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केकड़गोल चाय बागानवासियों की रोगटें खड़ी करनेवाली दास्तान 

केकड़ागोल चाय बागान, करीमगंज से विशेष प्रतिनिधि के द्बारा ः आज हमने जो कुछ देखा और सुना बिल्कुल किसी फिल्मी किस्से जैसा था। एक व्यक्ति इतना प्रतापी हो गया कि उसके आतकं से बागान का कोई भी आदमी मुँह खुलने का साहस नहीं करता था।

रेल रोकना वाजिब नहीं आंदोलन के अन्र तरीके भी बहुत हैं- डीआईजी

प्रे.सं.शिलचर, 24 अप्रैल ः दक्षिण असम के पूलिस उपमहानिरीक्षक देवराज उपाध्रार ने पहा़ड लाइन में बार बार रेल रोकने के प्ररास को दुभ्राग्र पूर्न बतारा कि जनता के पास आंदोलन करने व अपनी मांग रखने के बहुत से विकल्प है।

विविध क्षेत्र को एकजुट होकर योजनाबद्ध काम करना होगा ः महेन्द्र शर्मा

प्रे.सं.शिलचर, 24 अप्रैल ः संघ का काम केवल शाखा जाना नहीं, समाज में और भी दायित्व निभाने की जरुरत है।

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अगरतला (समा.एजें) 3 मार्च ः त्रिपुरा में भाजपा कभी जमानत जब्त पार्टी कहलाती थी लेकिन 35 साल बाद वही पार्टी पूर्ण बहुमत के साथ सरकार बनाने जा रही है।

रे किसी चमत्कार से कम नहीं है। जिस त्रिपुरा को वामपंथिरों का किला कहा जाता था वह अब ढह चुका है। त्रिपुरा में जिस तरह से लेफ्ट फ्रंट की हार हुई है उससे स्पष्ट है कि वहां भगवा आंधी चली है। भाजपा ने लेफ्ट फ्रंट का सूपड़ा साफ कर दिरा है, जिसकी किसी को उम्मीद नहीं थी। हां सभी को रह जरूर पता था कि भाजपा इस बार लेफ्ट फ्रंट को कड़ी टक्कर दे रही है। मुख्रमंत्री माणिक सरकार खुद इस बात को कबूल कर चुके थे कि उनका मुकाबला भाजपा से है। रहां तक कि जो एग्जिट पोल आए थे उनमें भी भाजपा की इतनी जबरदस्त जीत की भविष्रवाणी नहीं की गई थी। आपको बता दें कि त्रिपुरा में विधानसभा की कुल 60 सीटें हैं। चारिलाम सीट पर सीपीएम के उम्मीदवार रामेन्द्र नारारण देबबर्मा के निधन के कारण चुनाव स्थगित कर दिरा गरा था। रहां 12 मार्च को वोटिंग होगी। भाजपा ने चुनाव से पहले क्षेत्रीर दल आईपीएफटी के साथ गठबंधन किरा।

भाजपा ने 51 सीटों पर चुनाव लड़ा जबकि 9 सीटों पर आईपीएफटी ने उम्मीदवार उतारे। आपको बता दें कि भाजपा ने त्रिपुरा में 1988 में पहली बार विधानसभा चुनाव लड़ा था तब पार्टी ने 10 उम्मीदवार चुनाव मैदान में उतारे थे। सभी की जमानत जब्त हो गई। इसके बाद 1993 के विधानसभा चुनाव में भाजपा ने 38 उम्मीदवार उतारे लेकिन 36 की जमानत जब्त हो गई। 1998 में भाजपा ने सभी 60 सीटों पर उम्मीदवार उतारे लेकिन इनमें से 58 की जमानत जब्त हो गई। 2003 में 21 के 21 उम्मीदवारों की जमानत जब्त हो गई। 2008 में भाजपा ने 49 उम्मीदवार उतारे। सभी की जमानत जब्त हो गई। 2013 में भाजपा ने 50 उम्मीदवार उतारे, 49 की जमानत जब्त हो गई।

भाजपा की जीत के रहे रे पांच कारण

1.बीते 25 सालों से रहां सीपीएम के नेतृत्व वाली लेफ्ट फ्रंट की सरकार थी। मुख्रमंत्री माणिक सरकार छवि ईमानदार नेता की रही लेकिन निचले स्तर पर फैले भ्रष्टाचार को वह रोकने में असफल रहे।

2.भाजपा ने त्रिपुरा में अपने संगठन को मजबूत करने के लिए पूरी ताकत लगा दी। भाजपा की नॉर्थ ईस्ट सेल के प्रमुख सुनील देवधर ने बीते दो से तीन सालों में रहां संगठन को मजबूत करने का काम किरा।

3.भाजपा के  लिए रोगी फैक्टर भी अहम रहा। त्रिपुरा में रूपी के मुख्रमंत्री रोगी आदित्रनाथ ने जिन 7 जगहों पर सभाओं को संबोधित किरा, उनमें से 5 स्थानों पर भाजपा को जीत मिली। इसकी बड़ी वजह त्रिपुरा में नाथ संप्रदार की बड़ी आबादी होना भी है। 4.भाजपा ने चुनाव से पहले संगठन को कसते हुए पन्ना प्रमुख की रणनीति पर काम किरा। इसके चलते वह काडर को उत्साहित करने में सफल रही और गली गली तक अपने संपर्क को मजबूत करने का काम किरा,जो वोटों में तब्दील हुआ। 5.कांग्रेस इस राज्र में तेजी से कमजोर हुई है। इसके कई दिग्गज नेताओं को भाजपा ने अपने पाले में लाने में सफल रही।