचिंग करवा सके, शहर में पढ़ सके, इसलिये ये बच्चे बहुत मेहनत कर 40 से 45 नम्बर जूटा पाते हैं। लेकिन सरकार ने निर्धारित कर दिया है कि 45 प्रतिशत से कम जिनका होगा वे प्रतियोगिता में हिस्सा नही ले सकता है, यह कैसा नियम है यह हमारे भाइयों के साथ घोर अन्याय है, जो समर्थ नही है जो चाय बागान के बच्चे हैं क्या उनको नौकरी करने का हक नही है, हमारे संविधान में सभी को समान मौलिक अधिकार हैं मगर यहां पर चायजनगोष्ठी के बच्चों को मौलिक अधिकार का सरकार हनन कर रही है। इसलिये हम मांग करते हैं कि सरकार द्व्रारा जो भी नौकरी हो रही है उसमें 30 प्रतिशत आरक्षण देना  होगा। दिलीप कुमार ने कहा कि जबतक हमारी मांगे मानी नही जायेगी तबतक हमारी आन्दोलन जारी रहेगी। उन्होंने कहा कि इस आन्दोलन के माध्यम से सरकार को 2  महीने का समय देते हैं आगामी 9 मार्च तक हमारी मांगे नही मानी गयी तो अगले दिन हम एक विशाल आन्दोलन के साथ फिर हाजिर होंगे। आन्दोलन कर दिखायेंगे कि हमारी बात माननी होगी। 

अपने संबोधन में कांग्रेस के युवा नेता तथा काछाड़ हिन्दीभाषी छात्र परिषद के अध्यक्ष श्रीसंजीव राय ने कहा कि आज इस धर्ना-प्रदर्शन में आये लोगों को पूरे बराकघाटी  के विभिन्न इलाके मेें रह-रहे चाय बागानवासियों को राष्ट्रभाषा और चाय जनगोष्ठी का विकास चाहिए। क्योंकि आजादी 70 साल बाद भी चाय बागान वासी पीड़ित-शोषित-बंचित हैं। सभी वर्ग को एक कर राष्ट्रभाषा का विकास करना हमारा लक्ष्य है। आज का धर्ना-प्रदर्शन किसी का खिलाफ नही है। हम अपनी आवाज को राज्य के मुख्यमंत्री, सांसद, मंत्री, विधायकों तक पहुंचाना है। श्रीराय ने अपनी आवाज बुलंद करते हुए कहा कि यहां के लोग राष्ट्रभाषा से बंचित हो रहे हैं, चाय बागान श्रमिकों की मजदूरों की उचित मजदूरी नही मिल रही है। इसके लिये हम आज यहां धर्ना-प्रदर्शन कर रहे हैं। आज यह जो धर्ना-प्रदर्शन हो रहा है यह एक छोटा कोशिश है आगे बहुत कुछ बाकी है। 32 संगठन एकजूट होकर खड़े हैं। आज हमलोग गणतांत्रिक व शान्ति तरीके से आंदोलन कर रहे हैं इसका मतलब यह नही है कि हम कमजोर हैं। लेकिन हमारा यह संघर्ष किसी भाषा-सम्प्रदाय के खिलाफ नही है। हमें इस मंच के माध्यम से हिन्दीभाषी समाज को न्याय दिलाना है।

अपने संबोधन में बराकघाठी हिन्दीभाषी ब्राह्मण समाज के कार्यकर्ता  युगल किशोर त्रिपाठी ने कहा कि आज धर्ना-प्रदर्शन के माध्यम से सरकार के समक्ष अपनी मांगे रखने जा रहे हैं। आज जो शुरु हुआ है यह ट्रेलर मात्र है हम यही तक सीमित नही रहेंगे। अभी हम लोकतांत्रिक, गणतांत्रिक तरींके से सरकार के पाश अपनी आवाज   सरकार के पास पंहुचाने की कोशिश कर रहे  हैं , हमारी सहनशक्ति खत्म हो चूकी है। इसलिये सरकार हमारी भावनाओं को समझे। अन्यथा हम बृहत आन्दोलन करने के लिये बाध्य हो होंगे। 

