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लखनऊ (स‘ा.एजें) ९ ङ्करवरी : अयोध्या के मंदिर-मस्जिद विवाद के हल के लिए तीन सूत्रीय फार्मूला सामने आया है। फार्मूले में आल इण्डिया मुस्लिम पर्सनल ला बोर्ड के समक्ष तीन प्रस्ताव रखे गए हैं।

पहले प्रस्ताव में कहा गया है कि मंदिर वहीं बने जहां रामलला विराजमान हैं, मुसलमान विवादित स्थल पर दावेदारी छोड़ दें और बदले में अयोध्या विधानसभा क्षेत्र में सरयू के पार गोरखपुर हाइवे पर बहादुर शाह जफर के नाम से एक अन्तर्राष्ट्रीय विश्वविद्यालय स्थापित किया जाए और उसी परिसर के अन्दर मस्जिद भी बनवाई जाए।

दूसरा प्रस्ताव है कि अयोध्या स्थित विद्याकुंड के पास निर्मोही अखाड़े की विवादित जमीन है उस जमीन को मुस्लिम समाज ले ले और ४० गुणा ८० वर्गमीटर के जिस भूभाग का मामला सुप्रीम कोर्ट में विचाराधीन है, जहां रामलला विराजमान हैं उसे संयुक्त रूप से हिन्दू पक्षकारों को सौंप दिया जाए। तीसरा प्रस्ताव यह है कि अयोध्या के विवादित स्थल जहां रामलाल विराजमान हैं, वहां भगवान राम का मंदिर बने और यूसुफ आरामशीन के स्थान पर मस्जिद बने। इस प्रस्ताव पर आधारित आठ पृष्ठों का एक पत्र हाल ही में अयोध्या सदभावना समन्वय महासमिति के महासचिव डा. अमरनाथ मिश्र ने आल इण्डिया मुस्लिम पर्सनल ला बोर्ड की कार्यकारिणी के सदस्य मौलाना सलमान नदवी को सौंपा है।

पत्र में तर्क है कि मुस्लिम समाज में मान्यता है कि लोकहित में, जनहित में, राष्ट्र और समाज हित और धर्म के हित में मस्जिद को किसी दूसरे स्थान पर स्थानांतरित किया जा सकता है। डा.अमरनाथ मिश्र इस विवाद को हल करवाने के लिए पिछले साल सक्रिय हुए आध्यात्मिक गुरु श्री श्री रविशंकर के समर्थक हैं। उन्होंने ही पिछले साल १५ से १७ नवंबर के बीच  श्री श्री रविशंकर की लखनऊ और अयोध्या की यात्रा भी करवाई थी।   

बाबरी मस्जिद एक्शन कमेटी के संयोजक जफरयाब जीलानी ने कहा, श्री श्री रविशंकर के समर्थकों की सरपरस्ती वाली अयोध्या सदभावना समन्वय महासमिति ने अयोध्या मामले को सुलह से हल करवाने के लिए जो फार्मूला निकाला है वह मौलाना सलमान नदवी बोर्ड की हैदराबाद में शुक्रवार से शुरू होने वाली बैठक में पेश करेंगे तब उस पर चर्चा होगी। मगर मैं यही कहूंगा कि बोर्ड तो १९९० में ही कह चुका है कि मस्जिद की जमीन न तो गिफ्ट की जा सकती है न सेल की जा सकती है और न सरेंडर हो सकती है।