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नई दिल्ली, (एजें) १९ जुलाई. भारत और चीन के बीच डोकलाम का मुद्दा गरमाता जा रहा है. अब हालत यहां तक पहुंच गई है कि दोनों तरफ से सीमा पर हलचल तेज हो गई है.

सीमा से सटे पोस्टों पर दोनों तरफ से फौज की तैनाती बढ़ गई है.हालांकि, भारत मुद्दे को सुलझाने में जुटा हुआ. भारत की तरफ जहां विदेश मंत्रालय बातचीत के जरिए मसले को सुलझाने की कोशिश कर रहा है वहीं चौकन्ना भी है.डोकलाम से भारतीय सेना की मौजूदगी पर चीन लगातार गीदड़ भभकी दे रहा है. मंगलवार को सिक्कम क्षेत्र के डोकलाम में सीमा गतिरोध को लेकर चीन ने कहा कि भारत को अपने राजनीतिक मकसद के लिए अतिक्रमण की नीति का इस्तेमाल नहीं करना चाहिए. चीन के विदेश मंत्रालय ने यह भी कहा कि उन्होंने बीजिंग में विदेशी राजनयिकों को डोकलाम में गतिरोध को लेकर जानकारी दी और वे भारतीय जवानों द्वारा चीनी क्षेत्र में ‘अवैध रूप से दाखिलङ्क होने की घटना को जानकर ‘स्तब्धङ्क हो गए. चीन ने इस मुद्दे पर तनाव से बढ़ाने से बचने के लिए भारत को डोकलाम में अपने सैनिकों को हटाने की चेतावनी दी.

चीन की इन गीदड़ भभकियों के बीच वरिष्ठ पत्रकार गौतम लाहिरी का भी कहना है कि भारत ने चीन से सटी सीमा पर मौजूद भारतीय पोस्टों पर फौज की तैनाती बढ़ा दी है. दरअसल चीन अपने अखबारों के लिए भारत को १९६२ की याद दिला रहा है. दरअसल डोकलाम जिसे भूटान में डोलम कहते हैं. करीब ३०० वर्ग किलोमीटर का ये इलाका चीन की चुंबी वैली से सटा हुआ है और सिक्किम के नाथुला दर्रे के करीब है. इसलिए इस इलाके को टड्ढाई जंक्शन के नाम भी जाना जाता है. ये डैगर यानी एक खंजर की तरह का भौगोलिक इलाका है, जो भारत के चिकन नेक यानी सिलिगुड़ी कॉरिडोर की तरफ जाता है. चीन की चुंबी वैली का यहां आखिरी शहर है याटूंग. चीन इसी याटूंग शहर से लेकर विवादित डोलम इलाके तक सडक़ बनाना चाहता है.इसी सडक़ का पहले भूटान ने विरोध जताया और फिर भारतीय सेना ने. भारतीय सैनिकों की इस इलाके में मौजूदगी से चीन हड़बड़ा गया है. चीन को ये बर्दाश्त नहीं हो रहा कि जब विवाद चीन और भूटान के बीच है तो उसमें भारत सीधे तौर से दखलअंदाजी क्यों कर रहा है.१६ जून से भारत और चीन की सेना के बीच गतिरोध जारी है.