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रांची(स‘ा.एजें) २३ दिसंबर : चारा घोटाले से जुड़े एक मामले में सीबीआई की विशेष अदालत ने लालू प्रसाद यादव को दोषी करार दिया है.

३ जनवरी को मामले अब उनको सजा सुनाई जाएगी. फैसला आने के बाद उनको गिरफ्तार कर लिया गया है. वहीं अदालत ने पूर्व मुख्यमंत्री जगन्नाथ मिश्र के अलावा बिहार के पूर्व मंत्री विद्यासागर निषाद और पीएसी के तत्कालीन अध्यक्ष ध्रुव भगत, हार्दिक चंद्र चौधरी, सरस्वती चंद्र और साधना सिंह को दोषमुक्त करार कर दिया. जबकि लालू सहित १६ लोगों को अदालत ने दोषी पाया है. इस मामले में दोषी ठहराये गए सभी १६ लोगों को हिरासत में लेकर बिरसा मुंडा जेल भेज दिया गया है. अदालत ने ९५० करोड़ रुपये के चारा घोटाले से जुड़े देवघर कोषागार से ८९ लाख़, २७ हजार रुपये की अवैध निकासी के मामले में फैसला सुनाया है. अवैध ढंग से धन निकालने के इस मामले में लालू प्रसाद यादव एवं अन्य के खिलाफ सीबीआई ने आपराधिक षड्यन्त्र, गबन, फर्जीवाड़ा, साक्ष्य छिपाने, पद के दुरुपयोग आदि से जुड़ी भारतीय दंड संहिता की धाराओं १२०बी, ४०९, ४१८, ४२०, ४६७, ४६८, ४७१, ४७७ ए, २०१, ५११ के साथ भ्रष्टाचार निवारण अधिनियम की धारा १३(१)(डी) एवं १३(२) के तहत मुकदमा दर्ज किया था. इस मामले में कुल ३८ लोगों को आरोपी बनाया गया था. इनमें से ११ की मौत हो चुकी है, वहीं तीन सीबीआई के गवाह बन गये जबकि दो ने अपना गुनाह कुबूल कर लिया था जिसके बाद उन्हें २००६-०७ में ही सजा सुना दी गयी थी. इसके बाद २२ आरोपी बच गए थे, जिनको लेकर यह फैसला सुनाया गया. इस मामले में तीन आईएएस अधिकारियों फूलचंद सिंह, बेक जूलियस एवं महेश प्रसाद को भी आरोपी बनाया गया था. फैसला आते ही आरजेडी के प्रवक्ता मनोज झा की की ओर से तुरंत प्रेस कांन्फ्रेस की गई और फैसले पर सवाल उठाए गए. आरजेडी ने कहा कि अवैध निकासी पर जिसने एफआईआर किया है उसी को जेल भेज दिया गया. इसके पीछे पूरी तरह से बीजेपी की साजिश है. हमें पूरी न्यायपालिका पर भरोसा है. इस देश को सिर्फ दो लोग चला रहे हैं. इससे पहले चाईबासा कोषागार से ३७ करोड़, सत्तर लाख रुपये अवैध ढंग से निकासी करने के चारा घोटाले के एक अन्य मामले में इन सभी को सजा हो चुकी है. करीब २१ साल तक चले इस मामले में इससे पहले कई पूर्व अधिकारियों  को सजा सुनाई जा चुकी है. चारा घोटाला एक ऐसा मामला था जिसकी वजह से लालू के राजनीतिक करियर में ग्रहण लग गया है. हालांकि इस मामले में वह करीब २१ सालों तक कानूनी प्रक्रियाओं का सामना करते रहे और कई बार उनको हिरासत में लिया गया