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जवाहर लाल पाण्डेय शिलचर 15 मार्चः राष्ट्रभाषा जिन्दाबाद, चाय-जनगोष्ठी जिन्दाबाद, चाय जनगोष्ठी को 30 प्रतिशत आरक्षण देना होगा, कमजोर चाय बागानों को आर्थिक सहायता देना होगा आदि नारा सुबह 11 बजे अपरान्ह 3 बजे के बीच शिलचर के जिलापुस्तकालय और शहर के राजमार्गो पर गूंजता रहा।

महारैली में इतनी लम्बी कतारे होगी यह किसी ने सोचा भी नही था। प्रेमतला प्वाइन्स से रांगीरखाड़ी तक आन्दोलनकारियों से खचाखच भरा हुआ दिखाई दिया। हजारों के तदात में प्लेकार्ड -मंच का बेनर लेकर आन्दोलनकारी चल रहे थे। माइकों पर नारा लगाया  जा रहा था। हलचल से शिलचर थर्राया हुआ था। आन्दोलनकारियों की लम्बी कतार खत्म ही नही हो रहा था। शिलचर शहर के दूकानों में बैठे दूकानदार गण महारैली को देखने के लिये भीड़ लगाये हुए थे। 

काछाड़ पुलिस अधीक्षक राकेश रौशन के निर्देश पर अतिरिक्त पुलिस अधीक्षक वी वी राकेश रेड्डी, डीएसपी बार्डर अमल ज्योति दास प्रोवश्‍नर डीएसपी गीतार्थ शर्मा, शिलचर सदर थाना के ओसी इन्द्रजित चक्रवर्ती, ट्रैफिक इन्चाज कमलेश सिंह व टीएसआइ परितोष पुरकायस्थ के कड़ी नेतृत्व में बीएसएफ, सीआरपीएफ सहित काछाड़ पुलिस बल रैली को शिलचर जिला पुस्तकालय से रवाना किया। रैली के आगे-आगे राष्ट्रभाषा चाय जनगोष्ठी के मुख्य संयोजक दिलीप कुमार, संयोजक संजीव राय, समाजसेवी मुलचन्द बैद, भाजपा के वरिष्ठ नेता अवधेश सिंह, युवा नेता कौशिक राय, मंच के संयोजक महाबीर बरदिया, कन्हैयालाल सिंगोदिया, चन्द्रशेखर सिंह, भोलानाथ यादव, युगल किशोर त्रिपाठी आदि आगे-आगे चलते नजर आये। माइकों पर मंच के कार्यकर्ता माइकों पर उत्साह भरने का काम करते आ रहे थे। तीनों जिले के कार्यकर्ता अपने-अपने क्षेत्र से आये हुए लोगों पर नजर रखते हुए महारैली में चल रहे थे। रैली इतनी लम्बी थी कि कार्यकर्ताओं को चने चबाने पड़े। महारैली को चलते ट्रैफिक पुलिस ने रूट बदलकर अन्य यात्रियों को सुविधा करते नजर आये। 

शिलचर जिला पुस्तकालय से महारैली आरंभ होकर देवदूत प्वाइन्ट, सेन्ट्रल रोड, भवाल प्वाइन्ट, नाजिरपट्टी, प्रेमतला, अम्बिकापट्टी प्वाइन्ट, अस्पताल रोड, रांगीरखाड़ी होते हुए वापस अस्पताल रोड, प्रेमतला, शिलांगपट्टी, गांधीबाग , देवदूत होते हुए खुदीराम मूर्ति के पाश जाकर समाप्त हुई।

