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एपीएससी कार्यालय में पुलिस ने फिर चलाया अभियान, १४० कॉपियां जब्त

गुवाहाटी, ०७ जून (हि.स.)। असम पब्लिक सर्विस कमिशन (एपीएससी) में कैस फार जॉब मामले की जांच जोरशोर से चल रही है।

प्रदेश महिला कांग्रेस ने महिला सुरक्षा को लेकर किया प्रदर्शन

गुवाहाटी, ०७ जून (हि.स.)। असम की राजधानी गुवाहाटी के एबीसी इलाके में स्थित असम प्रदेश कांग्रेस मुख्यालय राजीव भवन के सामने महिला कांग्रेस कमेटी की सदस्याओं ने बुधवार को केंद्र और राज्य सरकार के विरूद्ध जमकर नारेबाजी की।

कार्र्बी आंग्लांग स्वायत्तशासी परिषद चुनाव में कांग्रेस ने तेज किया प्रचार

कार्बी आंग्लांग, ०७ जून (हि.स.)। असम प्रदेश कांग्रेस पार्टी ने भी कार्बी आंग्लांग स्वायत्तशासी परिषद चुनाव में अपने उम्मीदवारों के समर्थन में चुनाव प्रचार तेज किया है।

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‘रॉक आन-२ङ्क और ‘फोर्स-२ङ्क आ गई है।

‘कहानी-२ङ्क और ‘बाहुबलीङ्क आने वाली है। ‘किक-२ङ्क की तैयारी चल रही है। चार ‘राजङ्क आ चुकी है। पांचवी पर काम हो रहा है। महेश भट्ट का इरादा तो दस ‘राजङ्क बनाने का है। ‘रेस-३ङ्क, ‘डॉन-३‘ तो कुछ भी नहीं है, ‘गोलमालङ्क, ‘हाउसफुलङ्क व ‘कृशङ्क जैसे फिल्मों के चौथे संस्करण की योजना बन गई है। कुछ में पिछली फिल्मों से कहानी का सूत्र जोड़ा गया है तो कुछ में पुराने नाम के साथ नई कहानी को चस्पा किया गया है। सीक्वल यानी एक फिल्म के मुख्य पात्रों और मूल कहानी से जुड़ी कई कड़िया बनाने की हॉलीवुड की अवधारणा को मुंबइया फिल्मकारों ने अपनी सुविधा के मुताबिक तोड़-मरोड़ दिया है। यही वजह है कि सिर्फ शीर्षक दोहरा कर फिल्मों के कथित सीक्वल बनाना मजाक सा बन गया है। फिर भी निर्माता हैं कि इसका मोह नहीं छोड़ पा रहे। असल में एक शीर्षक वाली कोई फिल्म हिट हो जाती है तो उसी शीर्षक को सफलता की गारंटी मान लिया जाता है। समस्या दो तरह की है भी। एक तो फिल्म के लिए उपयुक्त शीर्षक असानी से मिलते नहीं। दूसरे विषय का अभाव। ऐसे में अगर किसी फिल्म में आजमाया गया फार्मूला सफल हो जाता है तो कहानी व पात्रों में फेरबदल के साथ उसी शीर्षक के साथ उस फार्मूले को निचोड़ना ज्यादा सुविधाजनक हो जाता है।

कुछ फिल्मकार यह कोशिश जरूर करते हैं कि एक ही शीर्षक पर बनी फिल्मों में कहानी के तार एक दूसरे से भले ही न जुड़े, मुख्य पात्र वही रहे। रोहित शेट्टी की हर ‘गोलमालङ्क में अजय देवगन अनिवार्य रूप से रहे तो ‘हेरा फेरीङ्क या ‘हाउस फुलङ्क की तीनों कड़ियों में अक्षय कुमार नजर आए। दोनों ‘डॉनङ्क में शाहरुख खान, प्रियंका चोपड़ा और बमन ईरानी को जगह मिली लेकिन दूसरी ‘डॉनङ्क पहली फिल्म का विस्तार थी। राकेश रोशन ने भी यह सिलसिला अपनाए रखा हालांकि पहले उनकी योजना ‘कृशङ्क बनाने की नहीं थी। ‘कोई मिल गयाङ्क में एलियन (किसी अन्य ग्रह से आया व्यक्ति) के संपर्क में आने से मंदबुद्धि नायक में आए चमत्कारिक बदलाव को पसंद कर लिया गया तो उसकी कहानी को विस्तार देकर उन्होंने दो ‘कृशङ्क बना डाली। हिंदी फिल्मों में सीक्वल का प्रयोग सबसे पहले हरमेश मल्होत्रा ने किया था। नब्वे के दशक में उन्होंने इच्छाधारी नागिन के इंसान से प्रेम की कहानी पर ‘नगीनाङ्क बनाई। फिल्म बड़ी मुश्किल से रिलीज हो पाई। नागिन वाली फिल्में पसंद किए जाने का दौर खत्म हो गया था इसलिए वितरक ‘नगीनाङ्क पर हाथ रखने की हिम्मत नहीं जुटा पाए। लेकिन ‘नगीनाङ्क रिलीज क्या हुई कि उसने सफलता का नया इतिहास रच दिया। उत्साहित होकर हरमेश मल्होत्रा ने ‘नगीनाङ्क की कहानी को ‘निगाहेङ्क में आगे बढ़ाया। श्रीदेवी पुराने रूप में रहीं।

