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नेहरू कालेज, पयलापूल में गत ११ सितम्बर, २०१७ प्रातः १० बजे विश्व विद्यालय अनुदान आयोग द्वारा प्रायोजित द्विदिवसीय राष्ट्रीय संगोष्ठी का उद्घाटन हुआ।

समारोह का सभापतित्व महाविद्यालय परिचालन समिति के सभापति एवं असम विश्वविद्यालय के आंग्ल भाषा एवं साहित्य विभाग के आचार्य एवं अध्यक्ष डा. दिपेन्दु दास ने किया। अपने स्वागत एवं विषयोपास्थान भाषण में महाविद्यालय के प्राचार्य डा. पूर्णेन्दु कुमार ने चाय श्रमिकों की पीडा एवं उनकी दुर्दशा का जिक्र करते हुये कहा कि आज के सभ्य समाज में चाय श्रमिक विषम स्थिति में जीवन-यापन कर रहे हैं। सेमिनार के बारे में बताते हुए उन्होने कहा विद्वानों एवं शोधकर्ताओं के शोध-प्रबन्ध निश्चय ही चाय बागान श्रमिको आर्थिक एवं सामाजिक सुरक्षा के दिशा में मददगार सिद्ध होंगे ऐसी आशा एवं विश्वास है। डा. पूर्णेन्दु कुमार ने कहा कि प्लान्टेशन मजदूर एक्ट १९५१ के अनुसार मजदूरों के लिए आवास, स्वास्थ्य, बाल एवं महिला सुरक्षा और शिक्षा की व्यवस्था करना कम्पनी और बागान मालिकों की जिम्मेदारी है। भारत सरकार द्वारा पारित १९५६ की मूल कानून और २०१४ में संशोधित कानून को क्रियान्वयन के अभाव में यातायात की असुविधा, विद्युत आपूर्ति एवं चिकित्सा केन्द्रों का अभाव परिलक्षित होता है। उद्घाटन समारोह के मुख्य अतिथि प्रो. मुहम्मद आरिफ़, संयुक्त निदेशक, विश्वविद्यालय अनुदान आयोग, पूर्वोत्तर क्षेत्र ने पूर्वोत्तर भारत में चाय बागान का इतिहास, श्रमिकों के दुःख आदि के ऊपर प्रकाश डाला। सभा में विशिष्टातिथि पद से भाषण करते हुये असम विश्वविद्यालय के राजनीति शास्त्र के प्रो. देवाशीश भट्टाचार्य ने श्रमिकों के कल्याणार्थ बागान के मालिक एवं सरकार को आगे आने की सलाह देते हुए उनके बच्चों की कुपोषणता, अशिक्षा एवं बाल-श्रम का मुद्दा उठाया। असम विश्वविद्यालय के पूर्व महाविद्यालय विकास परिषद् के निदेशक डा. विभास देव ने  मजदूरों की न्यूनतम मजदूरी एवं आज की महन्गाई के युग में उनकी आर्थिक दुर्दशा के ऊपर अपनी संवेदना व्यक्त किया। सेमिनार मे बीज वक्ता के रूप मे असम विश्व विद्यालय के अर्थशास्त्र के प्रोफ़ेसर अलक सेन ने बहुत ही विस्तार से इतिहास के आलोक में चाय बागान, कम्पनी, अधिकारी एवं श्रमिकों की चर्चा करते हुए उनकी सामाजिक, आर्थिक, राजनीतिक तथा सांस्कृतिक स्थिति पर प्रकाश डाला। सभा के अन्त में धन्यवाद ज्ञापन सेमिनार आयोजक समिति के सम्पादक डा. शुभजीत चक्रवर्ती ने किया। सभा का प्रारम्भ मन्चासीन अतिथियों के कर-कमलों से प्रदीप प्रज्ज्वलन तत्पश्चात वन्दे मातरम् गीत के माध्यम से हुआ।