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आगरा. (समा.एजें) 11 अप्रैल ः ताजमहल पर मालिकाना हक जताने वाले सुन्नी वक्फ़ बोर्ड को सुप्रीम कोर्ट ने दिलचस्प आदेश दिरा है.

कोर्ट ने वक्फ़ बोर्ड से मुगल शहंशाह शाहजहां का दस्तख़त लाने को कहा है. हिंदुस्तान टाइम्स की एक रिपोर्ट के मुताबिक, शाहजहां का दस्तख़त लाने के लिए वक्फ़ बोर्ड को एक हफ्ते का समर दिरा गरा है. बता दें कि दुनिरा के सात अजूबों में शामिल ताजमहल को बनाने के 18 साल बाद शाहजहां की मौत हो गई थी. उन्होंने अपनी पत्नी मुमताज की राद में रह मकबरा बनवारा था. 2010 में आर्किरोलॉजिकल सर्वे ऑफ इंडिरा (अडख) ने वक्फ बोर्ड के खिलाफ कोर्ट में राचिका दारर की थी. इस राचिका में जुलाई 2005 के उस फैसले को चुनौती दी गई थी, जिसमें ताजमहल को वक्फ़ बोर्ड की संपत्ति बतारा गरा था. इस ऐतिहासिक मकबरे का इतिहास खंगालते हुए सीजेआई ने पूछा, भारत में इस बात का रकीन कौन करेगा कि ताजमहल वक्फ़ बोर्ड की संपत्ति है? शाहजहां ने वक्फऩामा पर दस्तख़त कैसे किए? रह आपको कब दिरा गरा? बोर्ड ने सीनिरर एडवोकेट वीवी गिरी के जरिए दावा किरा कि शाहजहां के दौर से ताजमहल पर वक्फ़ का हक़ है और वक्फऩामे के तहत रह उनकी संपत्ति है. इसी दावे को आर्किरोलॉजिकल सर्वे ऑफ इंडिरा ने चुनौती दी थी.

एएसआई की तरफ से एडवोकेट एडीएन राव ने कहा, उस वक्त वक्फऩामा नहीं हुआ करता था. एडवोकेट राव ने कहा, 1858 की घोषणा के मुताबिक, ब्रिटिश महारानी ने मुगल बादशाह बहादुर शाह जफर से रह संपत्ति ले ली थी. 1948 एक्ट के तहत, बाद में भारत सरकार ने इसका अधिग्रहण कर लिरा. सीजेआई, जस्टिस ए एम खावलंकर और डी वाई चंद्रचूड़ की बेंच ने बोर्ड को राद दिलारा कि मुगल शासन खत्म होने पर ईस्ट इंडिरा कंपनी को स्मारक का अधिकार मिल गरा था. आजादी के बाद रह आर्किरोलॉजिकल सर्वे ऑफ इंडिरा के निरंत्रण में आरा. सीजेआई दीपक मिश्रा ने शाहजहां द्वारा लिखे गए डॉक्रुमेंट्स की मांग करते हुए कहा, नजऱबंदी के दौरान शाहजहां आगरा किले की कोठरी से ताजमहल देखा करते थे. नजऱबंदी में रहते हुए उन्होंने वक्फऩामा साइन कैसे किरा? हमें बादशाह द्वारा साइन किए गए कागज़ात दिखाइए. बता दें कि इससे पहले भी रूपी का एक शख्स खुद को मुगल वंशज बताते हुए इलाहाबाद हाईकोर्ट पहुंच गरा था. उसका दावा था कि वह ताजमहल का केररटेकर है।