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प्रे.सं.शिलचर, 3 दिसंबर ः राष्ट्रभाषा का विरोध करने वाले राष्ट्रविरोधी हैं। यदि राष्ट्रभाषा घोषित नहीं हुई तो देशभर में राष्ट्रभाषा प्रचार समितियाँ क्यों बनी है? राष्ट्रभाषा के माध्यम से शिक्षा देनी होगी।

हिन्दी माध्यम के विद्यालयों का माध्यम ठीक किया जाय, उसे परिवर्तित किया गया है। दुकान के सामने राष्ट्रभाषा में साईनबोर्ड लगाया जाय। चाय बागान के लोगों ने बराक वैली को आबाद किया, अब वे ही उपेक्षित क्यों? बराक के सारे रास्ते चाय बागान के हैं, हम लोग छठ पूजा करते हैं, नदी के किनारे हम हर साल नमामि बराक करते हैं। चाय बागान के रहने वाले सभी समुदाय के लोग हिन्दीभाषी हैं, उन्हें अलग करने की साजिश सफल नहीं होने देंगे। हमारी भाषा-संस्कृति एक है। हमारे पूर्वजनों ने यहाँ आकर खाण्डवप्रस्थ को इन्द्रप्रस्थ बनाया। राष्ष्ट्रपति के समक्ष हिन्दी और हिन्दीभाषी छोड़कर जो कार्यक्रम हुआ, भीड़ के बावजूद वह सफल नहीं माना जाएगा। उपरोक्त बातें हिन्दीभाषी संगठनों की एक संयुक्त बैठक में वक्ताओं ने कही। हरिनारायण वर्मा की अध्यक्षता में हिन्दीभवन में शिलचर में 22 संगठनों की एक संयुक्त बैठक आयोजित हुयी। 

आसन ग्रहण और परिचय के बाद अपने प्रस्ताविक वक्तव्य में दिलीप कुमार ने सभा में उपस्थिति पर प्रसन्नता जाहिर करते हुए कहा कि आने वाले समय में पूरा समाज हमारे साथ होगा। उन्होेंने बैठक के उद्देश्य पर चर्चा करते हुए कहा कि नमामि बराक महोत्सव की सफलता से समाज का एक विशेष वर्ग अभिमान से भर गया है। पिछले कई वर्षों से एक षड़यंत्र के तहत हिन्दीभाषियों को उड़ीया, वर्दमानी, मारवाड़ी, भोजपुरी कहकर बाँटा जा रहा है। चूंकि 60-70 वर्ष पूर्व बराकघाटी में हिन्दीभाषियों का वर्चस्व था, किन्तु आज परिस्थिति इसके उलट है। जबकि 99% हिन्दीभाषी लोग यहाँ सन् 1857 के पहले आये हुए हैं। किन्तु हम पिछड़ गये इसके पीछे पर्याप्त शिक्षा का अभाव है। उन्होंने चाय बागानवासियों के विकास हेतु कुछ प्रस्ताव सभा के समक्ष रखे जिनमें - • मातृभाषा के माध्यम से शिक्षा की व्यवस्था की जाय,• बेरोजगारी दूर करने के लिए सरकारी योजनाओं का क्रियान्वय हो।•चुनाव में तिहाई सीट हिन्दीभाषी समाज को मिले। • चाय बागान की सरप्लस जमीन पर से अवैध अतिक्रमण हटाकर चाय बागानवासियों को जमीन पट्टे के साथ मुहैया करायी जाय। • टेट तथा अन्य परीक्षा में चाय बागान के लोगों को 30% आरक्षण दिया जाय। • दूरदर्शन, आकाशवाणी में चाय बागान के लोगों का कार्यक्रम आना चाहिए। सनत कोइरी ने एनआरसी, स्मारिका सहित विभिन्न मुद्दे पर बोलते हुए कहा कि

