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प्रे.सं.शिलचर, 24 अप्रैल ः संघ का काम केवल शाखा जाना नहीं, समाज में और भी दायित्व निभाने की जरुरत है।

विविध क्षेत्र के कार्यकर्ताओं को एकजुट होकर सम्मिलित रुप से योजनाबद्ध काम करने की जरुरत है। उक्त उद्गार राष्ट्रीय स्वयंसेवक संघ दक्षिण असम के पूर्व प्रांत प्रचारक महेन्द्र शर्मा ने स्वयंसेवकों को संबोधित करते हुए व्यक्त की है। उन्होंने कहा कि मैं 1988 में जब असम आया, तब हैलाकांदी भी काछाड़ में था। मुझे शिलचर का दायित्व मिला। सबकुछ नया-नया था। मुझे हाइलाकांदी से बांग्लाभाषा की शिक्षा मिली। तब हमारे मार्गदर्शक विभाग प्रचारक विजयनजी थे, जो बहुत ही अनुशासनप्रिय थे। मुझे दो साल बाद विभाग प्रचारक का दायित्व मिला। एक स्वयंसेवक ने राजदूत मोटरसाइकिल दिया था, बराकवैली का कोई भी हिन्दू ग्राम नहीं है, जहाँ राजदूत नहीं गयी हो। वैसे ही डिमाहसाओ भी। दक्षिण असम का परिवेश अभी ठीक है, किन्तु इसे बिगाड़ने के लिए दुःशक्तियाँ लगी हुई है। जैसे डिमाहसाओ में वातावरण बिगाड़ा गया, वैसे ही बराकवैली में एनआरसी और हिन्दू शरणार्थी नागरिकत्व अधिनियम को लेकर बहुत समस्याएं आने वाली हैं। ऐसे में स्वयंसेवकों को कौशल और बुद्धिमत्ता के साथ काम करना होगा। मैं कम बोलता हूँ, इससे अगर अनजाने में कभी किसी को ठेस पहुँची हो तो क्षमा मांगते हुए अगले दायित्व हेतु आशीर्वाद चाहता हूँ।

प्रांत प्रचारक संजय देव ने कहा कि प्रचारक बनने के बाद जहां भी गये, महेन्द्रजी का नाम मिला। उन्होेंने हमारे लिए काम आसान कर दिया है। सेवा भारती के पूर्व क्षेत्रीय संगठनमंत्री नरेशकुमार विकल ने कहा कि ऋषि विश्‍वामित्र मिल जाय तो राम पैदा होते हैं, मैंने पूर्वोत्तर में संघ कार्य का प्रारंभ महेन्द्रजी के मार्गदर्शन में किया था, उन्होंने स्वयंसेवकों से उत्तराखंड में चारो धाम दर्शन के लिए आने की अपील की और कहा कि हम भी संघ के इस विशाल कार्य में एक गिलहरी की भांति योगदान कर रहे हैं। संघ के केन्द्रीय कार्यकारिणी के सदस्य गौरीशंकर चक्रवर्ती ने बताया कि महेन्द्रजी के साथ सन् 1988 में असम में चार प्रचारक आये थे, जिसमें से एक तो जल्दी ही लौट गये थे और ओमप्रकाश चतुर्वेदी को बंगाइगांव के नजदीक उल्फा ने गोली मार दी। दूसरे यतीन्द्रजी सन्यासी हो गये, महेन्द्रजी ने 30 वर्षों में डिमाहसाओ, बराकवैली, त्रिपुरा व मिजोरम में व्यापक जनसम्पर्क बनाया है। कुछ दिनों के लिए वे तेजपुर भी गये थे। प्रस्ताविक वक्तव्य क्षौणिश चक्रवर्ती ने प्रदान किया। कार्यक्रम का संचालन सुब्रत दास ने, कार्यक्रम में प्रेरणा भारती के प्रकाशक दिलीप कुमार ने कविता पाठ किया। अन्यान्य वक्ताओं में विधानसभा उपाध्यक्ष दिलीप कुमार पाल, कुलमणी मिश्रा, अनुपम मंडल, उदयशंकर गोस्वामी, रूपनारायण राय, सपनशुक्ल वैद्य, मृणालकांति दास, मृणाल भट्टाचार्य, सुब्रत नाथ, सुभ्रांशुशेखर भट्टाचार्य, राजीव पुरकायस्थ, मिठुन राय व सेविका समिति की सविता धर शामिल थीं। उपस्थित प्रमुख व्यक्तियों में शशिकान्त चौथाईवाले, विजन नाथ, प्रणव पाल चौधरी, कविन्द्र पुरकायस्थ, कौशिक राय, मिहिरकांति सोम, सुभाष नाथ, संजीव भट्टाचार्य, पूर्णचंद मंडल, विजय पाल, मिहिरकुमार राय, शेखर देव, रुपम साहा, संतोष राय, प्रमोद शर्मा आदि उपस्थित थे। 

उक्त कार्यक्रम का आयोजन पूर्व प्रांत प्रचारक महेन्द्र शर्मा व नरेश कुमार विकल के सम्मान में किया गया था। ज्ञात हो कि महेन्द्रजी अब पश्‍चिमी उत्तर प्रदेश के सहक्षेत्र प्रचारक प्रमुख का दायित्व निर्वाह करेंगे, उनका केन्द्र आगरा होगा। पूर्व क्षेत्र संगठनमंत्री नरेशकुमार विकल भी पश्‍चिमी उत्तर प्रदेश में प्रचारक के नाते कार्य करेंगे। नये प्रांत प्रचारक संजय कुमार देव का स्वागत किया गया। स्वयंसेवकों ने उनलोगों को विभिन्न प्रकार के उपहार प्रदान किये।