इसके बाद भारी समूह में आये आन्दोलनकारियों को वही छोड़कर राष्ट्रभाषा एवं चाय जनगोष्ठी के लगभग 15 पदाधिकारी काछाड़ जिलाधिकारी डा. एस लक्ष्मणन के हांथों ज्ञापन प्रदान किया साथ ही बराक उपत्यका के तीनों जिले से लिया  गया 15 हजार हस्ताक्षर काछाड़ जिलाधकारी को सौंपा गया। काछाड़ जिलाधिकारी के सामने मंच के मुख्य संयोजक दिलीप कुमार ने ज्ञापन पढ़कर सुनाया जिलाधिकारी ने बड़े शान्तिपूर्वक समस्याओं को सुनने के पश्‍चात जिले से संबंधित विषयों को तुरन्त प्रभाव में लाने का आश्‍वासन दिया। प्रतिनिधि मण्डल में दिलीप कुमार, अवधेश सिंह, कौशिक राय, मुलचन्द बैद, चन्द्रशेखऱ सिंह, युगल किशोर त्रिपाठी, भोलानाथ यादव, हरिनारायन वर्मा आदि उपस्थित थे।

काछाड़ जिलाधिकारी डा. एस लक्ष्मणन के माध्यम से राज्यपाल को दी गयी ज्ञापन में कई सूत्रीय मांगों का उल्लेख किया गया जो निम्नलिखित है - शिक्षा ः आजादी के बाद जब पूरा काछाड़ एक था, यहाँ हिन्दी माध्यम के 150 से ज्यादा स्कूल खोले गये थे। जिनका माध्यम धीरे-धीरे परिवर्तन कर दिया गया। आज भी नाम है हिन्दी पाठशाला और वहाँ बांग्ला माध्यम से शिक्षा दी जा रही है। प्राथमिक और निम्न माध्यमिक विद्यालय के अनुपात में माध्यमिक, उच्च माध्यमिक और महाविद्यालयों का चाय बागान क्षेत्र में सर्वथा अभाव है। चाय बागान क्षेत्रों में जो बेन्चर विद्यालय अभी तक मान्यताविहीन हैं, उन्हें तत्काल मान्यता प्रदान की जाय। हिन्दी माध्यम के विद्यालयों में और हिन्दी के छात्रों को समय पर पुस्तक उपलब्ध नहीं करायी जाती है। महाविद्यालयों में हिन्दी के छात्र अच्छी संख्या में होने के बावजूद वहाँ हिन्दी शिक्षकों की नियुक्ति नही हो रही है। हमारी मांग है कि जहाँ शिक्षक कम हैं, वहाँ शिक्षक नियुक्त किया जाय, हिन्दीभाषियों के लिए मातृभाषा माध्यम से शिक्षा की व्यवस्था की जाय। समय पर पर्याप्त हिन्दी पुस्तकें उपलब्ध करायी जाय।  सभी उच्च शिक्षा संस्थानों में चाय जनगोष्ठी के लिए 30% आरक्षण की सुविधा प्रदान की जाय। चाय श्रमिक व पूर्व चाय श्रमिक समाज के मेधावी छात्रों को उच्च शिक्षा हेतु आर्थिक सहायता प्रदान की जाय।  

चाय श्रमिक ः  चाय बागान में खाली पदों पर स्थानीय युवक-युवतियों की नियुक्ति की जाय। मँहगाई के अनुरुप श्रमिकों के मजदूरी में भी वृद्धि की जाय।  तीन साल से अधिक काम करने वालों को स्थायी किया जाय। चाय श्रमिकों  के  लिए अलग से चाय मंत्रालय का गठन किया जाय। टी-प्लान्टेशन एक्ट को पूर्णरुप से लागु किया जाय। चाय बागान में बाल श्रमिकों को काम देने पर रोक लगायी जाय। अवैध रुप से सूदखोरों के चंगुल में फँसे श्रमिकोें के उद्धार हेतु कानुनी सहायता प्रदान की जाय। चाय श्रमिक व पूर्व चाय श्रमिक के साथ सरकारी कार्यालयों में भेदभाव करने वालों के खिलाफ कड़ी कार्रवाई की जाय। चाय बागान की जाति की सूची में बहुत सारी जातियाँ छूट गयी हैं, जिसके लिए उन्हें विभिन्न प्रकार की समस्याओं का सामना करना पड़ता है, जाति प्रमाण पत्र भी जल्दी नहीं मिलता है, ऐसी जातियों को भी सर्वे करके सरकार की सूची में तत्काल जोड़ा जाय।

