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प्रे.सं.शिलचर, 16 नवंबर ः प्रेस क्लब की अध्यक्षा श्रीमती महुआ चौधरी की अध्यक्षता में आज बराक नदी में एक लॉच के ऊपर राष्ट्रीय प्रेस दिवस मनाया गया।

इस अवसर पर अपने स्वागत वक्तव्य में जनसंपर्क विभाग के उपनिदेशक देवप्रसाद देवरी ने कहा कि यह हमारे लिए ऐतिहासिक दिन है, बराक नदी में पहलीबार प्रेस दिवस मनाया जा रहा है। उन्होंने सभी मंचासीन अतिथियों का गमछा से स्वागत किया। प्रेस दिवस का आयोजन शिलचर प्रेस क्लब व अभ्यन्तरीन जल परिवहन विभाग के सहयोग से किया गया। विशिष्ट पत्रकार व साहित्यकार अतीन दाश ने कहा कि असम को दो उपत्यका में बांटते थे, ब्रह्मपुत्र व सुरमा। सुरमा में काछाड़ एक जिला था, जब काछाड़ तीन हिस्सा हुआ तब हमने काछाड़ बंग साहित्य सम्मेलन का नाम बराक उपत्यका बंग साहित्य सम्मेलन लिखना शुरु किया। बहुतों ने इस पर आपत्ति भी की। उन्होेंने कहा कि ब्रिटिश सरकार के समय से मीडिया के ऊपर उत्पीड़न-अत्याचार चलता आ रहा है। कुछ मीडिया हाउस के मालिक कहते हैं कि ये व्यापार है किन्तु यह बाकी व्यापार से अलग है। हमारा सामाजिक दायित्व है, हम नागरिक अधिकारों का उपयोग करके ही अपना काम करते हैं। देश समाज की उन्नति के लिए हमें प्रयाश करते रहना चाहिए। प्रतियोगिता के जमाने में रिस्क भी उठाना पड़ेगा। 

असम विश्‍वविद्यालय के अध्यापक अनीन्द्र सेन ने कहा कि वे पहलीबार इतनी सुन्दर बराक नदी को देख रहे हैं। नमामि बराक की प्रतीक्षा है, उन्होेंने कहा कि पिछले दस वर्षों में मीडिया बहुत बदल गया है। अब फेक न्यूज, मीस इन्फारमेशन चल रहा है। सोशल मीडिया में आप गलती से भी कोई चीज पोस्ट करेंगे, वो डिलीट करते करते वायरल हो जाएगा। फिर भी समाचारों को जांच करके ही देने का प्रयास करना चाहिए। वैज्ञानिक एस.वी. राय, जिला उन्नयन अधिकारी श्रीमती मधुमिता चौधरी, प्रेस क्लब के सचिव शंकर दे, चयन भट्टाचार्य, प्रेरणा भारती के प्रकाशक दिलीप कुमार, पपलु दास, मेघनाथ कर, अभियंता अजय दास, सनत कोइरी, गौतम तालुकदार, अमल लस्कर, रत्नदीप दे, बहारुद्दीन चौधरी, दिलीप सिंह व श्रीमती सीमा कुमार ने प्रेस दिवस पर अपना वक्तव्य प्रस्तुत किया। कार्यक्रम का शुभारम्भ मंचासीन अतिथियों के स्वागत से हुआ। मध्यान्ह भोजन की भी व्यवस्था की गयी थी। तीन घंटे नदी में चलती हुई लांच के ऊपर कार्यक्रम करने का एक रोमांच और प्रसन्नता सभी ने अनुभव की।