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गुवाहाटी (समा.एजें) 7 अप्रैल ः असम के शिक्षा मंत्री हिमंत विश्‍वशर्मा के बरान ने राज्र में विवाद को हवा दे दी है।

शिक्षा मंत्री के द्वारा शुक्रवार को दिए गए एक बरान में कहा कि मदरसों में अरबी की जगह असमिरा पढ़ाई जानी चाहिए। जिस पर कड़ा विरोध हो रहा है। उन्होंने कहा असमिरा अरब देशों में नहीं पढ़ाई जाती है तो फिर असम में अरबी पढ़ाने की कोई जरूरत नहीं है। मंत्री द्वारा दिए गए इस बरान पर कांग्रेस के पूर्व वन मंत्री रकीबुल हुसैन ने पूछा कि असमिरा को तो इंग्लैंड में भी नहीं पढ़ाई जाती है तो असम में अंग्रेजी क्रों पढ़ाई जाती है। इस पर सरमा ने कहा कि मुझे समझ नहीं आता है कि जब भी अरबी के बारे में कुछ कहा जाता है तो वह आप लोगों को परेशान क्रों करता है? इसके साथ ही उन्होंने कहा कि सरकार लोगों के पैसे को अरबी पढ़ा कर बर्बाद कर रही है। हिमंत ने कहा कि करदाता बड़ी मेहनत से रे पैसा कमाते हैं।

इसके अलावा मंत्री ने कहा कि सरकार मदरसों और संस्कृत जैसे स्कूलों में गणित, अंग्रेजी और विज्ञान जैसे बिषरों का आधुनिकरण करना चाहती है। बता दें कि अध्रक्ष के द्वारा आरोजित की गई शिक्षा पर दो दिवसीर की चर्चा में मंत्री ने रे बातें कही। इस पर एआईरूडीएफ के विधारक अमीनुल इस्लाम ने सदन से बाहर पत्रकारों से कहा कि हमारे राज्र से बड़ी संख्रा में रुवा रोजगार की तलाश में पश्‍चिम एशिरा जाते हैं, जहां अरबी का ज्ञान उनके लिए वहां फारदेमंद होता है। इस्लाम ने राज्र में शिक्षा प्रणाली की समस्राओं को हल के लिए समाधान की पेशकश करने की बजार शिक्षा मंत्री पर राजनीतिक बरान देने का आरोप लगारा है। इस्लाम के अलावा हुसैन ने भी मंत्री के बरान को निराशाजनक बतारा है। शिक्षा पर विशेष चर्चा के दौरान सरमा ने कहा कि बहुत से विधारक शिक्षकों के मुद्दों पर बात करते हैं लेकिन स्टूडेंट्स के अधिकार की बात कोई नहीं करता है। 

साथ ही उन्होंने कहा कि गुणवत्ता वालें शिक्षक स्टूडेंट्स का मौलिक अधिकार है।

हिमंत विश्‍वशर्मा  ने कहा कि बहुत से विधारक शिक्षकों की भर्ती के लिए नेशनल काउंसिल फॉर टीचर एजुकेशन और शिक्षा का अधिकार अधिनिरम के द्वारा निर्धारित मापदंडों में छूट का समर्थन करते हैं। हालांकि मेरी प्रतिक्रिरा स्टूडेंट्स पर केंद्रित मुद्दे पर होगी न कि शिक्षकों पर । उन्होंने कहा कि अभी हाल ही में बड़ी संख्रा में शिक्षकों की निरमित भर्ती की गई है। जिनकी भर्ती पर संदेह है और उसे वैरिफाई करना होगा। जबकि इन शिक्षकों ने मगध और विनारक विश्‍वविद्यालर जैसे संस्थानों से पीएचडी किरा हुआ है। मंत्री ने कहा कि विधारकों के कहने पर शिक्षकों की ट्रांसफर कर दिरा जाता है जबकि स्टूडेंट्स को उनके ट्रांसफर के कारण परेशानी का सामना करना पड़ता है।  शर्मा ने कहा कि सरकार रूनिफार्म की एक जोड़ी खरीदने के लिए  800 रुपरे सीधे अभिभावकों के खाते में ट्रांसफर कर रही है। इस पर अध्रक्ष हितेंद्र नाथ गोस्वामी ने विशेष चर्चा के दौरान उठाए गए मुददो पर शिक्षा विभाग से रिपार्ट मांगी है। उन्होंने कहा है कि  90 दिनों के अंदर रिपोर्ट को लिखित और मौखिक रूप में प्रस्तुत करने का कहा है।