Offcanvas Info

Assign modules on offcanvas module position to make them visible in the sidebar.

Hot News:

Latest News

एपीएससी कार्यालय में पुलिस ने फिर चलाया अभियान, १४० कॉपियां जब्त

गुवाहाटी, ०७ जून (हि.स.)। असम पब्लिक सर्विस कमिशन (एपीएससी) में कैस फार जॉब मामले की जांच जोरशोर से चल रही है।

प्रदेश महिला कांग्रेस ने महिला सुरक्षा को लेकर किया प्रदर्शन

गुवाहाटी, ०७ जून (हि.स.)। असम की राजधानी गुवाहाटी के एबीसी इलाके में स्थित असम प्रदेश कांग्रेस मुख्यालय राजीव भवन के सामने महिला कांग्रेस कमेटी की सदस्याओं ने बुधवार को केंद्र और राज्य सरकार के विरूद्ध जमकर नारेबाजी की।

कार्र्बी आंग्लांग स्वायत्तशासी परिषद चुनाव में कांग्रेस ने तेज किया प्रचार

कार्बी आंग्लांग, ०७ जून (हि.स.)। असम प्रदेश कांग्रेस पार्टी ने भी कार्बी आंग्लांग स्वायत्तशासी परिषद चुनाव में अपने उम्मीदवारों के समर्थन में चुनाव प्रचार तेज किया है।

A A A

नई दिल्ली (समा.एजें) ११ जनवरी : सुप्रीम कोर्ट ने सहारा-बिड़ला डायरी मामले में जांच कराने की मांग वाली एक याचिका को बुधवार को खारिज कर दिया।

कोर्ट ने वकील प्रशांत भूषण द्वारा दाखिल याचिका पर सुनवाई करते हुए याचिकाकर्ताओं की जांच की मांग ठुकरा दी। सुप्रीम कोर्ट ने कहा कि इस मामले में पीएम नरेंद्र मोदी और अन्य के खिलाफ जांच कराने के लिए पर्याप्त सबूत नहीं हैं। कोर्ट ने याचिका को मेरिट के लायक ही नहीं समझा और कहा कि भूषण द्वारा पेश किए गए कागजात जांच के लिए पर्याप्त नहीं है। गौरतलब है कि इनकम टैक्स की एक रेड में सहारा के ऑफिस से एक डायरी मिली थी, जिसमे कथित रूप से यह लिखा है की २००३ में गुजरात के मुख्यमंत्री को २५ करोड़ रुपये घूस दी गई। उस समय नरेंद्र मोदी गुजरात के मुख्यमंत्री थे। इनके अलावा तीन और मुख्यमंत्रियों को भी घूस दी गई। बता दें कि इस डायरी के बिना पर ही कांग्रेस के उपाध्यक्ष राहुल गांधी ने पीएम मोदी पर आरोप लगाए थे।

नरेंद्र मोदी समेत अन्य राजनेता को रिश्वत देने का आरोप लगाने वाले एनजीओ ने पिछले गुरुवार को सुप्रीम कोर्ट से कहा था कि अगर सुप्रीम कोर्ट इस मामले में जांच का आदेश नहीं देता है तो कोई दूसरी जांच न्यायसंगत नहीं होगी। याचिकाकर्ता संगठन सीपीआईएल ने सुप्रीम कोर्ट में हलफनामा दाखिल कर कहा है कि आयकर विभाग की अप्रैजल रिपोर्ट, डायरी और ई-मेल साफ-साफ इशारे करती है कि राजनेताओं को रिश्वत दी गई थी, लिहाजा सुप्रीम कोर्ट को जांच का आदेश देना चाहिए। हलफनामे में यह भी कहा गया है कि यह विरले ही होता है जब अदालत या जांच एजेंसी के समक्ष ऐसे पुख्ता दस्तावेज पेश किए गए हों। ऐसे में अगर इस मामले में जांच का आदेश नहीं दिया जाता तो सुप्रीम कोर्ट द्वारा किसी भी मामले में जांच का आदेश देना न्यायसंगत नहीं होगा।हलफनामे में कहा गया है कि बिरला समूह पर सीबीआई के छापे और सहारा समूह की कंपनियों पर आयकर विभाग के छापे में अघोषित रकम, डायरी, नोटबुक, ई-मेल समेत कई अन्य दस्तावेज मिले थे। इन दस्तावेजों से साफ है कि इन कंपनियों द्वारा राजनेताओं और नौकरशाहों को रिश्वत दी गई थी।