अपने संबोधन में अखिल युवा यादव महासभा के असम प्रदेश सभापति भोलानाथ यादव ने कहा कि असम में हो रहे हैं हिन्दीभाषियों व बागानवासियों पर अत्याचार हो रहा है। राष्ट्रभाषा का अत्याचार हो रहा है यह हम बर्दास्त नही करेंगे। अगर सरकार हमारी बात नही मानी तो हम एक विशाल रैली के माध्यम से अपनी आवाज बूलन्द कर हिन्दीभाषी व बागानवासियों के लिये उचित सम्मान दिलाने के लिये बाध्य करेंगे। इतिहास गवाह है कि हिन्दीभाषी जब जाग जाते हैं तो स्थिति बदल देते हैं। अपने संबोधन में अन्नपूर्णा मन्दिर के पुजारी आनन्द द्विवेदी ने कहा कि असम में हिन्दीभाषियों की एक बड़ी अवदान है। लेकिन वही समाज आज मौलिक अधिकारों के बंचित है। बहुत सारी समस्याओं को झेल रहे हैं। श्रमिकों के खाने-पीने का अभाव, शिक्षा, स्वास्थ्य, बिजली-पानी से बंचित है। सरकार को हिन्दीभाषी व बागानवासियों की मांग को तत्काल मानते हुए  कार्रवाही करनी होगी नही तो होगा आन्दोलन। 

अपने संबोधन में बराक हिन्दीभाषी महिला मंच के तरफ से सीमा कुमार ने कहा कि आज 30 संगठनों द्वारा एकत्रित रूप से एक विशाल आन्दोलन के माध्यम से यह बताने का कोशिश किया जा रहा है कि हिन्दीभाषियों की अटूट ताकत है, वे प्रदर्शन नही करते हैं जब अपने औकात पर आ जायेंगे समस्याओं का समाधान करने के लिये सरकार बाध्य होगी। श्रीमती सीमा कुमार ने और कहा कि दूनिया के लोग चांद पर जा रहे हैं लोग कहां से कहां पहूंच गये मगर चाय बागान के में रह-रहे लोगों की अभी दुर्दशा झेलनी पड़ रही है। चायबागान बासी आज भी पिछड़े हुए हैं। कोई बहुत आगे बढ़ जा रहा है और कोई पीछे रह जाये यह समाज में समानता नही है। उन्होंने  धर्ना-प्रदर्शन के माध्यम से सरकार को आगाह करते हुए कहा कि नागरिक पंजी में भी हिन्दीभाषियों का भेदभाव किया गया है। सरकार से हमारी मांग है कि जो लोग बागान में रह रहें हैं मगर उनकी जाति एनआरसी की सूची में नही है उस जाति को वेसर्त शामिल कर उनलोगों का नाम दूसरी सूची में प्रकाशित किया जाय। 

अपने संबोधन में महाबीर बरदिया ने कहा कि हम हिन्दुस्तानी राष्ट्रभाषा का अपमान किसी भी हाल में नही सहेंगे। हम विभिन्न हिन्दीभाषी संगठनों के माध्यम से इसी प्रकार का आन्दोलन कर अपनी आवाज सरकार के समक्ष पहुंचायेंगे और मनवायेंगे। अपने संबोधन में डा. सुनील पाठक ने कहा कि हम अपनी अस्तित्व को इतना विकसित करेंगे कि अपने आप अन्य भाषा के लोग हमें स्वीकार करने लगेंगे। काछाड़ में 150 हिन्दी विद्यालय था जिसे बांग्ला में परिवर्तित कर बांग्ला पढ़ाया जा रहा है हम सभी हिन्दी स्कुलों को पुनः खोलवाने के लिये सरकार से मांग कर रहे हैं। जितने स्कुल बंद है इसका रिपोर्ट डीसी के माध्यम से सरकार तक पहुंचायेंगे। उन्होंने यह भी कहा कि असम में हिन्दी की पढ़ाई प्राथमिक स्तर से आरंभ हो तभी आगे जाकर बच्चे माध्यमिक व महाविद्यालयों में अपनी प्रतिभी दिखा पायेंगे। आज असम विश्‍वविद्यालय के हिन्दी विभाग में छात्र-छात्राओं की कमी का कारण यह ही है कि जड़ मजबूत नही है।

