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एपीएससी कार्यालय में पुलिस ने फिर चलाया अभियान, १४० कॉपियां जब्त

गुवाहाटी, ०७ जून (हि.स.)। असम पब्लिक सर्विस कमिशन (एपीएससी) में कैस फार जॉब मामले की जांच जोरशोर से चल रही है।

प्रदेश महिला कांग्रेस ने महिला सुरक्षा को लेकर किया प्रदर्शन

गुवाहाटी, ०७ जून (हि.स.)। असम की राजधानी गुवाहाटी के एबीसी इलाके में स्थित असम प्रदेश कांग्रेस मुख्यालय राजीव भवन के सामने महिला कांग्रेस कमेटी की सदस्याओं ने बुधवार को केंद्र और राज्य सरकार के विरूद्ध जमकर नारेबाजी की।

कार्र्बी आंग्लांग स्वायत्तशासी परिषद चुनाव में कांग्रेस ने तेज किया प्रचार

कार्बी आंग्लांग, ०७ जून (हि.स.)। असम प्रदेश कांग्रेस पार्टी ने भी कार्बी आंग्लांग स्वायत्तशासी परिषद चुनाव में अपने उम्मीदवारों के समर्थन में चुनाव प्रचार तेज किया है।

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ढोल की पोल १९ मई को खुलने वाली है, यानि इबीएम मशीनों में बंद भाग्यवानों व अभागों का भविष्य जनता के सामने लंबे इंतजार ४५ दिनों के बाद आयेगा।

४ अप्रैल को हुए असम के प्रथम चरण के विधासभा चुनावों के बाद लगातार रुक-रुक कर पांच राज्यों में मतदान हो रहे हैं। इसबार असम के चुनाव में भाजपा व कांग्रेस ने गांव-गांव में यानि १२६ विधानसभा क्षेत्रों में सिलसिलेवार तथा धुआँधार प्रचार किया, वादे भी ऐसे अटपटे थे कि जनता कितनी भ्रमित होगी, कहा नहीं जा सकता। इस बार आसमान से उतरते स्टार प्रचारकों ने धरती पर बैठे मतदाताओं को घ‹डी देखकर बहलाने, समझाने की कोशिश की। अधिकांश क्षेत्रों में लोगों को भाषण सुनने से ज्यादा हेलिकाप्टर देखने की उत्सुकता थी।

इसबार के असम चुनाव में भारतीय जनता पार्टी ने मिशन-८४ के आधार पर चुनाव की रणनीति बनायी थी, लेकिन अब जब मतगणना के दिन नजदीक आ गये तो उठापटक जारी है, क्योंकि कांग्रेस भी चौथी बार पक्का सरकार बनाने का दावा यों कर रही है जैसे कि अंगुलियों पर जीतने वाले प्रत्याशियों के नाम हों। भारतीय जनता पार्टी के साथ असम गणपरिषद है तो अबकी बार बो‹डो पिपुल्स फ्रंट  भी है। भाजपा का साथ अगप शायद ही छो‹ड सकता है किन्तु बीपीएफ के सुर बदलने लगे हैं, इसलिए यदि कांग्रेस-युडीएफ को ५५ से अधिक सींटें मिल गयी तो बीपीएफ अपने पुराने घर में जाने को तैयार हो जाएगा। यह भय दोनों राष्ट्रीय दलों को सता रही है, इसलिए दोनों दल किसी को भी अछुत नहीं मान रहे हैं, किसी ना किसी बहाने उन्हें मनाने व रिझाने में जुट गये हैं।

राजस्थान के कई शहरों से सटोरियों के टेलिफोन आते हैं कि इसबार किसकी सरकार बनेगी, सरकार किसकी बनेगी यह तो मतगणना पर ही सारा दारोमदार है। क्योेंकि दिल्ली व बिहार के चुनावों में जो लहर व समिक्षाएँ देखी गयी, उसके बावजूद उल्टी गंगा बह गयी। क्योंकि राष्ट्रीय मुद्दे व स्थानीय मुद्दे दोनों अलग-अलग होते हैं, इसलिए प्रातों में होने वाले विधानसभा चुनावों में स्थानीय नेताओं को ही प्रचार प्रसार में अवसर देने से उन्हें गांव, शहर व अन्य समस्याओं का ज्ञान होता है। हवाई जहाज से पसीना पोछने व पानी पीते स्टार प्रचारकों के कुछ मिनट के भाषणों से अब जनता प्रभावित नहीं होती। यह तो सभी को मालूम है कि चुनावी रैलियों में भी‹ड कैसे जुटाई जाती है। परम्परागत मतदाता सैद्धान्तिक रुप से आज भी अपनी चहेती पार्टी को वोट देता है। हां युवा मतदाता स्वेच्छा से कभी कभी मतदान जरुर करता है। बाकी देखा गया है कि हर परिवार एकमत से एक ही पार्टी को मतदान करते हैं।

१९ मई को देश के पांच राज्यों का चुनाव परिणाम आयेगा, इससे पूरे देश में राजनीतिक हलचल इतनी ब‹ढ जाएगी कि सरकार बनाने के लिे सभी दांवपेंच लगाये जायेंगे। जहाँ पूर्णमत की सरकारें बनेंगी, उनका विकास भी होगा लेकिन जहाँ qखचातानी वाली त्रिशंकु अथवा जो‹ड-तो‹ड की सरकार बनेगी, वहाँ ५ साल तक विकास कम विवाद ज्यादा होगा।

असम में भाजपा गठबंधन अथवा कांग्रेस गठबंधन की एक ही राष्ट्रीय दल की सरकार बने तो असम के हितों का ध्यान रखा जाएगा तथा जमकर विकास भी होगा यदि त्रिशंकु सरकार के आसार बने तो सिद्धान्तो से हटकर अनमेल सरकार बनाने की नौबत आ जाएगी। लेकिन भाजपा व कांग्रेस में एक ही दल अथवा गठबंधन की सरकार आती है, वो असम के हित में होगा।