भारत वर्ष के असम राज्य के एक किनारे बंगलादेश से घिरे क्षेत्र को बराकघाटी बोलते हैं, जो कभी बंगाल प्रदेश के अन्तर्गत हुआ करता था। आजादी के बाद मत विभाजन में असम से जोड़ा गया। बराकघाटी के अन्तर्गत तीन जिलों काछाड़, करीमगंज व हाइलाकान्दी में लाखों की संख्या में हिन्दीभाषी निवास करते हैं। डेढ़ दो सौ वर्ष पहले चाय बागान की खेती के लिए उत्तर प्रदेश, बिहार, मध्य प्रदेश, उड़ीसा आदि क्षेत्रों से अंग्रेजों द्वारा ले आये गये लोगों का सम्पर्क अपने मूल स्थान से लगभग कटा हुआ सा है। चाय बागानों में श्रमिक के रुप में र्कायरत लाखों लोग मातृभाषा शिक्षा से भी वंचित हैं। राष्ट्रभाषा बोलने वाले शिक्षा से वंचित होने के कारण देश की मुख्य धारा से भी वंचित हैं। बराकघाटी से लगे हुए त्रिपुरा, मिजोरम, मणिपुर, मेघालय, नागालैण्ड व पूर्वोत्तर के अन्य हिस्सों में क्या घट रहा है, इसे जानने के लिए इस अंचल में कोई माध्यम न होने से एक रिक्तता स्पष्ट दृष्टिगोचर हो रही थी। साथ ही केन्द्रीय संस्थानों में नौकरी करने आये, व्यापार के सिलसिले में निवास कर रहे हजारों लोग जिन्हें स्थानीय भाषा का ज्ञान नहीं है, ऐसे लोगों के स्थानीय समाचारों से अनभिज्ञ होने के कारण, आम आदमी से जुड़ने का कोई माध्यम नहीं बन पा रहा था। इन्हीं सब विषयों को ध्यान में रखते हुए देश के साथ बराकघाटी को जोड़ने के लिए प्रेरणा भारती का शुभारम्भ चैत्र पूर्णिमा अप्रैल १९९८ में अनियतकालीन साहित्यिक पत्रिका के रुप में बलिया जिला, उत्तर प्रदेश निवासी श्री दिलीप कुमार ने किया था। श्री दिलीप कुमार के प्रयास से गठित स्थानीय संस्था बराक हिन्दी साहित्य समिति के तत्वावधान में पत्रिका एक वर्ष चलने के पश्चात बन्द हो गयी । एक वर्ष में प्रथम चार अंक शिलचर से प्रकाशित होने के पश्चात, ४ अंक पटना से प्रकाशित हुआ। १२ पृष्ठ की साहित्यिक पत्रिका र्पयाप्त सहयोग के अभाव एवं पाठकों के अरुचि के चलते बंद हो गई।
तीन वर्ष पश्चात जब २००३ में उपरी असम में हिन्दीभाषियों पर हमले प्रारम्भ हुए और स्थानीय मीडिया ने इन समाचारों को यथोचित महत्व नहीं दिया तो स्थानीय हिन्दीभाषियों के मर्मस्थल पर चोट पड़ी। पूर्वोत्तर में घट रही अराष्ट्रीय व देश विरोधी घटनाओं को देश के सम्मुख उजागर करना आवश्यक समझ कर समाज के कई प्रमुख व्यक्ति आगे आये। उनमें से श्री रामअवतार अग्रवाल, श्री उदयशंकर गोस्वामी, सत्येन्द्र प्रसाद सिंह आदि के सहयोग से समाचार - विचार पत्रिका के रुप में पुन: सितम्बर २००३ से प्रेरणा भारती का मासिक प्रकाशन प्रारम्भ हो गया। सम्पादक का दायित्व संभाला श्री दिलीप कुमार की धर्मपत्नी श्रीमती सीमा कुमार ने। नवम्बर, दिसम्बर, जनवरी में पत्रिका रंगीन प्रकाशित की गयी, वाराणसी से लक्ष्मीनारायण महायज्ञ विशेषांक प्रकाशित होने के बाद होली के अवसर पर पत्रिका का आकार टेबलाइट कर दिया गया। यहाँ से पत्रिका ने वेब आफसेट में कदम रखा। शिलचर में सोनार काछाड़ के सहयोग से पत्रिका ने समाचार पत्र का रुप ले लिया। पाठकों की बढ़ती रुचि व शुभचिन्तकों के सहयोग से पत्रिका अप्रैल २००४ में पाक्षिक हो गयी। पत्रिका का कलेवर भी परिवर्तित हुआ।
