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केकड़ागोल चाय बागान, करीमगंज से विशेष प्रतिनिधि के द्बारा ः आज हमने जो कुछ देखा और सुना बिल्कुल किसी फिल्मी किस्से जैसा था। एक व्यक्ति इतना प्रतापी हो गया कि उसके आतकं से बागान का कोई भी आदमी मुँह खुलने का साहस नहीं करता था।

आवाज उठाने वालो का काम बन्द, झुठेे केस में फँसा देना, अपने लठैतो से पिटवाना अर्थात विभिन्न प्रकार की प्रताड़ना ताकि फिर किसी का साहस ही न हो। चाय वागान से होने वाले कामोें में उसका कमीशन, सरकारी योजनाओं में उसकी हिस्सेदारी फिक्स हैं, यहाँ तक कि वृद्धा भत्ता, विधवा भत्ता में से उसे हिस्सा देना पड़ता है। असम सरकार द्वारा चाय श्रमिकों के खाते में जमा कराया गया 2500/- का 500/- उसे देना पड़ा। पीएफ का पेसा मिलने पर उसमें से भी हड़प लेना। एक वृद्ध महिला रजंना गोस्वामी ने बताया कि गौतम राय ने उसे कुछ रुपया दान दिया था, उसे भी लाला सिंह ने छीन लिया और आज तक नही दिया, उसे ये भी नहीं पता कि कितना रूपया गौतम राय ने दिया।

लाला सिंह के अत्याचारों की कहानी खत्म नही होती, एक श्रमिक ने नाम न छापने की शर्त पर बताया कि सुन्दर-2 लड़कियाँ को एकान्त में काम पर लगवाकर अपनी यौन पिवासा भी मिटाता है लाला सिंह। केकड़ागोल में आयोजित सभा मेें एक-2 करके साहस दिखाते हुए लोगो ने अपनी-2 राम कहानी सुनायी, श्रीमती कलावती भर ने बताया कि वे लोग 6 दिन काम करते है तो 4-5 दिन की ही मजदुरी मिलती, 25-30 किग्रा पत्ती तोड़ते है, उसे 15-20 किग्रा लिखा दिया जाता है। उन्हे जो 2500 रूपया सरकार से मिलता, उसमे से लाला सिंह ने जबरन 500/- रख लिया। बासन्ती कुर्मी ने बताया कि उसके पति की मौत के बाद उसे एक पैसा भी नहीं मिला, पता चला कि 45000/- रूपया लाला सिंह ने निकल लिया। पैसा थी नहीं मिला, मेरा काम भी बन्द करवा दिया, अब घर में बच्चो को खिलाने के लिए मेरे पास कुछ नहीं, इधर-उधर से माँग कर गुजारा कर रही हूँ।  केशब भर ने बताया कि लाला सिंह ने जबरदस्ती मुझसे  मैनेजर के खिलाफ केस करवाया जब कि मैनेजर के साथ मेरा कोई प्राब्लम नहीं था। जान बचाने के लिए  झठ बोला। मेरा पी एफ का एक लाख इक्यासी हजार मिला था, उसमें से जबरन तीस हजार रख लिया। श्रीमती चारू बिन ने बताया कि सरकार से मिला 2500/- रूपया वो घर तक ले गयी थी लेकिन उसे 500/- लाला सिंह के घर पहुँचाना पड़ा, बात नहीं सुनने पर तरह-2 की प्रताड़ना से गुजरना पड़ता है। पी एफ में से भी चार हजार देना पड़ा। राजाराम रविदास ने बताया कि उसकी गाय पकड़कर ले गया। गाय विना खाए मर गयी, केस किया तो मेरा अगुँठा एक कागज पर जबरन लेकर केस खत्म कर दिया। श्रीमती लखी राय ने बताया कि मुझसे रेप केस करने के लिए बोला, जमीन का लालच दिया। सावित्री रविदास ने बताया 5 साल हो गया, उनका पी एफ नहीं मिला। सुमित्रा भर, समबरसी रविदास, कौशल्या भर, श्रद्धा कमकर आदि जितने लोग उतनी शोषण और अत्याचार की कहानी। लोगो का कहना था कि वे बोलते जाएगे पर लाला के पाप और अत्याचार की कहानी खत्म नहीं होगी।

