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एपीएससी कार्यालय में पुलिस ने फिर चलाया अभियान, १४० कॉपियां जब्त

गुवाहाटी, ०७ जून (हि.स.)। असम पब्लिक सर्विस कमिशन (एपीएससी) में कैस फार जॉब मामले की जांच जोरशोर से चल रही है।

प्रदेश महिला कांग्रेस ने महिला सुरक्षा को लेकर किया प्रदर्शन

गुवाहाटी, ०७ जून (हि.स.)। असम की राजधानी गुवाहाटी के एबीसी इलाके में स्थित असम प्रदेश कांग्रेस मुख्यालय राजीव भवन के सामने महिला कांग्रेस कमेटी की सदस्याओं ने बुधवार को केंद्र और राज्य सरकार के विरूद्ध जमकर नारेबाजी की।

कार्र्बी आंग्लांग स्वायत्तशासी परिषद चुनाव में कांग्रेस ने तेज किया प्रचार

कार्बी आंग्लांग, ०७ जून (हि.स.)। असम प्रदेश कांग्रेस पार्टी ने भी कार्बी आंग्लांग स्वायत्तशासी परिषद चुनाव में अपने उम्मीदवारों के समर्थन में चुनाव प्रचार तेज किया है।

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नई दिल्ली (समा.एजें.) ६ अगस्त : सुप्रीम कोर्ट ने शुक्रवार को केंद्र सरकार से कहा है कि दूध में मिलावट करने वालों को उम्रकैद जैसी कड़ी सजा देने का कानून बनाने पर विचार करे, क्योंकि दूध का सेवन बच्चों समेत लोगों का एक बड़ा समूह करता है.

कोर्ट ने स्वामी अच्युतानंद तीरथ समेत अन्य द्वारा दाखिल जनहित याचिकाओं पर यह फैसला दिया.याचिका में कहा गया था कि दिल्ली, उत्तर प्रदेश, पंजाब, हरियाणा और राजस्थान में बड़े पैमाने पर मिलावटी दूध का गोरखधंधा चल रहा है. मुख्य न्यायाधीश जस्टिस टीएस ठाकुर, आर भानुमति और यूयू ललित की पीठ ने शुक्रवार को दिए फैसले में सरकार को कई अन्य निर्देश भी दिए हैं. पिछले चार वर्षों से सरकार को खाद्य सुरक्षा एवं मानक अधिनियम, २००६ में बदलाव करने के लिए कहने के बावजूद कोई नतीजा सामने न आने पर कोर्ट ने ये निर्देश दिए. उप्र, ओडिशा, मध्य प्रदेश और पश्चिम बंगाल ने दूध में मिलावट करने वालों को उम्रकैद की सजा देने का प्रावधान दो वर्ष पहले ही बना लिया है, लेकिन उप्र समेत अन्य राज्यों में अब भी बड़ी मात्रा में मिलावट का गोरखधंधा चल रहा है.    अदालत ने कहा कि फूड सेफ्टी एंड स्टैंडर्ड अथॉरिटी ऑफ इंडिया (एफएसएसएआई) ने २०११ में देशभर में दूध और दूध उत्पादों के सेंपल लिए थे, जिसके तहत कहा गया था कि देशभर से उठाए गए सेंपल में ६८.४ फीसदी उत्पाद मिलावटी दूध वाले हैं. सर्वे में कहा गया था कि ये मिलावट सेहत के लिए खतरनाक है. खासकर, नवजात शिशु, बच्चे और एडल्ट के स्वास्थ्य पर काफी विपरीत असर डालती है.सुप्रीम कोर्ट ने कहा कि केंद्र सरकार उप्र, ओडिशा, मध्य प्रदेश और पश्चिम बंगाल राज्यों द्वारा कानूनों में किए गए संशोधन को देखते हुए आईपीसी में जरूरी संशोधन करे. अदालत का मानना है कि मौजूदा प्रावधानों के तहत दोषियों के लिए छह महीने की सजा का प्रावधान है, जो पर्याप्त नहीं है. न ही इस सजा का मिलावटखोरों पर भयात्मक प्रभाव है. शीर्ष अदालत ने कहा कि चूंकि नवजात बच्चे समेत काफी संख्या में लोग दूध का सेवन करते हैं. ऐसे में उनके स्वास्थ्य को देखते हुए मिलावटी दूध के गोरखधंधे में लिप्त लोगों पर सख्ती बरतनी जरूरी है.
    सुप्रीम कोर्ट में दायर याचिका में कहा गया था कि दूध में मिलावट है और कैमिकल तक मिलाया जा रहा है. राजधानी दिल्ली, उप्र, उत्तराखंड, राजस्थान और हरियाणा में मिलावटी दूध बेचे जाने का आरोप लगाया गया. याचिका में कहा गया कि दूध में यूरिया, डिटरजेंट, रिफाइन ऑइल, कॉस्टिक सोडा आदि मिलाया जाता है जो सेहत के लिए खतरनाक है और राज्य सरकारें इसकी बिक्री रोकने में विफल हो रही हैं. राज्य सरकारें डेयरी और डेयरी ऑपरेटर का लेखाजोखा रखें और अगर दूध में कॉस्टिक सोडा या अन्य कोई कैमिकल मिलता है तो डेयरी मालिक, रिटेलर और अन्य तमाम संलिप्त पर कार्रवाई हो. हाई रिस्क एरिया जहां मिलावट की संभावना हो वहां समय-समय पर सेंपल लिए जाएं. पर्याप्त संख्या में सेंपल की टेस्टिंग के लिए लैब की व्यवस्था हो. मिलावट रोकने के लिए स्टेट लेवल की कमेटी बनाई जाए, जिसके प्रमुख चीफ सेक्रेटरी हों. दूध और अन्य उत्पादों में मिलावट से होने वाली हानि के बारे में लोगों को जागरुक किया जाए.