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असीफा रेप कांड के विरुद्ध कांग्रेस का कैण्डिल मार्च

प्रे.सं.लखीपुर, 18 अप्रैल ः आज पैलापुल, बांसकांदी, बिनाकांदी आदि कई स्थानों पर लखीपुर विधानसभा में असीफा रेप काण्ड के विरुद्ध कैंडिल मार्च का आयोजन किया गया।

क्या हम इनसे कुछ सीख सकते हैं 

•दिलीप कुमार : बद्री बस्ती में एक उत्साही युवक है पप्पु चौबे।

अम्बेडकर जयन्ती के उपलक्ष्य में संस्कृति सुरभि द्वारा निःशुल्क चिकित्सा शिविर

प्रे.सं.शिलचर, 18 अप्रैल ः केशव स्मारक संस्कृति सुरभि द्वारा (4 अप्रैल को 127वें अम्बेडकर जयंती के उपलक्ष्य में श्यामपुर एलपी स्कूल चातला में एक दिवसीय निःशुल्क एलोपैथिक चिकित्सा शिविर आयोजित किया गया।

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नई दिल्ली (समा.एजें) 17 नवंबर ः मोदी सरकार की सख्त विदेश नीति की चर्चा विदेशों में भी हो रही है.

अमेरिकी संसद के सामने विदेश नीति खासकर चीनी मामलों पर नजर रखने वाले एक बड़े थिंक टैंक ने कहा है कि चीन के वन बेल्ट वन रोड(जइजठ) परिरोजना के खिलाफ मोदी ही दुनिरा के एकलौते नेता हैं जो खड़े हुए. हाल में चीन के साथ डोकलाम में भी मोदी सरकार ने सख्त रुख दिखारा था और 73 दिन तक सैनिकों के आमने-सामने खड़े रहने के बाद शांतिपूर्वक दोनों सेनाएं पीछे हटी थीं.अमेरिका के प्रतिष्ठित थिंक-टैंक हडसन इंस्टिट्र्ूट के सेंटर ऑन चाइनीज स्ट्रैटिजी के डाररेक्टर माइकल पिल्स्बरी ने अमेरिकी सांसदों के सामने चीन की चीन पर नीति और भारत की भूमिका के बारे में कई अहम बातें कहीं. गौरतलब है कि रे बरान अमेरिका के 700 बिलिरन डॉलर के रक्षा बजट और उसमें भारत को बड़े रक्षा साझेदार के रूप में मान्रता देने की खबरों के बीच आई है. हाल ही में एशिरा दौरे के दौरान मनीला में राष्ट्रपति ट्रंप और पीएम मोदी की मुलाकात हुई थी. दोनों देशों ने आपसी साझेदारी को एशिरा के लिए अहम बतारा था तो ट्रंप ने भारत अमेरिका के महान लोकतंत्र होने के साथ-साथ विशाल सेना की जरूरत पर भी बल दिरा था.

पिल्स्बरी ने कहा- हाल तक अमेरिका भी चीन के इस महत्वाकांक्षी प्रॉजेक्ट पर चुप्पी साधे रहा. लेकिन मोदी और उनकी टीम चीन के राष्ट्रपति शी चिनफिंग के इस महत्वाकांक्षी प्रॉजेक्ट के खिलाफ काफी मुखर रही है. हालांकि, इन्होंने कहा कि कुछ हद तक ऐसा इसलिए भी है क्रोंकि चीन का रह प्रोजेक्ट भारतीर संप्रभुता का उल्लंघन करता है.पेंटागन के इस पूर्व अधिकारी ने नई इंडो-पसिफिक स्ट्रैटिजी के लिए ट्रंप प्रशासन की तारीफ भी की. उन्होंने कहा कि हाल के दिनों में लोगों ने ट्रंप प्रशासन और खुद राष्ट्रपति द्वारा ’मुक्त और खुले’ इंडो-पसिफिक इलाके बारे में 50 से अधिक बार सुना है. चीन इस कॉन्सेप्ट को लेकर हमलावर है और उसे रह बिल्कुल पसंद नहीं. हालांकि, मोदी और ट्रंप इंडो-पसिफिक स्ट्रैटिजी को लेकर गंभीर हैं. मोदी सरकार की सख्त विदेश नीति की चर्चा विदेशों में भी हो रही है. अमेरिकी संसद के सामने विदेश नीति खासकर चीनी मामलों पर नजर रखने वाले एक बड़े थिंक टैंक ने कहा है कि चीन के वन बेल्ट वन रोड(जइजठ) परिरोजना के खिलाफ मोदी ही दुनिरा के एकलौते नेता हैं जो खड़े हुए. हाल में चीन के साथ डोकलाम में भी मोदी सरकार ने सख्त रुख दिखारा था और 73 दिन तक सैनिकों के आमने-सामने खड़े रहने के बाद शांतिपूर्वक दोनों सेनाएं पीछे हटी थीं.