आज केकड़ागोल के सांस्कृतिक सभा कक्ष में श्रमिक दिवस पर गिरिजा पाण्डेय की अध्यक्षता में आयोजित सभा में लोगो ने अपना क्षोभ, दुःख, गुस्सा सब व्यक्त किया। राधाकान्त ग्वाला ने कहा कि श्रमिको के उपर आतंक, प्रहार और बज्राघात हो रहा है। समाज में एक वायरस पैदा हो गया है। उसे समाप्त करना होगा। यह एक संक्रामक बिमारी जैसा हो गया हे।  स्थानीय समाजसेवी उमाशंकर बनिया ने कहा कि जब से ये कम्पनी आयी धीरे-2 सब एक एक ही आदमी के इशारे पर चलने लगा। बागान लालामय हो गया। किसी भी मैनेजर को टिकने नहीं दिया जाता है। मैनेजर स्टाफ, पचांयत लाला सिंह के साथ मिलकर बागान के श्रमिको और बागान को लुट रहे थे। जहाँ 40-50 श्रमिक काम करते है,वहाँ 100 श्रमिक का भुगतान होता था। आज से जो भी लाला सिंह का साथ देंगा, उसे माफ नहीं किया जाएगा। वरिष्ठ समाजसेवी द्विजेन्द्र रायशर्मा ने कहा कि आज की स्थिति के लिए पिछला मैनेजमेन्ट पुरी तरह जिम्मेदार हैं। सिण्डिकेट बनाकर बागान और श्रमिकों को लुटा गया। जो उपराधी है, उसके खिलाफ कारवाई होनी चाहिए तभी बागान की उन्नति होगी। बागान की जमीन चाय लगाने के लिए है। उसे आज बिक्री किया जा रहा है। गम्भीरा के पूर्व सभापति राजेन्द्र कमकर ने बराक चाय श्रमिक युनियन पर सवाल खड़ा किया कि इतने दिनों से युनियन कयों चुप बैठा है। श्रमिकों की मेहनत को बदमाश लुट रहा हैं, उन्हे क्यों नहीं पता।

सभा आयोजक श्यामनारायण यादव ने कहा कि बागान चार दिन बन्द था, लेकिन श्रमिको ने नहीं लाला सिंह ने बन्द कराया क्योंकि नए मेनेजर उसके इन सब कार्यो के खिलाफ है। श्रमिको की मजदुरी छीन ली जाती है, 500 की जगह 3-4 सौ ही मिलता हो। लाला सिंह ने धमकी दिया था कि जो काम मे जाएगा, उसे झुठे रेप केस में फँसा कर जेल भेजवा देगा, मारपीट करेगा। लेकिन अब किसी को डरने की जरुरत नहीं। डा. दयाशंकर शर्मा ने कहा कि बागान मेनेजर और बैंक मेनेजर भी इस लुट में शामिल है। उनकी भी जाँच करायी जाय। राष्टभाषा एवं चाय जनगोष्ठी उन्नयन मंच के मुख्य संचालक दिलीप कुमार ने भरोसा दिलाया कि पुरे मामले की जाँच कारवाइ जाएगी। दोषी किसी भी कीमत पर बच नहीं सकता। सभा में उपस्थित प्रमुख व्यक्तियों में हाइलाकान्दी के रुपनारायण राय, शिलचर से रितेश नुनिया, प्रेमचन्द्र रायशर्मा, दिवाकर राय, चन्दन तिवारी, अजय गोस्वामी, मनोज मोहन्ती आदि शामिल थे।