संपादक श्रीमती सीमा कुमार के देखरेख में, संरक्षक सम्पादक श्री अशोक वर्मा व सम्पादक मण्डल के सदस्य श्री उमाकान्त तिवारी, दीपचन्द शर्मा, सुनील शर्मा, चितरंजन भारती व डॉ० अंजनी कुमार दुबे के मार्गदर्शन व सहयोग से शनै: शनै: पत्रिका दिनोंदिन उन्नति की तरफ अग्रसर होने लगी। संचालक मण्डल के सदस्य श्री रामकुमार मल्लाह, अरुण कुमार महतो, चन्द्रमा प्रसाद कोईरी, सुनील कुमार सिंह व दिवाकर राय के अतुलनीय सहयोग से पत्रिका निरन्तर उत्थान करती गयी। उसी समय केन्द्रीय सरकार की सेवा में शिलचर आये दो अधिकारी श्री जितेन्द्र कुमार द्विवेदी व श्री जे.बी.सिंह प्रेरणा भारती के साथ जुड़े, उन्होंने पत्रिका को साप्ताहिक करने हेतु उत्साहित किया। अप्रैल २००५ से पत्रिका साप्ताहिक के रुप में प्रकाशित होने लगी। साप्ताहिक के रुप में पत्रिका को नियमित व व्यवस्थित स्वरुप देने के लिए अहर्निश प्रयास चलता रहा। प्रेरणा भारती के लेखक व साहित्यकार सर्वश्री घनश्याम पाण्डेय शास्त्री, सुरेश वर्मा, जयद्रथ ग्वाला, सीमा राय, घनश्याम पाण्डेय, मोनी वर्मा व सहयोगी शिवनारायण पासी, चतुर्भुज शाह, रुपक पाल, रुपनारायण राय, जवाहर लाल पाण्डेय, दीपक प्रजापति, अजय कुमार सिंह, उमाकान्त यादव, बाबुल गोस्वामी आदि पत्रिका को निखारने में लगातार अपनी महत्वपूर्ण भूमिका निभा रहे हैं। प्रेरणा भारती परिवार के सदस्य श्री रामकुमार (पिन्टू), मोनिका गोस्वामी, प्रेम कानु, अंकु देव , सजल नाथ व शिवकुमार पत्रिका की वृद्धि में सतत लगे हुए हैं।
विभिन्न समय जब-जब पत्रिका में महत्वपूर्ण विषय आया, तब-तब पत्रिका के मुद्रण में व्यवधान आता रहा। २००४ में शिलचर में हिन्दीभाषी व्यापारियों पर हुए सार्वजनिक हमले के समय मुद्रण स्थान में परिवर्तन करना पड़ा। कभी कम्प्यूटर की समस्या, कभी प्रिंटर की, कभी प्लेट की, कभी कागज की , कभी बिजली की अर्थात किसी न किसी बहाने पत्रिका के सम्मुख व्यवधान आते रहे। सरकारी और प्रशासनिक उपेक्षा को झेलते हुए फिर भी विगत २००३ से पत्रिका का प्रकाशन निरन्तर जारी है। समय से पत्रिका के प्रकाशन में आ रही बाधाओं को देखते हुए प्रेरणा भारती के आधारस्तम्भ सर्वश्री रामअवतार अग्रवाल, श्रीराम जी, कमलेश सिंह, रामकुमार मल्लाह, अशोक वर्मा, अरुण कुमार महतो, अवधेश कुमार सिंह, दिवाकर राय, कुँवर ऋतेश कुमार, प्रदीप गोस्वामी, चंद्रमा प्रसाद कोईरी, गिरीश गुप्ता, शांतिलाल डागा, कमल बिहानी आदि ने प्रेरणा भारती का अपना मुद्रणालय प्रारम्भ करने में सभी प्रकार से सहयोग एवं मार्गदर्शन किया। ११ फरवरी २००८ से मेहरपुर शिलचर में प्रेरणा भारती का प्रकाशन अपने मुद्रणालय से प्रारम्भ हो गया। सौभाग्य से पत्रिका का सम्पर्क हमारे पिता समान स्थानीय संरक्षक श्री रामकुमार मल्लाह के कनिष्ठ पुत्र श्री राजेश मल्लाह से पिछले वर्ष हुआ जिन्होंने अथक परिश्रम करके २००९ के होली के उपहार स्वरूप पूरी दुनिया के हिन्दी पाठकों के लिए प्रेरणा भारती की वेबसाइट सेवा प्रारम्भ की। सभी पाठकों, पत्रकार-साहित्यकार व प्रेरणा भारती परिवार के सद्प्रयासों व शुभकामनाओं से प्रेरणा भारती शीघ्र ही दैनिक के रुप में आप सभी के सम्मुख आ सकेगी। यही आशा और विश्वास रखते हैं।
सम्पर्क : श्री दिलीप कुमार (प्रकाशक) / श्रीमती सीमा कुमार (सम्पादक)
प्रेरणा भारती मेहरपुर, शिलचर, असम-788015,
ङसचैन -
इस ईमेल पते को संरक्षित किया जा रहा है स्पैम बॉट से ! आपको यह देखने के लिए जावास्क्रिप्ट सक्रिय होना चहिये
(M) 09435213512 , Phone/Fax: 03842-242633







