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इस हफ्ते काफी शादियां थीं। इनमें तमाम नेताओं से लेकर पत्रकारों तक के बच्चे विवाह के बंधन में बंधे।

चूंकि ज्यादातर लोग पुराने परिचित व दोस्तों की श्रेणी में आते थे इसलिए वहां जाना जरुरी था। वहां जाने की खास वजह यह भी थी कि लोगों से बातचीत करके नोटबंदी पर उनकी राय जानने का इससे अच्छा मौका और क्या हो सकता था। पत्रकारों को तो निष्पक्ष माना जाता है पर उनके यहां भी हर दल के नेता आते हैं। संयोग से कांग्रेसी व भाजपाई दोनों ही नेताओं के यहां से निमंत्रण पत्र आए थे। वहां गया और खुलकर किस्से-कहानियां व बातचीत सुनी।एक कांग्रेसी नेता ने किस्सा सुनाया कि किसी संपन्न व्यक्ति के घर में आग लग गई। उसका सारा धन तबाह हो गया। वह परेशान होकर ज्योतिषी के पास गया। उसने उसकी जन्मपत्री देखकर कहा कि बस थोड़े ही दिनों की बात है। दो महीने इंतजार कर लो फिर सारे कष्ट दूर हो जाएंगे? उसने पूछा कि क्या दो माह बाद मेरे ग्रह बदल जाएंगे? मेरा नष्ट हुआ धन व संपत्ति वापस मिल जाएगी? इस पर ज्योतिषी ने कहा ऐसा कुछ नहीं होगा पर ६० दिन के अंदर आपकी यह दुख और कष्ट झेलने की आदत पड़ जाएगी। फिर आप को पीड़ा नहीं होगी और आप उन्हीं हालत के आदी हो जाएंगे। उसका इशारा प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी के ५० दिन की दिक्कतों के बयान पर था।

एक वरिष्ठ भाजपा नेता ने किस्सा सुनाया कि एक बार उनके घर का सीवर जाम हो गया। उन्होंने नगर निगम में कई बार शिकायत की पर कोई नहीं आया। घर के बाहर गंदे पानी व कीचड़ का सैलाब उमड़ रहा था। अतः परेशान होकर उन्होंने परिवार के सदस्यों की मदद से उसे साफ करने का फैसला किया। पूरे परिवार ने बड़ी मेहनत करके घर के सामने के सीवर को खोला। गंदगी और बदबू के बीच बाल्टियां भर कर गंदगी निकाली। उसे दूर फेंक कर आए और राहत की सांस ली। पर जब अगले दिन बाहर निकले तो सीवर का पानी उसी तरह से उफन रहा था। वे सोच में पड़ गए फिर समझ में आया कि उन्होंने गड्डे में भरा पानी तो साफ कर दिया पर गंदे पानी का स्त्रोत जो कि घर के अंदर था वह बदस्तूर जारी था जब तक वह बंद नहीं किया जाता तब तक इस उफनती गंदगी पर रोक नहीं लगायी जा सकती।फिर उन्होंने बताया कि हमारी सरकार ने भी वही गलती की है। हमने काला धन रोकने के लिए नोटबंदी कर दी पर काला धन पैदा होने का स्त्रोत बंद नहीं किया। सबसे ज्यादा काला धन नेताओं और अफसरों के पास होता है। कोई बड़ी तादाद में नोट अपने घर पर नहीं रखता है। यह काम तो छोटे मोटे व्यापारी करते हैं जिनका धंधा ही नकद पर चलता है। बड़ी मछलियां या तो अपना पैसा निवेश कर देती है अथवा हवाला के जरिए बाहर भेज देती है। यही वजह है कि देश के तमाम बड़े औद्योगिक एवं व्यापारिक घराने नोटबंदी की तारीफ कर रहे हैं।

