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यात्रियों के लिए बुरी खबर, रेल किराए में हो सकती है ब‹ढोत्तरी

नई दिल्ली (समा.एजें) ११ जनवरी :. रेल से सफर करने वाले यात्रियों को अब ज्यादा पैसे खर्च करने पड़ सकते हैं. रेल किराए में बढ़ौतरी हो सकती है.

बिरला-सहारा डायरी केस को सुप्रीम कोर्ट ने किया खारिज

नई दिल्ली (समा.एजें) ११ जनवरी : सुप्रीम कोर्ट ने सहारा-बिड़ला डायरी मामले में जांच कराने की मांग वाली एक याचिका को बुधवार को खारिज कर दिया।

धरमखाल सॅनराइजर्स क्लब ने किया सभा का आयोजन

संगीता माला, धरमखाल,१० जनवरीः आज धरमखाल सँनराइर्जस क्लब ने एक सभा का आयोजन किया इस सभा में मुख्य अतिथि के रूप में उपस्थित थी काछा‹ड की सांसद सुस्मिता देव एवं प्रेमराज ग्वाला इस सभा का संचालन विरेन्द्र धोवी ने किया।

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बिंद्रा ने २००८ में बीजिंग में स्वर्ण पदक जीता जबकि विजय कुमार और गगन नारंग ने लंदन में २०१२ में क्रमश: रजत और कांस्य पदक जीते। 

परफेक्शनिस्ट अभिनव बिंद्रा ने अपने स्वर्णिम कैरियर को वर्ष २०१६ में अलविदा कह दिया जबकि रियो ओलंपिक में पदक के प्रबल दावेदार माने जा रहे निशानेबाज लचर प्रदर्शन के बाद खाली हाथ लौटे। बिंद्रा के कैरियर का अंत भी मनचाहा नहीं रहा। ओलंपिक में भारत के लिये व्यक्तिगत स्पर्धा का एकमात्र स्वर्ण जीतने वाले बिंद्रा ने सितंबर में खेल को अलविदा कह दिया था। विश्व चैम्पियनशिप स्वर्ण पदक विजेता बिंद्रा रियो में मामूली अंतर से पदक से चूक गए और तनावपूर्ण शूटऑफ में उन्हें पराजय झेलनी पड़ी। बिंद्रा का प्रदर्शन हालांकि रियो में भारतीय निशानेबाजों में सर्वश्रेष्ठ रहा। रेंज के बाहर खेल सुर्खियों में रहा लेकिन इतने सालों में भारतीय निशानेबाजों ने जो मानदंड कायम किये हैं, उसको देखते हुए यह साल नाकामी भरा रहा। ओलंपिक में २००४ के बाद पहली बार भारतीय निशानेबाज खाली हाथ लौटे। इसके बाद भारतीय राष्ट्रीय राइफल संघ ने बिंद्रा की अगुवाई में समीक्षा समिति का गठन किया। समिति ने ३६ पन्नों की रिपोर्ट में रियो के फ्लॉप शो के लिये व्यवस्था को लताड़ा और आमूलचूल बदलाव की मांग की। गगन नारंग से लेकर हीना सिद्धू और अयोनिका पाल किसी को नहीं बख्शा गया।

बिंद्रा ने २००८ में बीजिंग में स्वर्ण पदक जीता जबकि विजय कुमार और गगन नारंग ने लंदन में २०१२ में क्रमश: रजत और कांस्य पदक जीते। इससे पहले २००४ में राज्यवर्धन राठौड़ ने रजत पदक जीता था। ओलंपिक से पहले अपना दबदबा कायम करने वाले जीतू राय पिस्टल निशानेबाजी में नाकाम रहे। हीना, मानवजीत सिंह संधू, नारंग, अपूर्वी चंदेला और जीतू को कोई पदक नहीं मिला जबकि सभी की तैयारी पर काफी पैसा बहाया गया था। जीतू ने साल के आखिर में विश्व कप में चैम्पियन ऑफ चैम्पियंस पिस्टल खिताब जीता। तेहरान में एशियाई राइफल और पिस्टल निशानेबाजी चैम्पियनशिप में भारत ने १५ पदक जीते। शाहजार रिजवी और रूचिता विनेरकर जैसे नये निशानेबाज इससे उभरे। शुभांकर प्रमाणिक, अनमोल जैन, स्वप्निल कुसाले, राज्यवर्धन के बेटे मानवादित्य राठौड़ ओर अनंत जीत सिंह ने भी अच्छा प्रदर्शन किया। सितंबर में अजरबैजान में हुए जूनियर विश्व कप में भारत नौ स्वर्ण, पांच रजत और १० कांस्य लेकर दूसरे स्थान पर रहा।