Offcanvas Info

Assign modules on offcanvas module position to make them visible in the sidebar.

A A A

वीqजग (एजें) ३ जुलाई : सिक्किम सेक्टर में सीमा विवाद के बीच चीनी विशेषज्ञों ने सोमवार को आगाह किया कि सीमा विवाद हल न हुआ तो युद्ध भी हो सकता है।

विशेषज्ञों ने कहा कि चीन पूरी प्रतिबद्धता से अपनी संप्रभुता की रक्षा करेगा, फिर चाहे युद्ध की नौबत क्यों न आ पड़े। चीन के सरकारी अखबार ग्लोबल टाइम्स ने चीनी विशेषज्ञों के हवाले से यह बात कही। डोकलाम क्षेत्र में तीन हफ्तों से दोनों देशों के बीच गतिरोध है। शंघाई म्युनिसिपल सेन्टर फॉर इंटरनेशनल स्टडीज में प्रोफेसर वांग देहुआ ने कहा कि भारत १९६२ से ही चीन को अपना सबसे बड़ा प्रतिद्वंद्वी मानता आ रहा है, क्योंकि दोनों देशों में कई समानताएं हैं। दोनों ही बहुत बड़ी जनसंख्या वाले विकासशील देश हैं। ग्लोबल टाइम्स के अनुसार, यदि भारत और चीन के बीच हालिया विवाद उचित ढंग से नहीं सुलझाया गया तो जंग के हालात पैदा हो सकते हैं। अखबार का कहना है कि १९६२ में चीन और भारत की जंग हुई थी, क्योंकि भारत चीन की सीमा में घुस आया था। इसके परिणामस्वरूप चीन के ७२२ और भारत के ४,३८३ सैनिक मारे गए थे। वहीं शंघाई संस्थान के निदेशक जाओ गांचेंग ने कहा कि दोनों पक्षों को संघर्ष या युद्ध की जगह विकास पर ध्यान देना चाहिए। दोनों के बीच संघर्ष अन्य देशों को फायदा उठाने का अवसर दे सकता है, जैसे अमेरिका को। उन्होंने भारत को चीन के प्रति द्वेषपूर्ण रवैया छोड़ने की सलाह भी दी। 

चीनी विशेषज्ञों ने भारतीय रक्षा मंत्रालय द्वारा सीमा पर सैनिकों और हथियारों के १२ महीने खुले रहने वाली रेल लाइन बिछाने के लिए चीन-भारत सीमा पर किए जा रहे सर्वेक्षणों पर भी आपत्ति जताई। जाओ ने कहा कि भारत चीन के साथ बराबरी करने की कोशिश कर रहा है। चीनी मीडिया में कुछ हास्यास्पद दावे भी सामने आए हैं। ग्लोबल टाइम्स ने लिखा कि सिक्किम क्षेत्र में एक सड़क बनाने को लेकर मोदी की अमेरिका की यात्रा से पहले भारत की आपत्ति का मकसद वाशिंगटन को यह दिखाना है कि चीन को रोकने के लिए वे एक हैं।  ग्लोबल टाइम्स ने लिखा कि मोदी ने टड्ढंप के साथ बैठक से पहले दो कदम उठाए। पहला, उन्होंने अमेरिका के साथ हथियार सौदा किया। हथियार सौदे से अमेरिका को भारत से भारी मौद्रिक लाभ ही नहीं होगा बल्कि इससे चीन पर नजर रखने के लिए भारत-प्रशांत क्षेत्र में भारत की स्थिति मजबूत होगी। दूसरे कदम का मकसद अमेरिका को यह दर्शाना है कि चीन के उदय को रोकने के लिए भारत कृतसंकल्प है।