Offcanvas Info

Assign modules on offcanvas module position to make them visible in the sidebar.

A A A

सुप्रीम कोर्ट ने सिनेमाघरों में राष्ट्रगान की धुन बजाए जाने और उसके सम्मान में खड़े होने को अनिवार्य करके २१वीं सदी में उभरती देशभक्ति की भावना पर मुहर लगा दी है।

देखना है कि इस आदेश का पालन वे लोग कितनी तन्मयता से करते हैं, जो सिर्फ फेसबुक और ट्विटर पर देशभक्ति की बहसें चलाते रहते हैं।

इस देश का आम आदमी देशभक्त है और उसे देश के स्वाभिमान के प्रतीकों का आदर करने में कोई परेशानी नहीं है। वह सुबह प्रभातफेरी भी निकालता रहा है और राष्ट्रीय पर्वों पर लंबी- लंबी परेडों में देश के लिए नारे भी लगाता रहा है पर उदारीकरण और वैश्वीकरण के दौरान उसकी रोजी-रोटी की व्यस्तता और कॅरियर की महत्वाकांक्षाएं बढ़ी हैं और वह देशभक्ति के उस जज्बे से मुक्त हुआ है, जिसे लेकर गांधीजी से लेकर भगत सिंह तक ने जान की बाजी लगा दी। लेकिन पिछले कुछ वर्षों से वैश्वीकरण का राजनीतिक पक्ष कमजोर हुआ है और फिर से राष्ट्रवाद और देशभक्ति की भावना उमड़ने लगी है। निश्चित तौर पर यह दौर उस समय से अलग है जब तिरंगा उठाकर तमाम देशभक्त जान की बाजी लगा देते थे। आज हमारे सामने कोई अंग्रेज नहीं, जिससे हमें देश को मुक्त कराने के लिए देशभक्ति दिखाना है। आज देशभक्ति हमें अपने ही लोगों के लिए दिखाना है ताकि हमें उन सपनों की याद रहे, जिनके लिए हमारे पुरखों ने जान की बाजी लगाई। हालांकि, वे सपने सबके लिए अलग- अलग हैं और संवेदनहीनता के कारण उसमें टकराव भी है।

यह देशभक्ति व राष्ट्र निर्माण की प्रतिबद्धता की परीक्षा है। जब १९६० के दशक में सिनेमाघरों में राष्ट्रगान की धुन बजाई जाती थी और परदे पर तिरंगा लहराया जाता था तो लोग सीट से खड़े नहीं होते थे और हॉल में चलते-फिरते रहते थे। नागरिकों की इस स्वाभाविक लापरवाही को देखते हुए सरकार ने राष्ट्रगान की धुन बजाए जाने पर रोक लगा दी थी। पिछले साल मद्रास हाईकोर्ट ने भी कहा था कि प्रशासन किसी को राष्ट्रगान की धुन के समय खड़े होने के लिए बाध्य नहीं कर सकता। अब जबकि सुप्रीम कोर्ट ने मनोरंजन और देशभक्ति का गठबंधन कर ही दिया है और धुन बजाने को ही नहीं बल्कि खड़े होने को अनिवार्य कर दिया है तो समाज के सभी तबकों को उसका हृदय से पालन करना चाहिए। इस मुद्?दे पर ज्यादा ना-नुकुर करने से व्यर्थ का टकराव और विवाद बढ़ेगा, जो देश की एकता और सामाजिक सद्?भाव के लिए नुकसानदेह होगा।