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केकड़गोल चाय बागानवासियों की रोगटें खड़ी करनेवाली दास्तान 

केकड़ागोल चाय बागान, करीमगंज से विशेष प्रतिनिधि के द्बारा ः आज हमने जो कुछ देखा और सुना बिल्कुल किसी फिल्मी किस्से जैसा था। एक व्यक्ति इतना प्रतापी हो गया कि उसके आतकं से बागान का कोई भी आदमी मुँह खुलने का साहस नहीं करता था।

रेल रोकना वाजिब नहीं आंदोलन के अन्र तरीके भी बहुत हैं- डीआईजी

प्रे.सं.शिलचर, 24 अप्रैल ः दक्षिण असम के पूलिस उपमहानिरीक्षक देवराज उपाध्रार ने पहा़ड लाइन में बार बार रेल रोकने के प्ररास को दुभ्राग्र पूर्न बतारा कि जनता के पास आंदोलन करने व अपनी मांग रखने के बहुत से विकल्प है।

विविध क्षेत्र को एकजुट होकर योजनाबद्ध काम करना होगा ः महेन्द्र शर्मा

प्रे.सं.शिलचर, 24 अप्रैल ः संघ का काम केवल शाखा जाना नहीं, समाज में और भी दायित्व निभाने की जरुरत है।

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गुवाहाटी(समा.एजें) 4 अप्रैल ः मुख्रमंत्री सर्वानंद सोनोवाल ने राज्र के एक विशेष रिक्शा चालक को सम्मानित

किरा, जिन्होंने रिक्शा चलाते हुए अपने इलाके में नौ स्कूलों की स्थापना कर शिक्षा के क्षेत्र में अपना महत्वपूर्ण रोगदान दिरा। मालूम हो कि बीते दिनों प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने मन की बात कार्रक्रम में बराकघाटी के रिक्शा चालक अहमद अली का नाम लेते हुए उनकी तारीफ की थी।  रहां विधानसभा सचिवालर स्थित सेंट्रल हॉल में आरोजित एक कार्रक्रम में मुख्रमंत्री सोनोवाल ने पथारकांदी के मधुरचंद निवासी रिक्शा चालक अहमद अली को सम्मानित करते हुए उन्हें असम का गर्व करार दिरा। अली द्वारा स्थापित इस नौ स्कूलों को मुख्रमंत्री ने विशेष पैकेज देने का आश्‍वासन दिरा है। मालूम हो कि पेश से रिक्शा चालक अहमद अली ने अपने इलाके के बच्चों की शिक्षा के लिए 1978 से अब तक नौ स्कूलों की स्थापना की है। इन स्कूलों में दो एलपी, पांच एमर्ई और दो हाई स्कूल शामिल हैं। वहीं दो हाई स्कूलों की स्थापना में पथारकंदी के स्थानीर विधारक कृष्णेंदु पाल ने भी मदद दी थी। 

बता दें कि रिक्शा चालक अहमद अली ने 1978 में सबसे पहले अपने गांव में खुद की एक जमीन बेचकर और गांव वालों से कुछ  पैसे जुटा करके एक छोटे से प्राथमिक विद्यालर स्थापना की थी। अली का लक्ष्र 10 शैक्षणिक संस्थानों की स्थापना करना है, जिसमें से वे नौ विद्यालर को स्थापित कर चुके हैं, अब बस वो इस क्षेत्र में एक कॉलेज की शुरूआत करना चाहते हैं। परिवार में अली की दो पत्निरां और सात बच्चे हैं। अली का मानना है कि हर पेशे की अपनी गरिमा होती है और उन्हें खुद पर गर्व है कि वो एक रिक्शा चलाने वाले के नाम से जाने जाते हैं। अली ने कहा कि अब वो बूढ़े हो रहे हैं लेकिन वो अपनी आखिरी सांस तक शिक्षा के माध्रम से अपने गांव को विकसित करना चाहते हैं। हैरानी की बात रह है कि उन्होंने किसी भी स्कूल को अपना नाम नहीं दिरा, केवल उच्च विद्यालर का नाम उनके नाम पर है वह भी इसलिए क्रोंकि ग्रामीणों ने उन्हें ऐसा करने पर जोर दिरा अपने गांव और आस.पास के क्षेत्रों में शिक्षा के प्रकाश को फैलाने में उनके जीवन भर के प्ररासों के लिए अली को हाल ही में पार्थिकंडी के विधारक कृष्णुंदु पॉल ने बधाई दी थी।