 एनआरसी के तहत चाय बागान के लोगों को शामिल किया जाय, इसके लिए  उन्होंने बराक चाय श्रमिक युनियन के नेताओं से बात की थी। क्योंकि चायबागानवासी यहाँ के मूल वासिन्दा हैं। उन्होेंने कहा कि चाय बागान की जमीन से अन्य जातियों के कब्जे को हटाना होगा। बराकघाटी में टी ट्राइव व एक्स टी ट्राइव कुल मिलाकर 25% हैं। इसीप्रकार उन्हें नौकरी तथा अन्य क्षेत्रों में अवसर जनसंख्या के आधार पर मिले। 

बैठक में स्कील इंडिया के तरफ से गौहाटी के अलक सरकार व संजीत राज चौधरी ने प्रधानंत्री कौशल विकास योजना के बारे में जानकारी प्रदान की। सभा में मनीष पाण्डेय ने कहा कि हमें एकजुट होकर मजबुत संगठन खड़ा करना है ताकि हम एकमत हो सके। वरिष्ठ नागरिक संतोष पटवा ने कहा कि पटवा परिवार शिलचर में संगीत का जन्मदाता है, मेरा राष्ट्रपति से पुराना परिचय था, जब वे सांसद थे, किन्तु मुझे उनसे मिलने का अवसर नहीं दिया गया। हम सबकी उपेक्षा हो रही है। विमल नुनिया ने कहा कि हमारा झण्डा हमें ही ऊँचा करना है। संजीव कानु ने कहा कि सब मिलकर एक केन्द्रीय समिति बनना चाहिए। अलग-अलग विभागों के लिए विधि प्रकोष्ठ, शिक्षा प्रकोष्ठ, सांस्कृतिक, क्रीड़ा आदि के लिए अलग-अलग समितियाँ बनायी जाय। शुभम राय ने कहा कि ऐसे विद्यालय हैं, जहाँ या तो हिन्दी शिक्षक नहीं हैं या फिर जो शिक्षक हैं, उसे हिन्दी का ज्ञान नहीं। उन्होेंने आरकाटीपुर का उदाहरण दिया। जो हिन्दी पढ़ना चाहते हैं, उन्हें परेशान किया जाता है। कंचन सिंह ने कहा कि स्थिति ये है कि कई जगहों पर रिकार्ड में नाम हिन्दी स्कूल का है, किन्तु वहाँ बांग्ला माध्यम चल रहा है। 

वरिष्ठ बुद्धिजीवी लक्ष्मी निवास कलवार ने अपने वक्तव्य में कहा कि हमें मणिपुरी-डिमासा से सीखना चाहिए, वे लोग कम संख्या में होकर भी सरकार को बाध्य कर देते हैं। हम एक दूसरे की खामियाँ न देखकर कैसे समाज का विकास हो, इसका विचार करना चाहिए। यादव महासभा के सचिव भोला यादव ने कहा कि हम एक जुट नहीं हुए तो जहाँ से आए थे, वापस वहीं जाना पड़ेगा। उन्होेंने अपील किया कि सभी हिन्दीभाषी अपनी-अपनी दुकान पर राष्ट्रभाषा में साइनबोर्ड लगाए। 

हाइलाकान्दी के रूपनारायण राय ने अपने ओजपूर्ण वक्तव्य में कहा कि बात बहुत हुई अब एक्शन प्लान बनाना है। हम यहाँ के मूल नागरिक हैं। बदलपुर, बदरपुर क्यों हुआ? पहले नदी के माध्यम से ही यातायात होता था, हमारी घाट की संस्कृति है। कटिहार से हमारे पूर्वज बदलपुर पानी के जहाज से आए थे। हमें अपनी भाषा-संस्कृति के लिए जेल जाने के लिए भी तैयार रहना होगा। युवा श्रमिक नेता गोलक ग्वाला ने कहा कि चाय बागान के सभी समुदाय को जोड़ना होगा, इसके लिए हमें दीर्घकालिक योजना पर कार्य करना होगा। युवा समाजसेवी संजीव राय ने दुःख और क्षोभ के साथ कहा कि राष्ट्रपति के सामने हिन्दी और हिन्दीभाषी की उपेक्षा हुयी, वो कार्यक्रम सफल कैसे हो सकता है? हम नमामि बराक की प्रस्तुति के समय से ही हिन्दी को खोज रहे थे। क्या हिन्दी हमें भीख में मिली है?स्मारिका में एक भी हिन्दी लेख क्यों नही है। 2-4 हिन्दी लेख अब से भी देना पड़ेगा। सांस्कृतिक कार्यक्रमों में भी हमारी उपेक्षा की गयी। हम तो हर साल नदी किनारे छठ पूजा के समय नमामि बराक करते हैं। मनोज शाह ने सुझाव दिया कि हमें सीधा राज्यपाल और मुख्यमंत्री से भेंट करनी चाहिए। 