दिन 11 बजे से आरंभ हुई धर्ना-प्रदर्शन दो घन्टे से अधिक चलने के बाद आन्दोलनकारी एकसमूह में बेनर के साथ जिलाधिकारी कार्यालय के गेट पर गये। वहां पर प्रतिनिधिमण्डल जाकर काछाड़ के डीडीसी मधुमिता चौधुरी को एक ज्ञापन दिया। ज्ञापन में कहा गया है कि आजादी के बाद जब पूरा काछाड़ एक था, यहां हिन्दी माध्यम के 150 से ज्यादा स्कूल खोले गये थे। जिनका धीरे-धीरे परिवर्तन कर दिया गया। आज भी नाम है हिन्दी पाठशाला और वहां बांग्ला माध्यम से शिक्षा दी जा रही है। प्राथमिक और निम्न प्राथमिक विद्यालयों के अनुपात में माध्यमिक, उच्च माध्यमिक और महाविद्यालयों का चाय बागान क्षेत्र में  सर्वथा अभाव है। हिन्दी माध्यम के विद्यालयों में और हिन्दी के छात्रों को समय पर पुस्तक उपलब्ध नही करायी जाती है। महाविद्यालयों में हिन्दी के छात्र अच्छी संख्या में होने के बावजूद वहां हिन्दी शिक्षकों की नियुक्ति नही हो रही है। मांग यह है कि जहां शिक्षक कम है, वहां शिक्षक नियुक्त किया जाय, हिन्दीभाषियों के लिये मातृभाषा के माध्यम से शिक्षा व्यवस्था की जाय। समय पर पार्यप्त हिन्दी पुस्तकें उपलब्ध करायी जाय। सभी उच्च शिक्षा संस्थानों में चाय श्रमिक व पूर्व चाय श्रमिक के लिये 30 प्रतिशत आरक्षण की सुविधा प्रदान की जाय। इसके लिये भी चायबागान श्रमिकों, भूमि अतिक्रमण, रोजगार, स्वास्थ्य, जनगणना, एनआरसी  आदि विषयों पर विभिन्न मांगे शामिल है। 

धर्ना प्रदर्शन के दौरान आनन्द द्विवेदी, रितेश नुनिया, चन्द्रशेखर सिंह, अरविन्द् कुमार सिंह, अनिश कुमार सिंह, जय प्रकाश गुप्ता, सुनील कुमार पाठक, भोलानाथ यादव, दीपक यादव, संजय दूबे, सन्तोष हजाम, विश्‍वजीत हजाम, कल्याण हजाम, काशी प्रसाद सिंह, सुनील कुमार सिंह, चन्द्रमा प्रसाद कोइरी, दयाराम नुनिया, जयराम नुनिया, राजेन्द्र कुमार पाण्डेय, मनीष पाण्डेय, रामनाथ नुनिया, सत्यम नुनिया, घनश्याम कुर्मी, शिवकुमार, बसन्त लाल दुषाद, सन्दीप शुक्ला, रणजित पाशी, राजेन्द्र नुनिया, विश्‍वनाथ कहार, राजापति ग्वाला, अवधेश पाण्डेय, लखी पाण्डेय,  प्रदीप राजभर, महाबीर बरदिया, बसन्त कुमार झा, संजय गौड़, बाबुराम दुषाद, शिवशंकर नुनिया, विनीता सिंह, रमणी रविदास, राजेन्द्र दुषाद, रवि कुमार शुक्ला, शान्तालाल सिंह, कंचन सिंह, अर्पणा तिवारी, लखन नुनिया आदि प्रमुख उपस्थित थे।