चाय उद्योगः आज चाय उद्योग की स्थिति दिनोंदिन बिगड़ती जा रही है, आजादी के  बाद से बहुत सारे चाय बागान बंद हो गये क्योंकि चाय का उचित मूल्य नहीं मिल पाता है। इसलिए सरकार से मांग है कि चाय का न्यूनतम समर्थन मूल्य कम से कम रुपया 200 किया जाय। चाय उद्योग को 24 घंटे बिजली और समुचित इन्फ्रास्ट्रक्चर प्रदान किया जाय। चाय उद्योगों को सस्ते ब्याज पर लोन देने की व्यवस्था की जाय। कमजोर चाय बागानों को आर्थिक सहायता देकर उन्हें पुनर्जीवित किया जाय। 

भूमि अतिक्रमण ः चाय बागान व आस-पास की जमीन पर अवैध रुप से बाहरी लोगों द्वारा कब्जा किया गया है, इसप्रकार के अतिक्रमण को खाली कराया जाय। चाय बागान और संलग्न सिलिंग की जमीन खास जमीन बागान के भूमिहीन लोगों को भूमि का पट्टा प्रदान किया जाय। सभी चाय बागानों में गोपालन हेतु गोचर भूमि की व्यवस्था की जाय। 

रोजगार : चूंकि चाय श्रमिक व पूर्व चाय श्रमिक समाज के  लोग गरीब और पिछड़े हैं, अपने बच्चों की शिक्षा के लिए आर्थिक संसाधन नहीं जुटा पाते, कोचिंग, ट्युशन उनके लिए असंभव है। इसलिए पढ़ाई करने के बावजूद उनके अंक प्रतिशत की दृष्टि से कम हो जाते हैं। इसलिए हमलोग सरकार से अनुरोध करते हैं कि सभी सरकारी नौकरियों में चायजनगोष्ठी को 30 प्रतिशत आरक्षण की सुविधा प्रदान की जाय। 

स्वास्थ्य सेवा ः चाय बागानों में  चिकित्सालय होने के बावजूद एमबीबीएस डाक्टर व प्रशिक्षित नर्स का अभाव है। इसलिए साधारण बीमारी से भी लोगों का  बचना  मुश्किल हो जाता है। इसलिए चाय बागान क्षेत्र में एमबीबीएस डाक्टर व प्रशिक्षित नर्सों की नियुक्ति की जाय अथवा बागान के चिकित्सालयों को सरकार पूरी तरह से अधिग्रहण करके सम्पूर्ण व्यवस्था स्वयं करे। बागान में अवैध शराब के अड्डे बंद  कराए जाएं।

जनगणना ः चाय बागान व पूर्व चाय बागान क्षेत्र की विशेष रुप से मातृभाषा की जनगणना करायी जाय, क्योंकि प्रत्येक वर्ष जनगणना कर्मी, हमारी  मातृभाषा गलत लिखते हैं, इसलिए जनगणना में हमारी सटीक संख्या नहीं आती है। एनआरसी ः माननीय उच्चतम न्यायालय के निर्देशानुसार चाय जनगोष्ठी के सभी लोगों का नाम अविलम्ब एनआरसी में शामिल किया जाय । अन्य राज्यों से असम में आकर रह रहे नागरिकों का नाम भी तत्काल राष्ट्रीय नागरिक पंजी में जोड़ा जाय। वेरिफिकेशन में आ रही समस्याओं का समाधान किया जाय। 

विशेष ः हमलोग असम सरकार से मांग करते हैं कि पंचायत चुनाव में चाय जनगोष्ठी को 30 प्रतिशत आरक्षण की सुविधा प्रदान की जाय। चाय बागान क्षेत्र के कलाकारों, खिलाड़ियों, साहित्यकारों को विशेष रुप से प्रोत्साहन और संरक्षण देने के लिए सरकार द्वारा बराकघाटी हेतु हिन्दीभाषी व चाश्रमिक उन्नयन परिषद का गठन अनिवार्य रुप से शीघ्रातिशीघ्र किया जाय। ताकि हमारी समस्या सुनने व समाधान के लिए हम सम्पर्क कर सकें।