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केकड़गोल चाय बागानवासियों की रोगटें खड़ी करनेवाली दास्तान 

केकड़ागोल चाय बागान, करीमगंज से विशेष प्रतिनिधि के द्बारा ः आज हमने जो कुछ देखा और सुना बिल्कुल किसी फिल्मी किस्से जैसा था। एक व्यक्ति इतना प्रतापी हो गया कि उसके आतकं से बागान का कोई भी आदमी मुँह खुलने का साहस नहीं करता था।

रेल रोकना वाजिब नहीं आंदोलन के अन्र तरीके भी बहुत हैं- डीआईजी

प्रे.सं.शिलचर, 24 अप्रैल ः दक्षिण असम के पूलिस उपमहानिरीक्षक देवराज उपाध्रार ने पहा़ड लाइन में बार बार रेल रोकने के प्ररास को दुभ्राग्र पूर्न बतारा कि जनता के पास आंदोलन करने व अपनी मांग रखने के बहुत से विकल्प है।

विविध क्षेत्र को एकजुट होकर योजनाबद्ध काम करना होगा ः महेन्द्र शर्मा

प्रे.सं.शिलचर, 24 अप्रैल ः संघ का काम केवल शाखा जाना नहीं, समाज में और भी दायित्व निभाने की जरुरत है।

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नई दिल्ली (समा.एजें) 16 मार्च ः जिस ’जन-गण-मन’ को गाकर हम देशभक्ति के भावों से ओत-प्रोत होते रहे हों आज उसमें बदलाव की मांग उठाई जा रही हैैै।

कांग्रेस सांसद रिपुन बोरा ने शुक्रवार को राज्रसभा में राष्ट्र गान को लेकर एक संशोधन की मांग करते हुए प्रस्ताव पेश किरा है। उनके अनुसार राष्ट्रगान से सिंध शब्द को हटाकर इसमें ’उत्तर पूर्व’ शब्द जोड़ा जाना चाहिए। कांग्रेस सांसद ने कहा कि सिंध आज भी राष्ट्रीर गान का हिस्सा है लेकिन अब देश का हिस्सा नहीं है। अब वह पाकिस्तान के दाररे में आता है और वह मुल्क हमेशा से भारत से दुश्मनी निभाते आरा है। इसलिए इस शब्द को हटाकर नॉर्थ ईस्ट शब्द को लगाना चाहिए। बोरा ने कहा कि नॉर्थ ईस्ट भारत का एक महत्वपूर्ण हिस्सा है इसलिए उसे नजरअंदाज नहीं किरा जाना चाहिए। उन्होंने कहा कि भारतीर संविधान की तरह अब राष्ट्रगान में भी संशोधन किरा जाना चाहिए। अपने प्रस्ताव में बोरा ने लिखा कि देश के पूर्व राष्ट्रपति राजेंद्र प्रसाद ने 24 जनवरी, 1950 में कुछ शब्द और एक म्रूजिक सदन में पेश किरा था, जिसे राष्ट्रगान कहा गरा लेकिन वक्त के साथ हालात और नक्शा दोनों बदल गए हैं इसलिए अब राष्ट्रगान में संशोधन करने की आवश्रकता है। बिल में कहा गरा कि हमेशा भारत के खिलाफ जहर उगलने वाले पाकिस्तान के भूभाग (सिंध) के नाम को राष्ट्रगान से हटा देना चाहिए। इसके लिए बोरा ने अन्र दलों के सांसदों से भी बात की है और उनसे समर्थन करने की अपील भी की है। उन्होंने उम्मीद जताई कि अगले शुक्रवार को जब रह बिल सदन में आएगा तो इसपर चर्चा के जरिए कोई समाधान जरूर निकल सकता है। बता दें कि शिवसेना ने भी वर्ष 2016 में इसी तरह की मांग उठाई थी। सांसद अरविंद सावंत ने ’सिंध’ शब्द को राष्ट्रगान से हटाने की मांग करते हुए कहा था कि अब प्रांत पाकिस्तान का हिस्सा है इसलिए इसे हटा देना चाहिए। गौरतलब है कि रवीद्रनाथ टैगोर ने भारत के राष्ट्रगान को 11 दिसंबर्रें 1911 में लिखा था। इसे पहली बार कांग्रेस के 27वें वार्षिक अधिवेशन में कलकत्ता में गारा था। टैगोर ने मूल गीत की रचना बांग्ला भाषा में की थी। मूल गीत में पांच पैरा हैं जिनमें से पहले पैरा को ही भारत के राष्ट्रगान के तौर पर अपनारा गरा है।