६०ऋषि कपूर की जगह सनी देओल प्रेमी बन गए। ‘नगीनाङ्क में नागिन का शिकार हुए तांत्रिक अमरीश पुरी के शिष्य के रूप में अनुपम खेर को नागिन को खत्म करने का जिम्मा सौंपा गया। लेकिन इसके बावजूद फिल्म नहीं चल। हरमेश मल्होत्रा के प्रयोग के बाद कई साल तक फिल्म का सीक्वल बनाने की दुस्साहस किसी निर्माता ने नहीं किया। निर्देशन से नाता तोड़ने के बाद अपने भाई मुकेश भट्ट के साथ मिलकर महेश भट्ट ने फिल्म बनाने का कारखाना खोल लिया। सेक्स को प्रधानता देकर उन्होंने ‘राजङ्क व ‘मर्डरङ्क जैसी फिल्में बनाई। ‘राजङ्क पारलौकिक शक्तियों पर केंद्रित थी तो ‘मर्डरङ्क में अवैध संबंधों पर जोर दिया गया। दोनों ही फिल्में चल गईं तो उन्हीं विषयों को निचोड़ कर उसी शीर्षक से कई फिल्में बना डाली।  ‘मर्डरङ्क से पहले मल्लिका शेरावत अपनी पहली फिल्म ‘ख्वाहिशङ्क में १८ चुंबन दृश्य देकर सुर्खियों में आ गई थीं। ‘मर्डरङ्क में उनके ज्यादा चुंबन दृश्य डाल दिए गए। फार्मूला हिट हो गया। उसे विस्तार देने की योजना बनी पर मल्लिका ने अगली फिल्म के लिए पचास लाख रुपए मांग लिए। प्रोजेक्ट ठंडा पड़ गया। फिर भी सेक्स को अलग अंदाज में पेश कर दो और ‘मर्डरङ्क परोस दी गई। ‘जन्नतङ्क के साथ भी यही प्रयोग हुआ। प्रेम में धोखा खाने के बाद नायिका के हिंसक प्रतिशोध पर उतर आने का फार्मूला ‘हेट स्टोरीङ्क में हिट क्या हुआ कि उसे उसी शीर्षक की और दो फिल्मों में दोहरा दिया गया। नाम बदलने का जोखिम नहीं उठाया गया। पहली फिल्म की लोकप्रियता का फायदा बाद की फिल्मों में उठाने की नीयत से ऐसा किया गया। ‘१९२०ङ्क भी इसीलिए दो बार बनी।

बाल ठाकरे के जीवन से प्रभावित होकर राम गोपाल वर्मा ने ‘सरकगारङ्क बनाई। फिल्म सफल हो गई तो उसका सीक्वल बन गया। यह सही मायने में सीक्वल था क्योंकि पहली फिल्म की कहानी को दूसरी में आगे बढ़ाया गया था। अब सालों बाद वर्मा ‘सरकार-३ङ्क बना रहे हैं। दौड़ में अकेले वे ही नहीं हैं। दो ‘दबंगङ्क बन चुकी है। तीसरी की तैयारी है। ‘वैलकम बैकङ्क आ चुकी है। ‘नो एंटड्ढीङ्क, ‘मिस्टर इंडियाङ्क, ‘सत्ते पे सत्ताङ्क, ‘एक था टाइगरङ्क आदि दर्जनों फिल्मों के सीक्वल बनाने की तैयारी चल रही है।