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नई दिल्ली (स‘ा.एजें) ५ ङ्करवरी : पाकिस्तान के गृह मंत्रालय ने दावा किया है कि भारत ने चीन-पाकिस्तान आर्थिक गलियारे (सीपीईसी) की अरबों डॉलर की मेगा परियोजना को नुकसान पहुंचाने के लिए उसके (सीपीईसी के) प्रतिष्ठानों पर हमला करने की योजना बनाई है.

डॉन ऑनलाइन की सोमवार (५ फरवरी) को प्रकाशित खबर के मुताबिक, मंत्रालय ने गिलगिट-बालतिस्तान के गृह विभाग को एक पत्र लिखा है जिसमें चेतावनी दी गई है कि काराकोरम राजमार्ग और अन्य महत्वपूर्ण बिंदुओं समेत सीपीईसी रूट पर संभवित आतंकी हमले हो सकते हैं. पत्र में किसी भी अप्रिय घटना से बचने के लिए मुकम्मल सुरक्षा इंतजाम करने के लिए निर्देश दिए गए हैं.

गृह मंत्रालय के एक अधिकारी ने कहा कि पत्र में दावा किया गया है कि भारत ने ४०० मुस्लिम युवाओं को हमले का प्रशिक्षण प्राप्त करने के लिए अफगानिस्तान भेजा है. गिलगिट-बालतिस्तान सरकार ने कहा कि उसने खुंजेरब र्दे से दियामेर जिले के काराकोरम राजमार्ग पर निर्मित दो दर्जन से ज्यादा पुलों समेत सीपीईसी रूट पर सुरक्षा बढ़ा दी है. पुलिस अधिकारियों का कहना है कि गिलगिट बालिस्तान में विदेशी नागरिकों की आवाजाही पर निगरानी रखी जाएगी और उनके दस्तावेजों को जांचा जाएगा. पत्र में कहा गया है कि काराकोरम राजमार्ग के पुलों पर सुरक्षा के लिए पुलिसकर्मियों को तैनात किया गया है और उन्हें हाई अलर्ट पर रहने को कहा गया है. पत्र में कहा गया है कि स्थानीय पुलिस अधिकारियों को गश्ती अभियान चलाने, अतिसंवेदनशील जगहों, होटलों और गेस्ट हाउस की चेकिंग का निरीक्षण करने के लिए कहा गया है. सीपीईसी लिंक सडक़ों, रेलवे और राजमार्गो के नेटवर्क के जरिए चीन के शियानजिंग प्रांत के काशगर और पाकिस्तान के बलूचिस्तान के ग्वादर बंदरगाह को जोड़ता है.

चीन-पाकिस्तान आर्थिक गलियारा शुरुआत से ही भारत और चीन के लिए विवाद का केंद्र बना रहा है. इस मुद्दे पर अपना रुख बदलते हुए चीन ने एक हफ्ते पहले कहा था कि वह विवादास्पद मुद्दे पर अपने मतभेदों को हल करने के लिए भारत से बातचीत करने के लिए तैयार है. उल्?लेखनीय है कि चीन ने बीते सोमवार को ही कहा था कि वह चीन-पाकिस्तान आर्थिक गलियारे (सीपीईसी) को लेकर भारत से बातचीत करने के लिए तैयार है. यह गलियारा पाकिस्तान के कब्जे वाले कश्मीर (पीओके) से गुजरता है. बीजिंग की यह प्रतिक्रिया चीन में भारत के राजदूत गौतम बांबावले की ग्लोबल टाइम्स से बातचीत के बाद आई. भारतीय राजदूत ने उस बातचीत में सीपीईसी को बड़ी समस्या बताया था और कहा था कि इसे छिपाया नहीं जाना चाहिए. चीन ने फिर कहा कि अरबों डॉलर की इस परियोजना का मकसद महज आर्थिक सहयोग है और इसे भारत को लक्ष्य करके नहीं तैयार किया गया है. चीनी विदेश मंत्रालय के प्रवक्ता हुआ चुनयिंग ने कहा था, ‘सीपीईसी के संबंध में चीन ने अपना पक्ष दोहराया है. जहां तक चीन और भारत के बीच मतभेद की बात है तो इसका उचित समाधान तलाशने के लिए भारत के साथ बातचीत करने को तैयार हैं ताकि इन मतभेदों से हमारे राष्ट्रीय हितों पर कोई असर न हो. यह दोनों देशों के हितों में है.‘ बीजिंग की बेल्ट व रोड रोड पहल के तहत शुरू की गई ५० अरब डॉलर की विशाल परियोजना के कारण पिछले कुछ सालों में भारत और चीन के बीच ज्यादा मतभेद उभरकर सामने आया है. सीपीईसी चीन के शिंजियांग प्रांत के कशगर से लेकर पाकिस्तान के बलूचिस्तान स्थित ग्वादर बंदरगाह तक सडक़, रेलवे और राजमार्गो का विशाल नेटवर्क तैयार करने की परियोजना है. भारत ने इस गलियारे का सख्ती से विरोध किया है, क्योंकि यह पीओके से गुजरता है और भारत इस क्षेत्र पर अपना दावा करता है.