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प्रे.सं शिलचर 12 फरवरीः असम के सबसे पिछड़ा समाज चायबागान है।

आजादी के बाद से ही चाय श्रमिक एवं चाय उद्योग के विकास पर कोई ध्यान नही दिया गया। जहां एक ओर चाय श्रमिक अपने न्युनतम मौलिक अधिकार कि लिये बंचित है वही बराक के अधिकांश चाय उद्योग बन्द के कगार पर है। सिर्फ यही नही चाय बागानों के जमीन बांग्लादेशियों द्वारा कब्जा किया गया है। आज राष्ट्रभाषा एवं चाय जनगोष्ठी उन्नयन मंच के तत्वाबधान में शिलचर हंसी-खुशी भवन मेें आगामी 15 मार्च को होने जा रही विशाल महारैली के सन्दर्भ में पत्रकारों को संबोधित करते हुए मंच के मुख्य संयोजक दिलीप कुमार ने कही। मंच के सह-प्रभारी मुलचन्द बैद, मंच के बड़खोला के प्रभारी संजीव राय, मंच के धोलाई के प्रभारी चन्द्र शेखर सिंह, लोवाइपुआ के प्रभारी युगल किशोर त्रिपाठी, मंच के कोषाध्यक्ष जय प्रकाश गुप्ता आदि के उपस्थिति दिलीप कुमार ने ओर कहा कि चाय जनगोष्ठी के लोग अपने लिविंग स्टेण्डर्ड से बंचित हैं , उनका समाज में कोई स्टेटस नही है। इससे पहले गत 3 जनवरी से बराक के 8 ब्लाक सर्कल में धर्ना-प्रदर्शन किया गया। विभिन्न मांगों के सन्दर्भ में राज्य के मुख्यमंत्री को ज्ञापन प्रदान किया गया। बावजूद वर्तमान सरकार की नींद नही खुली। अभी तक सरकार के तरफ से कोई जवाब नही आया है। इसे देखते हुए आगामी 15 मार्च को यह विशाल रैली होने जा रहा है। मंच ने राज्य सरकार से चायबागानवासियों को शिक्षा, स्वास्थ्य, रोजगार एवं पंचायत चुनाव में 30 प्रतिशत आरक्षण का मांग किया है। साथ ही चायबागानवासियों के हित में डेवलपमेन्ट कौन्सिल बनाने के लिये मांग किया गया है। वही चाय उद्योग के विकास के लिये 24 घन्टे बिजली एवं सरकारी अन्य सुविधाएं ्रप्रदान करने के लिये मांग किया है। उन्होंने कहा कि बराक के अनेकों बागानों में बाग्लादेशियों द्वारा बागान का जमीन अतिक्रमण किया गया है। बराक के चरगोला, हाथीछोड़ा, सरसपुर, मोनाछोड़ा चेंगकुड़ी आदि चायबागान में बांग्लादेशियों ने जमीन अतिक्रमण कर रखा है। उन्होंने महारैली में बागानों, बस्तियों एवं गावों से आने-वाले लोगों से शान्तिपूर्ण तरीके से रैली करने के लिये अपील किया है।  

पत्रकारों को संबोधित करते हुए बड़खोला प्रभारी संजीव राय ने कहा कि दो महीने से चल रही आन्दोलन को राज्य सरकार ने थोड़ी सी भी अहमियत नही दी है। पहले भी चाय बागानवासियों के साथ अन्याय हुआ आज भी एक ही हाल है। आगामी 15 मार्च को होने जा रहा रैली ऐतिहासिक होगी। अगर इसके बाद भी राज्य सरकार मांगे नही मानी तो आगामी दिनों में मांगों के लेकर शान्ति भंग होगा तो इसके लिये राज्य सरकार जिम्मेदार होगी, मंच जिम्मेदार नही रहेगा। आगामी 32 संगठनों से बनी मंच के तत्वाबधान में चाय श्रमिक अपनी आवाज बुलन्द करेंगे। क्योंकि श्रमिकों के कड़ी मेहनत के फलस्वरुप उत्पादित चाय दिसपुर एवं दिल्ली पहूंच रहा है। मगर श्रमिकों की मांगों की आवाज नही पहुंच रहा है। इससे दुःखद क्या हो सकता है? श्रमिकों की आवाज को पहुंचाने महारैली हो रहा है। पत्रकार वार्ता में कहा गया है कि आरंभ में जितने राष्ट्रभाषा के स्कुल थे उसे परिवर्तित कर बांग्ला माध्यम कर दिया गया है उन स्कुलों को राज्य सरकार शीघ्र ही हिन्दी माध्यम में आरंभ करें।