ऐसी ही शादी में मौजूद एक प्रवर्तन निदेशालय के अफसर का कहना था कि कस्टम, आयकर या हमारे विभाग की कार्यप्रणाली चाहे कितनी ही चुस्त दुरुस्त क्यों न बना दी जाए हम लोग जो कुछ पकड़ते है वह काली करततू का ५-१० फीसदी हिस्सा ही होता है। अगर कस्टम वाले साल भर में १० किलो सोना जब्त करते हैं तो यह मान लीजिए कि ९० किलो सोना तस्करों के जरिए देश में आ चुका है इसलिए जो सौ पचास करोड़ के नोट जब्त किए जा रहे हैं वह तो ऊंट के मुंह में जीरे के बराबर है। इस जब्ती का कोई मतलब नहीं।

यह सब सुनने के बाद लगा कि क्या सचमुच यह कदम आधा अधूरा है? देश में रिश्वतखोरी बदस्तूर जारी है, आज भी नोएडा से लेकर चेन्नई तक कहीं भी जमीन का पंजीकरण या उसमें किसी तरह का बदलाव करवाना होता तो एक तय राशि रिश्वत के रुप में देनी पड़ेगी। यह सत्य किसी से छिपा नहीं है कि इसका एक बड़ा हिस्सा सीधे मुख्यमंत्री के पास जाता है। हरियाणा में तो पहले खुल्लम खुल्ला जमीन की खरीद फरोख्त करते समय ६ फीसदी अघोषित कर अदा करना पड़ता था। सरकारें बदलने के साथ ही इसका नाम भी बदलता जाता था जैसे कि भजनलाल फंड, चौटाला फंड वगैरह वगैरह। जब मायावती सत्ता में थी तो इतनी सख्ती थी कि जमीन के कामकाज से जुड़े सरकारी अफसर बताते थे कि चाहे सरकारी खाते में जमा होने वाली राशि बाद में जमा करवा दें पर ऊपरी राशि उसी दिन चाहिए। वे बताते थे कि उन्हें हर दिन जमा होने वाली यह राशि उसी रात अपने आला अफसरों तक पहुंचानी पड़ती है। वे इस मामले में कोई जोखिम नहीं उठा सकते क्योंकि उन्हें यह नहीं पता होता कि किस रात उनका तबादला कर दिया जाएगा इसलिए वे हर दिन का हिसाब कर के जाते हैं। याद है ना कि इसी व्यवस्था ने यादव सिंह सरीखे अफसर दिए जिन्हें हर सरकार ने अपनाया। जिनके यहां से अकूत दौलत बरामद की गई। क्या यह सरकार बताएगी कि उसने काला धन पैदा होने के स्रोत पर क्या कार्रवाई की है या उसमें कितनी कमी आयी है, राज्यों से लेकर केंद्र स्तर पर रिश्वतखोरी बदस्तूर जारी है।

भाजपा नेता ने तो यहां तक कहा कि जब हम जनता के बीच जाते हैं तो वह हमसे पूछते हैं कि क्या आप की इन गलत काम करने वालों के साथ सांठगांठ है या सरकार इतनी नाकारा है कि उसने सत्ता में आने के ढाई साल बाद भी एक भी भ्रष्ट अफसर, नेता के खिलाफ कार्रवाई नहीं की। हम लोगों को नैतिकता का पाठ पढ़ा कर बेवकूफ बनाया। लोग भविष्य में रिश्वत न ले और कालाधान पैदा न हो इसके लिए क्या किया? अब तो रिश्वतखोरों के लिए और भी आराम हो जाएगा। पहले जो कालाधन १००० रुपए में एकत्र किया जाता था वह अब दो हजार के नोटों में रखा जाएगा। इसके लिए कम जगह की जरुरत होगी।

