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गुवाहाटी, २७ जनवरी (हि.स.)। असम में परिवर्तन की शुरूआत हो गई है। लेकिन यह परिवर्तन चुनाव में बड़ी जीत नहीं है। परिवर्तन की शुरुआत हिंदुओं की बड़ी संख्या में एकत्रित होना है।

ये बातें राष्ट्रीय स्वयंसेवक संघ (आरएसएस) के सरकार्यवाह सुरेश राव जोशी उपाख्य भैयाजी जोशी ने राजधानी गुवाहाटी में आरएसएस के द्वारा २१ जनवरी को आयोजित विशाल लुइतपरिया हिंदू सम्मेलन के संबंध में बोलते हुए कही।भैयाजी जोशी ने शुक्रवार की रात राजधानी के फैंसी बाजार स्थित ङ्कभगवान महावीर धर्मस्थलङ्क में गुवाहाटी महानगर शाखा द्वारा आयोजित एक कार्यक्रम में बौद्धिक देने पहुंचे थे। इस कार्यक्रम में हजारों की संख्या में स्वयंसेवकों और शुभचिंतकों को संबोधित करते हुए संघ के दर्शन और न्यायपालिका के प्रति हिंदू समाज की धारणा के बारे में भी उल्लेख किया। उन्होंने कहा कि लुइतपरिया हिंदू सम्मेलन की लहर को देखते हुए यह समझना मुश्किल नहीं था कि समाज जाग रहा है।

उन्होंने कहा कि इस सम्मेलन को देखकर जितनी खुशी असम के लोगों को नहीं हुई, उससे अधिक खुशी देश के दूसरे प्रांतों में रहने वालों को हुई। उन्होंने स्वयंसेवकों को संबोधित करते हुए कहा कि लुइतपरिया हिंदू सम्मेलन को बाढ़ के पानी के रूप में नहीं समझना चाहिए। उन्होंने सभी लोगों से सम्मेलन में शामिल लोगों को एक साथ जोडक़र रखने पर जोर दिया।

उन्होंने कहा कि यह मानकर बैठ जाना कि रैली सफल हो गईें काफी संख्या में लोग हमसे जुड़ गए, इसको लेकर खुशी मनाने में जुट जाएं तो ऐसा नहीं हैें अब जिम्मेदारी और अधिक बढ़ गई है। उन्होंने कहा कि सम्मेलन में सरसंघचालक मोहन भागवत ने कहा था कि हिंदुत्व रहेगा तो भारत रहेगा, भारत नहीं रहेगा तो हिंदू भी नहीं रहेगों इस कथन को मानकर चलते हुए इसको अंगीकार करना होगा। संघ जिंदाबाद, संघ अच्छा काम कर रहा है, ऐसी बातें सुनना स्वयंसेवकों का गुण नहीं है। स्वयंसेवक का उद्देश्य एक सच्चा हिंदू बनाना है। हमारे जो पास हैं या हमारे जो घनिष्ठ हैं उन्हें अपने आचरण के जरिए हिंदुत्व की विशेषताओं के माध्यम से एक देशभक्त नागरिक बनाना संघ का उद्देश्य है।

स्वयंसेवकों के आह्वान पर गुवाहाटी के १५ हजार घरों ने सम्मेलन में आ?े वाले मेहमानों की भोजन की व्यवस्था की थी। ऐसे परिवारों के साथ नियमित संपर्क रखना होगा। हिंदुओं की एक ही सोच होती हैें इस बात से प्रत्येक नागरिक को संघ के दर्शन के बारे में समझाना होगा। यह हर हिन्दू की जिम्मेदारी है कि समाज में मौजूद सभी बुरी चीजों को दूर करें और आसपास जो अच्छे लोग हैं उनकी रक्षा करना है।

उन्होंने कहा, बाहर के कई लोग कहते हैं कि मैं हिंदू हूं, लेकिन ऐसे हिंदू समाज के लिए काम नहीं करते हैं। असल में सामाजिक दृष्टि से हिंदू होकर समाज के दिल में हिंदू धर्म के वास्तविक दृष्टिकोण को लेना होगा और इसे सामाजिक जीवन में कार्यान्वित करना होगा। इसी से प्रमाणित होगा सच्चा हिंदू। निडर हिंदू बनाना स्वयंसेवक का कार्य हैें साथ ही एक कार्यकर्ता का निर्माण भी अत्यंत जरूरी है। उन्होंने कहा कि हिंदू कोई जाति, भाषा, स्थान में विश्वास नहीं करता है। हिंदू असमिया, बंगाली, हिंदी भाषी और हरिजन में विभेद नहीं करता है। हिंदू के अनुसार सभी हिंदू सभी भारतीय हैं। इस दौरान उन्होंने विभिन्न कथानकों के जरिए हिंदू के गौरवशाली इतिहास पर प्रकाश डाला। उन्होंने कहा कि स्थान, काल के अनुसार भाषा, आचार-विचार अलग-अलग हो सकता हैें बावजूद इसके वे सभी भारतीय हैं इसको अस्वीकार नहीं किया जा सकता। भैयाजी जोशी ने कहा कि श्रीकृष्ण द्वारिका के यादव कुल के राजा थे, जबकि श्रीराम चंद्र अयोध्या के राजा थे। फिर भी वे दोनों समस्त हिंदू समाज के भगवान हैं।

उन्होंने कहा कि जिस तरह मंदिर में देवी-देवताओं में कोई विभेद नहीं, तो हिंदुओं में ऐसा क्यों, असल में अलग संप्रदाय, अलग भाषा-भाषी के नाम पर अलगाव पैदा किया गया है। उन्होंने कहा कि धार्मिक हिंदुओं की कमी नहीं है। दान-दक्षिणा, जप-तप करने वाले ऐसे हिंदुओं की संख्या भी कम नहीं है। धामिक हिंदुओं के साथ ही सामाजिक हिंदुओं की भी आवश्यकता है। सामाजिक हिंदुओं का प्रतिफल गुवाहाटी में लुइतपरिया हिंदू सम्मेलन में देखने को मिला। उन्होंने समाज को सुसंगठित करने का आह्वान किया। इस मौके पर लुइतपरिया हिंदू सम्मेलन को सफल बनाने वाले विभिन्न जिम्मेदारियों को निभाने वाले कार्यकर्ताओं ने अपने-अपने विचार व्यक्त किए।इस मौके पर गुवाहाटी महानगर संघचालक गुरुप्रसाद मेधी, प्रांत कार्यवाह खगेन सैकिया, महानगर विभाग संघचालक अंजन कुमार बोरा, क्षेत्र प्रचारक उल्लास कुलकर्णी, सह क्षेत्र प्रचारक गौरीशंकर चक्रवर्ती, उत्तर असम प्रांत प्रचारक बशिष्ठ बुजरबरुवा, अखिल भारतीय सह-संपर्क प्रमुख सुनील देशपांडेय, सुरेंद्र तालकेतकर, वरिष्ठ प्रचारक श्रीकृष्ण मोतलग, भास्कर कुलकर्णी आदि मौजूद थे।