सभा में 51 सदस्यी संयोजक मंडल का गठन किया गया, जो इस अभियान का संचालन करेगा। 51 सदस्यों में दिलीप कुमार, चंद्रशेखर सिंह, संजीव राय, हरिनारायण वर्मा, राजेन्द्र पाण्डेय, भोला यादव, कमल शारदा, महावीर बड़दिया, चंद्रमा प्रसाद कोइरी, गोलक ग्वाला, धनंजय तेली, लक्ष्मीनिवास कलवार, रूपनारायण राय, केशव दिक्षित, युगलकिशोर त्रिपाठी, राजेन कुँवर, मनीष पाण्डेय, मनोज शाह, रंजन सिंह, जयप्रकाश गुप्ता, शिवकुमार पासवान, उमाशंकर पासवान, श्यामसुन्दर रविदास, इंद्रजीत तिवारी, संजीव कानु, विप्लव पटवा, सौरभ कोइरी, रंजीत पासी, मुकेश गिरी, संदीप शुक्ला, राजा रविदास, सागर रविदास, विराज भुमिज, भुवन राजवार, विमल नुनिया, ब्रजेश पांडेय, उत्तम सिंह, रामनारायण नुनिया, रामाशीष चौहान, सत्राजीत कुर्मी, संजीत पाण्डेय, रमेश राय, रवि कुमार शुक्ला, विप्लव राय, राजकुमार दुबे, रत्नेश अग्रहरि, डा. रीता सिंह यादव, नीलम गोस्वामी, वंदिता राय, अपर्णा तिवारी व सीमा कुमार शामिल है। 

सभा में उपस्थित वरिष्ठ जनों में शिक्षाविद् पूर्व डीआई जवाहरलाल राय, कमल शारदा, मुरलीधर कानु, चंद्रशेखर सिंह, चंदद्रमा प्रसाद कोइरी, धनंजय तेली, राजेन्द्र पांडेय, महावीर बड़दिया, उमाकान्त यादव, आनंद दुबे, राजेन कुँवर आदि शामिल थे। सभा में सबको अपने-अपने क्षेत्र में दिसंबर के भीतर बैठक आयोजित करवाने का अनुरोध किया गया। अन्त में पूर्व विधायक बद्रीनारायण सिंह व मधुसूदन तिवारी के निधन पर 2 मिनट का मौन पालन करके विदेही आत्मा के शान्ति व सद्गति की कामना की गयी। पर रिकार्ड में नाम हिन्दी स्कूल का है, किन्तु वहाँ बांग्ला माध्यम चल रहा है। 

वरिष्ठ बुद्धिजीवी लक्ष्मी निवास कलवार ने अपने वक्तव्य में कहा कि हमें मणिपुरी-डिमासा से सीखना चाहिए, वे लोग कम संख्या में होकर भी सरकार को बाध्य कर देते हैं। हम एक दूसरे की खामियाँ न देखकर कैसे समाज का विकास हो, इसका विचार करना चाहिए। यादव महासभा के सचिव भोला यादव ने कहा कि हम एक जुट नहीं हुए तो जहाँ से आए थे, वापस वहीं जाना पड़ेगा। उन्होेंने अपील किया कि सभी हिन्दीभाषी अपनी-अपनी दुकान पर राष्ट्रभाषा में साइनबोर्ड लगाए। 