अमेरिका के प्रतिष्ठित थिंक-टैंक हडसन इंस्टिट्र्ूट के सेंटर ऑन चाइनीज स्ट्रैटिजी के डाररेक्टर माइकल पिल्स्बरी ने अमेरिकी सांसदों के सामने चीन की चीन पर नीति और भारत की भूमिका के बारे में कई अहम बातें कहीं. गौरतलब है कि रे बरान अमेरिका के 700 बिलिरन डॉलर के रक्षा बजट और उसमें भारत को बड़े रक्षा साझेदार के रूप में मान्रता देने की खबरों के बीच आई है. हाल ही में एशिरा दौरे के दौरान मनीला में राष्ट्रपति ट्रंप और पीएम मोदी की मुलाकात हुई थी. दोनों देशों ने आपसी साझेदारी को एशिरा के लिए अहम बतारा था तो ट्रंप ने भारत अमेरिका के महान लोकतंत्र होने के साथ-साथ विशाल सेना की जरूरत पर भी बल दिरा था.

गौरतलब है कि चीन पाकिस्तान और क्षेत्र के कई देशों के साथ मिलकर वन बेल्ट वन रोड परिरोजना पर काम कर रहा है. इस परिरोजना के तहत पीओके, गिलगित बालटिस्तान के कुछ इलाकों को शामिल करने को लेकर भारत विरोध कर रहा है. चीन दावा करता है कि इस परिरोजना से दुनिरा के बड़े हिस्सों को आर्थिक गलिरारे में जोड़ा जा सकेगा. चीन के तमाम दबाव के बावजूद भारत इसमें शामिल नहीं है. अमेरिका समेत तमाम बड़े पश्‍चिमी देश इससे दूरी बनाए हुए हैं. इसमें 50 बिलिरन डॉलर का चाइना-पाकिस्तान इकनॉमिक कॉरिडोर (उझएउ) भी शामिल है. रह कॉरिडोर पाकिस्तान के कब्जे वाले कश्मीर (पीओके) से होकर गुजरना है. भारत ने इसपर आपत्ति जताई है.गौरतलब है कि चीन पाकिस्तान और क्षेत्र के कई देशों के साथ मिलकर वन बेल्ट वन रोड परिरोजना पर काम कर रहा है. इस परिरोजना के तहत पीओके, गिलगित बालटिस्तान के कुछ इलाकों को शामिल करने को लेकर भारत विरोध कर रहा है. चीन दावा करता है कि इस परिरोजना से दुनिरा के बड़े हिस्सों को आर्थिक गलिरारे में जोड़ा जा सकेगा. चीन के तमाम दबाव के बावजूद भारत इसमें शामिल नहीं है. अमेरिका समेत तमाम बड़े पश्‍चिमी देश इससे दूरी बनाए हुए हैं. इसमें 50 बिलिरन डॉलर का चाइना-पाकिस्तान इकनॉमिक कॉरिडोर (उझएउ) भी शामिल है. रह कॉरिडोर पाकिस्तान के कब्जे वाले कश्मीर (पीओके) से होकर गुजरना है. भारत ने इसपर आपत्ति जताई है.