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नयी दिल्ली (समा.एजें) ३० अगस्तः. सरकार ने सेना की कार्य प्रणाली में सुधारों तथा खर्च में संतुलन बनाने के उद्देश्य से आजादी के बाद का सबसे बड़ा कदम उठाते हुए गैर जरूरी विभागों को बंद करने तथा कुछ को आपस में मिलाने का निर्णय लिया है.

सेना की लड़ाकू क्षमता बढ़ाने के लिए लगभग ६० हजार अधिकारियों और जवानों को जरूरत के हिसाब से लड़ाकू भूमिका में तैनात किया जाएगा. प्रधानमंत्री नरेन्द्र मोदी की अध्यक्षता में बुधवार को हुई केन्द्रीय मंत्रिमंडल की बैठक में सेना की कार्य प्रणाली में सुधारों तथा खर्च में संतुलन के बारे में सुझाव देने वाली समिति की ६५ सिफारिशों को मंजूरी दी गई. बैठक के बाद रक्षा मंत्री अरूण जेटली ने संवाददाताओं को बताया कि सेवानिवृत लेफ्टिनेंट जनरल डी बी शेतकर की अध्यक्षता में गत वर्ष मई में एक समिति का गठन किया गया था. प्रधानमंत्री नरेन्द्र मोदी की अध्यक्षता में केन्द्रीय मंत्रिमंडल की बैठक में सरकार ने सेना की कार्य प्रणाली में सुधारों और खर्चे में कमी को लेकर सुझाव देने वाली कमेटी की सिफारिशों को लेकर बड़ा फैसला लिया है. सरकार ने लेफ्टिनेंट जनरल डी बी शेतकर समिति की ९९ में से ६५ सिफारिशों को स्वीकार कर लिया है. केन्द्रीय मंत्रिमंडल की बैठक के बाद रक्षा मंत्री अरुण जेटली ने प्रेस कॉन्फ्रेंस को बताया कि सेना की कार्य प्रणाली में सुधारों की दिशा में आजादी के बाद का सबसे बड़ा कदम उठाते हुए रक्षा मंत्रालय ने शेतकर समिति की ६५ सिफारिशों को मंजूर कर लिया है. उन्होंने कहा कि कमेटी के प्रस्ताव को मंत्रिमंडल ने भी अपनी मंजूरी दे दी. रक्षा मंत्री ने इस बारे में सेना तथा अन्य संबंधित पक्षों के साथ विचार विमर्श के बाद स्वीकार किया है. उन्होंने कहा कि ये सिफारिशें वर्ष २०१९ के अंत तक पूरी तरह अमल में आ जाएंगी और इनके लागू होने से सेना के ५७००० अधिकारियों, जे सीओ और जवानों को जरूरत के हिसाब से विभिन्न कार्यों के लिए तैनात किया जाएगा. उन्होंने कहा कि इससे सेना की लड़ाकू क्षमता तो बढ़ेगी ही उसके खर्च में भी कमी आएगी. सैन्य डाक यूनिटों तथा सैन्य फार्मों को बंद कर इनमें तैनात जवानों और अधिकारियों को अन्य जरूरी काम के लिए तैनात किया जायेगा.