हाइलाकान्दी के रूपनारायण राय ने अपने ओजपूर्ण वक्तव्य में कहा कि बात बहुत हुई अब एक्शन प्लान बनाना है। हम यहाँ के मूल नागरिक हैं। बदलपुर, बदरपुर क्यों हुआ? पहले नदी के माध्यम से ही यातायात होता था, हमारी घाट की संस्कृति है। कटिहार से हमारे पूर्वज बदलपुर पानी के जहाज से आए थे। हमें अपनी भाषा-संस्कृति के लिए जेल जाने के लिए भी तैयार रहना होगा। युवा श्रमिक नेता गोलक ग्वाला ने कहा कि चाय बागान के सभी समुदाय को जोड़ना होगा, इसके लिए हमें दीर्घकालिक योजना पर कार्य करना होगा। युवा समाजसेवी संजीव राय ने दुःख और क्षोभ के साथ कहा कि राष्ट्रपति के सामने हिन्दी और हिन्दीभाषी की उपेक्षा हुयी, वो कार्यक्रम सफल कैसे हो सकता है? हम नमामि बराक की प्रस्तुति के समय से ही हिन्दी को खोज रहे थे। क्या हिन्दी हमें भीख में मिली है?स्मारिका में एक भी हिन्दी लेख क्यों नही है। 2-4 हिन्दी लेख अब से भी देना पड़ेगा। सांस्कृतिक कार्यक्रमों में भी हमारी उपेक्षा की गयी। हम तो हर साल नदी किनारे छठ पूजा के समय नमामि बराक करते हैं। मनोज शाह ने सुझाव दिया कि हमें सीधा राज्यपाल और मुख्यमंत्री से भेंट करनी चाहिए। 

सभा में 51 सदस्यी संयोजक मंडल का गठन किया गया, जो इस अभियान का संचालन करेगा। 51 सदस्यों में दिलीप कुमार, चंद्रशेखर सिंह, संजीव राय, हरिनारायण वर्मा, राजेन्द्र पाण्डेय, भोला यादव, कमल शारदा, महावीर बड़दिया, चंद्रमा प्रसाद कोइरी, गोलक ग्वाला, धनंजय तेली, लक्ष्मीनिवास कलवार, रूपनारायण राय, केशव दिक्षित, युगलकिशोर त्रिपाठी, राजेन कुँवर, मनीष पाण्डेय, मनोज शाह, रंजन सिंह, जयप्रकाश गुप्ता, शिवकुमार पासवान, उमाशंकर पासवान, श्यामसुन्दर रविदास, इंद्रजीत तिवारी, संजीव कानु, विप्लव पटवा, सौरभ कोइरी, रंजीत पासी, मुकेश गिरी, संदीप शुक्ला, राजा रविदास, सागर रविदास, विराज भुमिज, भुवन राजवार, विमल नुनिया, ब्रजेश पांडेय, उत्तम सिंह, रामनारायण नुनिया, रामाशीष चौहान, सत्राजीत कुर्मी, संजीत पाण्डेय, रमेश राय, रवि कुमार शुक्ला, विप्लव राय, राजकुमार दुबे, रत्नेश अग्रहरि, डा. रीता सिंह यादव, नीलम गोस्वामी, वंदिता राय, अपर्णा तिवारी व सीमा कुमार शामिल है। 

सभा में उपस्थित वरिष्ठ जनों में शिक्षाविद् पूर्व डीआई जवाहरलाल राय, कमल शारदा, मुरलीधर कानु, चंद्रशेखर सिंह, चंदद्रमा प्रसाद कोइरी, धनंजय तेली, राजेन्द्र पांडेय, महावीर बड़दिया, उमाकान्त यादव, आनंद दुबे, राजेन कुँवर आदि शामिल थे। सभा में सबको अपने-अपने क्षेत्र में दिसंबर के भीतर बैठक आयोजित करवाने का अनुरोध किया गया। अन्त में पूर्व विधायक बद्रीनारायण सिंह व मधुसूदन तिवारी के निधन पर 2 मिनट का मौन पालन करके विदेही आत्मा के शान्ति व सद्गति की कामना की गयी।