हालांकि एक आला आयकर अफसर का कहना था कि आम जनता के अच्छे दिन भले ही न आए हो पर मोदीजी ने तो हमारे अच्छे दिन लाने की तैयारी कर दी है। हमारा काम जरुर बढ़ेगा पर साथ ही कमाई भी बढ़ना तय है। आप लोग यह भूल जाएं कि ढाई लाख तक खाते में जमा करवाने वालों के खिलाफ कोई कारवाई नहीं की जाएगी। अगर इस अवधि में किसी ने ५० हजार या उससे ज्यादा रकम जमा करवायी है तो वह भी जांच के दायरे में होंगे। जनधन खातों पर भी कहर बरपेगा। अगर चंद हजार या जीरो बैलेंस वाले खाते में १०-२० हजार भी जमा पाए गए तो उन लोगों को भी नोटिस जाएंगे। साल के अंत में लोग एटीएम की लाइन में खड़े नजर आएंगे तो नए साल की शुरुआत में इनकम टैक्स के दफ्तरों के चक्कर काट रहे होंगे। उनसे इतने दस्तावेज मांगे जाएंगे कि कुछ मत पूछिए। उसका कहना था कि इस सरकार की खासियत यह है कि उसने न्यूनतम हस्तक्षेप व अफसरशाही व अधिकतम सुशासन का नारा दिया था पर किया एकदम उल्टा। अब पूरा देश इंस्पेक्टर राज का मजा लेगा। इससे ज्यादा मूर्खतापूर्ण कदम कोई हो ही नहीं सकता। पेटीएम सरीखे मुद्दों पर भी लोगों की मैंने राय जानने की कोशिश की तो एक बड़े अफसर ने कहा कि अमेरिका और योरोप तक में अधिकतम ४५ फीसदी लोगों के पास ही क्रेडिट कार्ड है। जिस देश के लोगों के पास पीने का स्वच्छ पानी और शौचालय तक न हो। जहां सरकार को लोगों को यह बताना पड़ता हो कि शौच करने के बाद हाथ धोने चाहिए वहां यह कल्पना करना कि लोग बहुत जल्दी ही स्मार्ट फोन के जरिए पैसे का लेन देन करने लगेगे हास्यास्पद नहीं बल्कि ऐसा मूर्खतापूर्ण कदम है जिसके लिए मुंगेरी लाल के हसीन सपने जैसी व्यवस्था भी छोटी पड़ जाए। अब तो कुछ समय बाद लोग यह कहते नजर आएंगे कि ‘मोदी के कैशलेस सपनेङ्क।

किसी ने यह भी कहा कि आज सरकार का सारा जोर लोगों को कैशलेश व्यवस्था अपनाने पर है। फिलहाल ३० दिसंबर तक इस पर कोई चार्ज नहीं लगेगा पर जब हालात सामान्य हो जाएंगे तो इस व्यवस्था का इस्तेमाल करने वाले को ढाई फीसदी सर्विस टैक्स अदा करना पड़ेगा। मतलब यह है कि जो राशि नकद भुगतान करने पर सौ रुपए की कीमत की होती उसके भुगतान के लिए अब हम १०२.५० रुपए अदा करें। अतः आपके सौ रुपए की कीमत ९७.५० रुपए ही रह जाएगी। पुराने कटे-फटे नोट बंदलने वालों को तो कमीशन लेते हुए देखा था पर यहां तो सरकार अपनी मुद्रा के इस्तेमाल के लिए लोगों से दलाली लेगी। यह सब सुनते सुनते दिमाग भन्ना गया तो एक नेता से मैंने पूछा कि मगर चैनलों पर लोग विरोध करते नजर क्यों नहीं आ रहे हैं। उसने कहा कि आम जनता की हालत तो उसे मुंगेरी जैसी है जिसे बवासीर हो गई हो। क्या कभी इसके रोगी को सार्वजनिक तौर पर अपनी पीड़ा व्यक्त करते हुए देखा है? यह सुनते ही वहां से उठ लिया। वर वधु को लिफाफा टिकाया जिसमें २ पांच सौ के व एक सौ का नोट रखा था। मन में सोचा कि अगर उन्होंने यह नोट बदल लिया तो ठीक है वरना अगर उन्हें दिक्कत हुई तो मेरी क्या गलती है। मोदीजी तो पहले ही ऐसे लोगों को काला धन रखने वाला करार दे चुके हैं।